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सबरीमाला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश पर SC के फैसले के विरोध में शिवसेना, 12 घंटे की हड़ताल

शिवसेना की केरल इकाई सबरीमाला मंदिर में सभी उम्र की महिलाओं को प्रवेश देने के सुप्रीम कोर्ट के फैसले से खफा है. इसके विरोध मे शिवसेना ने एक अक्टूबर को केरल में 12 घंटे के बंद का आह़वान किया है

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Thiruvanthpurqm : शिवसेना की केरल इकाई सबरीमाला मंदिर में सभी उम्र की महिलाओं को प्रवेश देने के सुप्रीम कोर्ट के फैसले से खफा है. इसके विरोध मे शिवसेना ने एक अक्टूबर को केरल में 12 घंटे की हड़ताल का आह़वान किया है.  बता दें कि सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा ने ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए आदेश दिया था कि सभी उम्र की महिलाएं सबरीमाला मंदिर में जा सकती हैं. इस संबंध में सीजेआई दीपक मिश्रा ने फैसला सुनाया था कि महिलाएं समाज में बराबर की हिस्सेदार हैं. समाज अपनी सोच बदले. कहा कि धर्म के मामले में भी महिलाएं बराबर की हिस्सेदार हैं. चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली पांच जजों की बेंच ने इस मामले की सुनवाई अगस्त में ही पूरी कर ली थी. कोर्ट ने उस समय अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था. बता दें कि फैसला 4-1 के बहुमत से आया था. सीजेआई दीपक मिश्रा के अलावा बेंच में जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस नरीमन और जस्टिस इंदु मल्होत्रा शामिल थे. जस्टिस इंदु मल्होत्रा का फैसला मंदिर के पक्ष में था

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मंदिर में महिलाओं के प्रवेश पर रोक दलितों के साथ छुआछूत की तरह

मंदिर में 10 से 50 वर्ष आयु की महिलाओं के प्रवेश पर रोक के विरोध में सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गयी थी. इस रोक के पीछे तर्क था कि महिलाएं मासिक धर्म के समय अपवित्र मानी जाती हैं, ऐसी स्थिति में उन्हें मंदिर में प्रवेश नहीं दिया जा सकता. कोर्ट के अनुसार इस आधार पर महिलाओं का प्रवेश रोका जाता है कि वे मासिक धर्म के समय अपवित्र हैं, तो यह भी दलितों के साथ छुआछूत की तरह है. सुनवाई के क्रम में सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस रोहिंटन नरीमन ने पूछा था कि इसका तार्किक आधार क्या है?  हालांकि इससे पूर्व केरल हाईकोर्ट ने अपने फैसले में महिलाओं के प्रवेश पर पाबंदी को सही माना था. हाईकोर्ट ने कहा था कि मंदिर में प्रवेश से पहले 41 दिन के ब्रह्मचर्य का पालन करना होता है.  मासिक धर्म के कारण महिलाएं इस धर्म का पालन नहीं कर पातीं.

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