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शाहरुख खान के पिता भी पेशावर के उसी किस्सा बाज़ार से आए थे जहां से दिलीप कुमार और पृथ्वी राज कपूर

जन्मदिन पर विशेष

Naveen Sharma

Ranchi : बॉलीवुड के सुपर स्टार शाहरूख खान अभी भले ही अपने बेटे आर्यन खान के क्रूज ड्रग्स केस मामले में फंसने की वजह से पिछले एक महीने से मीडिया की लाइमलाइट में हैं, लेकिन इससे पहले वे अपनी सुपर हिट फिल्मों की वजह से जाने जाते रहे हैं. अमिताभ बच्चन के बाद सुपर स्टार की जो जगह खाली हुई थी उस पर गैर फिल्मी बैकग्राउंड से आए शाहरुख काबिज हुए.

इस दौड़ में उसने अपने समकालीन दोनों खान सलमान और आमिर को तो पीछे छोड़ा ही साथ ही सीनियर अनिल कपूर को भी पछाड़ दिया था. शाहरुख की ये अनूठी कामयाबी काबिले गौर है.

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फौजी टीवी सीरियल का अभिमन्यु

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अस्सी के दशक के अंतिम दौर में दूरदर्शन के टीवी सीरियल फौजी में पहली बार शाहरुख खान को लोगों ने नोटिस किया था. कैप्टन अभिमन्यु का किरदार निभाने वाला यह थोड़ा शर्मिला, थोड़ा शरारती और थोड़ा हकलाने वाला नवयुवक हिंदी सिनेमा का सबसे बड़ा स्टार बनेगा इसका अंदाजा शायद ही किसी ने लगाया होगा.

इसके बाद 1989 में सर्कस धारावाहिक में भी काम किया. इसमें सर्कस में काम करने वाले लोगों के जीवन का वर्णन किया गया था. अज़ीज़ मिर्ज़ा ने इसे निर्देशित किया था.

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दिवाना से की फिल्मी सफर की शुरुआत

शाहरुख ने 1992 में दीवाना से हिंदी फ़िल्मोँ में कदम रखा. पहली ही फिल्म में हिट हो जाने से शाहरूख की पहचान बन गयी. इस फ़िल्म के लिए उन्हें फ़िल्मफ़ेयर पुरस्कार प्रदान भी मिला ऋषि कपूर और दिव्या भारती के साथ वाली इस फिल्म के गीत सुपरहिट रहे थे. इनकी अगली फ़िल्म थी “दिल आशना है” जो नहीं चली.

एंटी हीरो के रोल में खूब जमे

आमतौर पर जो हीरो रोमांटिक भूमिका में हिट हो जाते हैं उनमें एंटी हीरो का किरदार निभाने का माद्दा नहीं होता है. शाहरुख खान से पहले सुनील दत्त, विनोद खन्ना व शत्रुघ्न सिन्हा ने ठीक उल्टा काम किया था वो नकारात्मक भूमिकाएं करने के बाद से हीरो बने थे. शाहरुख ने इस घड़ी को उल्टा घुमाने का साहस दिखाया. उन्होंने कई फ़िल्मों में नकारात्मक भूमिकाएं अदा की जिनमें बाजीगर, डर (1993) और अंजाम (1994) शामिल है.

बाज़ीगर” में हत्यारे का किरदार

इन तीनों ही फिल्मों में वे अपनी एक्टिंग का लोहा मनवाने में कामयाब रहे. नेगेटिव किरदार निभाने के बाद भी वे विलेन नहीं हीरो बने रहे. खासकर युवा दिलों पर राज करने लगे. “बाज़ीगर” में एक हत्यारे का किरदार वाले रोल के लिए उन्हें अपना पहला फ़िल्मफ़ेयर सर्वश्रेष्ठ अभिनेता पुरस्कार मिला.

