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शेहला राशिद का आरोप, घरों में घुस कर लड़कों को ले जा रहे हैं सेना के जवान,  सेना ने आरोप नकारे

NewDelhi : कश्मीर पीपुल्स मूवमेंट की नेता व जेएनयू की छात्रा रहीं शेहला राशिद द्वारा जम्मू-कश्मीर को लेकर सेना पर लगाये गये आरोपों को सेना ने नकार दिया है.  जान लें कि शेहला ने आर्टिकल 370 हटाये जाने के  फैसले के बाद घाटी के हालात को लेकर सेना पर कुछ आरोप लगाये थे, जिन्हें सेना ने बेबुनियाद करार दिया है.  शेहला के अनुसार सशस्त्र बलों के जवान रात के समय घरों में घुसकर लड़कों को ले जा रहे हैं, जानबूझकर राशन बिखेर दे रहे हैं, आटे में तेल मिला रहे हैं. कहा कि  शोपियां में चार लोगों को सेना ने कैंप में ले जाकर प्रताड़ित किया गया. इस क्रम में उनके मुंह के पास माइक रखा गया ताकि उनकी चीखें सुनाकर पूरे इलाके में दहशत फैलाई जा सके.  वे डर का माहौल पैदा कर रहे है.

शेहला को गिरफ्तार करने की मांग

इसके बाद सेना ने बयान जारी करते हुए कहा, इस तरह की अपुष्ट और फर्जी खबरें विरोधी तत्वों द्वारा  फैलाई जा रही हैं. उधर  सुप्रीम कोर्ट के वकील अलख आलोक श्रीवास्तव ने शेहला राशिद के खिलाफ आपराधिक शिकायत दर्ज करायी  है. उन्होंने भारत सरकार और सेना के के खिलाफ कथित तौर पर फर्जी खबरें फैलाने पर शेहला को गिरफ्तार करने की मांग की है. केस दायर करने वाले वकील ने कहा कि शेहला भारत और भारतीय सेना की छवि को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर धूमिल करने का काम कर रही हैं. वह किसी एजेंडे के तहत भारत-विरोधी लॉबी के लिए काम कर रही हैं. वकील ने कहा, उन्होंने अपने आरोपों को लेकर न कोई तारीख, न कोई ठोस सबूत और न ही किसी का नाम दिया है. उनका एक ही मंसूबा है भारत को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नीचा दिखाना.

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विदेशी पत्रकार और अन्य लोग रिट्वीट कर चुके हैं

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उनके ट्वीट को पहले ही कई सारे विदेशी पत्रकार और अन्य लोग रिट्वीट कर चुके हैं.  वह न सिर्फ जम्मू-कश्मीर में अस्थिरता और माहौल खराब करना चाह रही हैं, बल्कि भारत की छवि को भी धूमिल करने का काम कर रही हैं. वह विदेशी एक लॉबी के लिए काम कर रही हैं. शेहला ने रविवार, 18 अगस्त को सिलसिलेवार ट्विट  किया था कि लोग कह रहे हैं कि जम्मू-कश्मीर पुलिस का कानून-व्यवस्था पर कोई नियंत्रण नहीं है.  सब कुछ अर्धसैन्य बलों के हाथ में है. कहा कि  सीआरपीएफ जवान के खिलाफ शिकायत करने वाले एक एसएचओ को ट्रांसफर कर दिया गया.  उनके पास सिर्फ डंडे हैं, उन्हें रिवॉल्वर भी नहीं दी जा रही.  स्थानीय पत्रकारों पर प्रतिबंध लगा दिया गया है. राज्य में एलपीजी की भारी कमी है और गैस एजेंसियां बंद हैं.

इसे भी पढ़ेंः कश्मीर में आर्टिकल 370 हटाये जाने के बाद से अब तक लगभग 4000 लोगों के गिरफ्तार होने की खबर

 

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