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श्रमदान कर सड़क बना रहे लोगों से ‘बेशर्म’ दारोगा ने लिया घूस, एसपी ने किया सस्पेंड

डीएसपी कर रहे पूरे मामले की जांच

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Hazaribagh: आमतौर पर लोग स्थानीय समस्याओं को लेकर पुलिस-जिला प्रशासन से मदद की गुहार लगाते हैं. कभी मदद मिलती है, को कभी केवल आश्वासन. हजारीबाग के बड़कागांव में ग्रामीणों ने सिस्टम की सुस्त चाल से इतर खुद इलाके की समस्या दूर करनी चाही. लेकिन, इनकी सकारात्मक सोच और पहल को रिश्वतखोरी की ऐसी नजर लगी कि ये लोग अब खौफ के साये में जीने को मजबूर है.

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दरअसल, बड़कागांव बेल नदी के पास एक कच्ची सड़क है. बरसात में ये रास्ता कीचड़ से भर जाता है. ऐसे में लोगों ने आवागमन की परेशानी को देखते हुए, खुद इसके जीर्णाद्धार का बीड़ा उठाया. जो काम सरकारी तंत्र को करना चाहिए था, उसका बीड़ा गांववालों ने उठाया, लेकिन इसमें मदद करने की बजाय सरकारी अधिकारी ने  ना सिर्फ उसमें अवरोध पैदा किया बल्कि ऐसी स्तिथि पैदा कर दी कि लोगों को श्रमदान कर सड़क बनाना छोड़, आपस में चंदा कर “बेशर्म” दारोगा सुमन कुमार को पचास हजार रुपया घूस देने पड़े.

अवैध बालू खनन का लगाया था आरोप

ग्रामीणों ने कच्ची सड़क को भरने के लिए बड़कागांव बेल नदी के पास से मिट्टीनुमा बालू उठाकर सड़क पर गिराने को एकत्रित हुए. टैक्ट्रर पर बालू अभी आधा ही भरा था कि बड़कागांव थाने के जमादार संजय यादव आ धमके और गाड़ी जब्त कर थाने ले गए. स्थानीय लोगों ने जमादार को मनाने की हर मुमकिन कोशिश की. लेकिन वो नहीं मानें.

बाद में ट्रैक्टर मालिक पंकज ठाकुर को देर रात थाने बुलाकर थानेदार ने ट्रैक्टर छोड़ने के एवज में साठ हजार रुपए की मांग की और यह भी कहा कि अवैध बालू चलाने के लिए ट्रैक्टर से दस हजार और हाइवा से तीस हजार प्रति माह देना होगा, जैसा अन्य लोग देते हैं. हालांकि, पंकज ने अपनी सफाई में कहा  कि उसने अवैध बालू का धंधा नही किया, बल्कि सार्वजनिक कार्य के लिए ट्रैक्टर दिया था, इसलिए उसे माफ करें.

आखिर में ट्रैक्टर छोड़ने का सौदा पचास हजार में तय हुआ. सड़क बना रहे ग्रामीणों ने आपस मे चंदा देकर पंकज को पचास हजार दिये तब जाकर रात एक बजे थाने से ट्रैक्टर को छोड़ा गया. घूस लेने के साथ ही धमकी भी दी गई कि किसी को कुछ बताया तो इतने केस करेंगे कि बर्बाद हो जाओग.

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एसपी से की गई लिखित शिकायत

थानेदार की धमकी से डरे हुए ग्रामीणों ने हिम्मत दिखाई और दूसरे दिन स्थानीय युवकों ने सारी घटनाक्रमों की लिखित जानकारी एसपी मयूर कन्हैया लाल पटेल और डीआईजी पंकज कंबोज को दी. एसपी ने त्वरित कार्रवाई करते हुए डीएसपी के के महतो को जांच कर रिपोर्ट देने का निर्देश दिए.

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डीआईजी और एसपी को लिखित शिकायत दिये जाने के बाद, जैसे ही पंकज घर पहुंचा ही था कि कुछ देर बाद सादे ड्रेस में कुछ लोग उसके घर पहुंचे और खुद को पुलिस बताते हुए धमकी दी कि जेल जाना है या मरना है. इस बात से टैक्ट्रर मालिक पंकज डर गया. उसने लोगों की मंशा जाननी चाही. फिर उन लोगों ने कहा कि अपने पैसे लो और जो कहता हूं लिखो. डराकर पकंज से लिखवाया गया कि, की गई शिकायत निराधार है, और लोगों के बहकावे में आकर उसने शिकायत की थी. हालांकि, रात में ही इस बात की भी खबर पंकज ने पुलिस के वरीय अधिकारियों को दे दी. और अहले सुबह सभी ग्रामीणों के पैसे भी लौटा दिये.

अपनी करतूतों को अपरोक्ष रुप से कर रहा सिद्ध

वरिये अधिकारियों से की गई लिखित शिकायत के बाद दारोगा सुमन कुमार थोड़े बौखलाए नजर आये. हालांकि, उन्होंने अपनी हरकतों से अपने कारनामों को अपरोक्ष तौर पर सिद्ध कर दिया. दरअसल मामले के दूसरे दिन ही उसने 15 अगस्त को आठ ट्रैक्टर अवैध बालू पकड़ा. इस हरकत से यह प्रमाणित भी हो गया कि उसके इलाके में बालू का अवैध धंधा चल रहा है.

एसपी ने किया सस्पेंड

मामले की लिखित शिकायत मिलने के बाद एसपी ने तत्काल डीएसपी को मामले की जांच के निर्देश दिये. वही कार्रवाई करते हुए आरोपी दारोगा सुमन कुमार को सस्पेंड कर दिया गया है.

आरोपी दारोगा के कारनामों की फेहरिस्त लम्बी

सुमन कुमार बड़कागांव से पहले शहर के मुफ्फसिल थाना के थानेदार था. वहां इसकी हरकतों से तंग एक व्यवसायी ने खुद को इससे बचाने और कार्रवाई करने के लिए पीएमओ तक शिकायत की थी. वहीं एक युवक को फर्जी हथियार दिखाकर जेल भेजने के मामले में उक्त युवक ने जेल से ही सुमन कुमार पर हरिजन एक्ट और पद का दुरूपयोग करने का मामला दर्ज करने के लिए कोर्ट को पत्र भी लिखा था. पुख्ता सबूतों के साथ जानकारी तो यह भी है कि पैसे लेकर किसी का कोई काम करने का ठेका यह बेझिझक लेता था.

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