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डर फिल्म में यादगार भूमिका

खासकर यश चोपड़ा की डर फिल्म में तो उन्होंने यादगार भूमिका की है. किरण बनी जूही चावल से पागलपन की हद तक एकतरफा प्यार करनेवाले प्रेमी की भूमिका में वो कमाल करते हैं. हकला कर किरण से बात करने का अंदाज दर्शकों को पसंद आया था .

वैसे फिल्म के हीरो सन्नी देओल थे लेकिन इसकी सफलता का सारा क्रेडिट शाहरुख खान बटोर कर ले गए. उनके नेगेटिव रोल की परकाष्ठा हम अंजाम में देख सकते हैं. इसमें वे माधुरी दीक्षित से एकतरफा प्यार करनेवाले तथा उसे अपना बनाने के लिए किसी भी हद तक जानेवाले व्यक्ति की भूमिका में इन्होंने जान डाल दी थी.

इसमें शाहरुख का किरदार इतना अधिक पागलपन भरा था कि लोग उससे घृणा करने लग जाएं. अंजाम फिल्म में शाहरुख ने अपने एंटी हीरो भूमिका को चरम पर पहुंचा दिया.उन्हें फ़िल्मफ़ेयर सर्वश्रेष्ठ खलनायक का पुरस्कार भी प्राप्त हुआ.

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रोमांस के किंग

शाहरुख को नंबर वन की कुर्सी दिलाने में उनकी रोमांटिक फिल्मों का सबसे अधिक योगदान है. खासकर दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे में तो काजोल के साथ शाहरुख की केमिस्ट्री गजब ढाती है.1995 में रीलीज हुई आदित्य चोपड़ा की यह पहली फ़िल्म बॉलीवुड के इतिहास की सबसे सफल और बड़ी फिल्मों में से एक मानी जाती है.

यह फ़िल्म मुंबई के मराठा मंदिर में लगातार 12 वर्षों तक चली. इसने शोले के अनूठे रिकॉर्ड को तोड़ा था. इसके लिए उन्हें एक बार फिर फ़िल्मफ़ेयर सर्वश्रेष्ठ अभिनेता पुरस्कार हासिल हुआ.

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दर्जनों हिट फिल्में दीं

दिल तो पागल है, देवदास (02), ओम शांति ओम (07), रब ने बना दी जोड़ी (08) और कभी खुशी कभी ग़म (01), कल हो ना हो (03), वीर ज़ारा (06), कभी खुशी कभी गम और मुहब्बतें ऐसी सुपरहिट फिल्में थीं. इनमें रोमांटिक हीरो की भूमिका में शाहरुख ने लोगों के दिलों में अपनी जगह बना ली. खासकर लड़कियां उनपर उसी तरह जान छिड़कने लगीं जैसा किसी जमाने में देव आनंद और राजेश खन्ना पर छिड़कती थीं .

कुछ कुछ होता है में चौथा फिल्मफेयर

वर्ष 1998 में करण जौहर की बतौर निर्देशक पहली फ़िल्म कुछ कुछ होता है उस साल की सबसे बड़ी हिट घोषित हुई. शाहरूख को चौथी बार फ़िल्मफ़ेयर सर्वश्रेष्ठ अभिनेता पुरस्कार हासिल हुआ. इसी साल उन्हें मणि रत्नम की फ़िल्म दिल से में अपने अभिनय के लिए फ़िल्म समीक्षकों से काफ़ी तारीफ़ बटोरी और यह फ़िल्म भारत के बाहर भी काफ़ी सफल रही.

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मोहब्बतें में अमिताभ के आमने-सामने

2000 में आदित्य चोपड़ा की मोहब्बतें में उनके किरदार को समीक्षकों से बहुत प्रशंसा मिली और इस फ़िल्म के लिए उन्हें अपना दूसरा फ़िल्मफ़ेयर समीक्षक सर्वश्रेष्ठ अभिनेता पुरस्कार मिला| उस ही साल आई उनकी फ़िल्म जोश भी हिट हुई.

