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शिया मीर बाकी ने बनवाई थी बाबरी मस्जिद, राम मंदिर के लिए जमीन दान करना चाहते हैं शिया मुसलमान

शिया वफ्फ बोर्ड ने सुप्रीम कोर्ट में कहा, मुल्क की शांति के लिए जमीन रामलला को देना चाहते हैं

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Ranchi: शिया वफ्फ बोर्ड ने सुप्रीम कोर्ट में कहा है कि वह इलाहाबाद हाई कोर्ट द्वारा मुसलमानों को दी गई एक तिहाई भूमि को राम मंदिर बनाने के लिए हिंदुओं को दान करना चाहता है. शिया वफ्फ बोर्ड का तर्क है कि अयोध्या की विवादित जमीन के असली मालिक वो हैं. क्योंकि मीर बाकी ने ही बाबरी मस्जिद बनवाई थी, जो कि एक शिया थे.

सुन्नी वफ्फ बोर्ड से अलग है शिया वफ्फ बोर्ड की राय

अयोध्या विवाद को लेकर अबतक हिंदू और मुसलमानों के बीच ही विवाद था. लेकिन हाल के दिनों में वसीम रिजवी के नेतृत्व में शिया वफ्फ बोर्ड भी इस विवाद में कूद पड़ा है. शिया वफ्फ बोर्ड का तर्क है कि बाबरी मस्जिद मीर बाकी ने बनवाई थी, जो खुद शिया थे. ऐसे में शिया वफ्फ बोर्ड स्वतः ही पार्टी बन जाता है. शिया वफ्फ बोर्ड शुरु से राम मंदिर के लिए मुसलमानों के हिस्से की जमीन दान करना चाहता है. जबकि सुन्नी वफ्फ बोर्ड का कहना है कि वो इस मामले पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला मानेंगे.

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इस्माइल फारुखी जजमेंट का पड़ सकता है बड़ा असर

सुप्रीम कोर्ट में इस वक्त मुस्लिम पक्षकारों की दलीलें चल रही हैं. इससे पहले सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने 17 मई को हिंदू पक्षकारों की दलीलें सुनी थी. मुसलमान 1994 में आए एक फैसले से डरे हुए हैं. सुप्रीम कोर्ट में 1994 के इस्माइल फारुकी जजमेंट में कहा गया है कि मस्जिद में नमाज पढ़ना इस्लाम का अभिन्न हिस्सा नहीं है. मुस्लिम पक्षकारों को लगता है कि उस जजमेंट के बाद अयोध्या पर उनका पक्ष कमजोर होगा. अतः दो उस जजमेंट को संवैधानिक पीठ को भेजना चाहते थे. लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने मुस्लिम पक्षकारों की इस दलील को ठुकरा दिया है.

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सुप्रीम कोर्ट में कैसे पहुंचा मामला ?

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने 30 सितंबर 2010 को अपने फैसले में कहा गया था कि विवादित लैंड को 3 बराबर हिस्सों में बांटा जाए. जिस जगह रामलला की मूर्ति है उसे रामलला विराजमान को दिया जाए. सीता रसोई और राम चबूतरा निर्मोही अखाड़े को दिया जाए. जबकि बाकी का एक तिहाई लैंड सुन्नी वक्फ बोर्ड को दिया जाए. इलाहाबाद हाईकोर्ट के इस फैसले से असहमति जताते हुए सभी पक्ष सुप्रीम कोर्ट के पास चले गये.

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