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‘चीन की अर्थव्यवस्था के जहाज का डूबना तय, मारे जायेंगे यात्री’

चीन के भविष्य को लेकर कारोबारी चिंतित, छोड़ रहे हैं देश

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New Delhi: वैश्विक अर्थव्यवस्था में जिस प्रकार से चीन का उभार हुआ था, उसे देख कर आर्थिक विशेषज्ञ हतप्रभ थे. कई विशेषज्ञों ने इस बात की आशंका जाहिर की थी, कि आर्थिक विकास का जो गुब्बारा दिख रहा है, वह जल्द ही फूट सकता है. अमेरिका के साथ चल रही आर्थिक खींचतान और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में आयी कमजोरी की वजह से चीन के गुब्बारे की हवा निकलती हुई दिख रही है.

रियल एस्टेट कारोबारी ने छोड़ा देश

न्यू यॉर्क टाइम्स ने अपनी एक रिपोर्ट में बताया है कि चीन के शंघाई शहर में रियल एस्टेट डेवलपर के रूप में काम करनेवाले चन तियनयॉन्ग ने पिछले महीने पूरा कारोबार समेट लिया और माल्टा चले गये. अखबार कहता है कि अब उनके निकट भविष्य में लौटने की कोई योजना भी नहीं है. जाने के बाद उन्होंने सोशल मीडिया पर 28 पेज का एक आलेख लिखा और विस्तार से बताया कि उन्होंने चीन क्यों छोड़ दिया. उन्होंने जो लिखा वह बड़ी सोचनीय स्थित दर्शाती है. उन्होंने लिखा कि चीन की अर्थव्यवस्था उस बड़े जहाज की तरह है, जो डूबने जा रहा है. जहाज का डूबना तय है और पैसेंजर मारे जाएंगे. मेरे दोस्तों, यदि आप इसे छोड़ सकते हैं तो कृपया जितनी जल्दी संभव हो व्यवस्था कर लें.

उद्यमी भरोसा खो रहे

रिपोर्ट के अनुसार चन की लिखी ये बातें कितने लोगों ने पढ़ी यह तो स्पष्ट नहीं है, पर चन ने सार्वजनिक रूप से वहीं बातें कहीं हैं जो कई व्यापारी निजी बातचीत में कहते हैं. चीन में सेंसर्ड इंटरनेट से इस आलेख को हटा दिया गया है. चीन के नेतृत्व ने दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था को गलत तरीके से चलाया और चीन के उद्यमी देश के भविष्य में भरोसा खो रहे हैं.

ट्रेड वार का भी बड़ा असर

अमेरिका के साथ ट्रेड वॉर ने चीन के आर्थिक विकास को बाधित किया है. लेकिन उद्यमी मुख्यतौर पर इस बात से चिंतित हैं कि चीन आवश्यक आर्थिक और राजनीतिक सुधारों को लागू नहीं करेगा. इसके विपरीत शी जिनपिंग के 2012 में कम्युनिस्ट पार्टी पर नियंत्रण हासिल करने के बाद, पार्टी ने चीनी समाज के हर पहलू में प्रभुत्व को बढ़ाया है.

अमीरों ने खोया विश्वास

हालिया सर्वे के अनुसार चीन के केवल एक तिहाई अमीर ही कहते हैं कि वे चीन के आर्थिक परिदृश्यों को लेकर बहुत आशावादी हैं. दो साल पहले करीब दो तिहाई लोगों ने कहा था कि उनमें बहुत विश्वास है. पूरी तरह विश्वास खो चुके लोगों की संख्या भी 2018 की तुलना में दोगुनी हो गई है और अब करीब 14 फीसदी लोग इस श्रेणी में हैं. करीब आधे लोगों ने कहा कि वे किसी दूसरे देश में जाने की सोच रहे हैं या प्रक्रिया की शुरुआत कर दी है.

आर्थिक मुद्दों पर बात करना भी खतरनाक

न्यू यॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट में कहा गया है कि हू का कॉमेंट डिप्लोमैटिक है। निजी बातचीत में कोई कारोबारी अधिक गुस्से और डर के साथ बोलते हैं। वे गोपनीयता की गुजारिश करते हैं, क्योंकि चीन के इस माहौल में आर्थिक मुद्दों पर बात करना भी खतरनाक हो गया है। बहुत से कारोबारी इस स्थिति के लिए खराब नीतियों और नेतृत्व को जिम्मेदार बताते हैं।

28 सालों में सबसे बुरी स्थिति

चीन की आर्थिक विकास दर साल 2018 में 6.6 फीसदी रही, जो 28 वर्षों का निचला स्तर है. अंतरराष्ट्रीय मुद्राकोष ने कहा है कि 2019 और 2020 में चीन की अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर 6.2 प्रतिशत रहने का अनुमान है.

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