यस बोस का सिम्पल हीरो

शाहरुख खान की फिल्म कभी हा कभी ना में वे ऐसे शर्मिले प्रेमी की भूमिका में नजर आते हैं जो अपनी प्रेमिका को यह कहने या जताने का साहस तक नहीं कर पाता है कि वह उससे प्यार करता है. कुछ इसी तरह की कहानी जूही चावला के.साथ की फिल्म यस बॉस की भी थी. इन दोनों ही फिल्मों में शाहरुख जमे हैं. इन दोनों फिल्मों के गीत भी काफी अच्छे हैं खासकर यस बॉस का गीत मैं कोई ऐसा गीत गाऊं.

ग्यारह फ़िल्मों ने विश्वभर में 100 करोड़ का व्यवसाय किया है. ख़ान की कुछ फ़िल्में जैसे दिलवाले दुल्हनिया ले जायेंगे (95).

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जीवन का सफर

ख़ान के माता पिता पठान मूल के थे. उनके पिता ताज मोहम्मद ख़ान एक स्वतंत्रता सेनानी थे. इनकी मां लतीफ़ा फ़ातिमा मेजर जनरल शाहनवाज़ ख़ान की पुत्री थी. शाहरुख के पिता हिंदुस्तान के विभाजन से पहले पेशावर के किस्सा कहानी बाज़ार से दिल्ली आए थे. दिलीप कुमार और पृथ्वी राज कपूर भी यहीं के रहनेवाले थे.
दिल्ली के हंसराज कॉलेज और जामिया मिलिया इस्लामिया में पढ़े

शाहरुख ने स्कूली पढ़ाई दिल्ली के सेंट कोलम्बा स्कूल से की .इसके बाद हंसराज कॉलेज से अर्थशास्त्र में ग्रेजुएशन किया. इसके बाद जामिया मिलिया इस्लामिया विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन की मास्टर्स डिग्री हासिल की. अपने माता पिता के देहांत के बाद वे दिल्ली से मुम्बई आ गए. शाहरूख ने गौरी के साथ प्रेम विवाह किया था. इनकी तीन संतान हैं – बेटी सुहाना और बेटों में आर्यन व अब्राहम.

अपनी फिल्म कंपनी बनाई

वर्ष 2000 में ख़ान ने जूही चावला और अज़ीज़ मिर्ज़ा के साथ मिल कर अपनी ख़ुद की फ़िल्म निर्माण कम्पनी, ‘ड्रीम्ज़ अन्लिमिटिड’ बनायी थी. इस कम्पनी की पहली फ़िल्म फिर भी दिल है हिन्दुस्तानी थी. इसमें शाहरूख और जूही दोनों ने अभिनय किया लेकिन ये बॉक्स ऑफिस पर जादू बिखेरने में असमर्थ रही.

सन 2001 में शाहरूख ने करण जौहर के साथ अपनी दूसरी फ़िल्म कभी खुशी कभी ग़म की, जो एक पारिवारिक कहानी थी. इसमें अमिताभ, हेमा सहित अन्य भी कई सितारे थे. यह फ़िल्म उस वर्ष की सबसे बड़ी हिट फिल्मों की सूची में शामिल थी. उन्हें अपनी फ़िल्म अशोका, जो की ऐतिहासिक सम्राट अशोक के जीवन पर आधारित थी. इसे प्रशंसा मिली लेकिन यह फ़िल्म भी नाकामयाब रही.

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देवदास का जलवा

सन् 2002 में ख़ान ने संजय लीला भंसाली की दुखांत प्रेम कथा देवदास में मुख्य भूमिका अदा की जिसके लिए उन्हें एक बार फिर फ़िल्मफ़ेयर सर्वश्रेष्ठ अभिनेता पुरस्कार दिया गया. यह शरतचंद्र चट्टोपाध्याय के उपन्यास देवदास पर आधारित तीसरी हिन्दी फ़िल्म थी.

अगले साल ख़ान की दो फ़िल्में रिलीज़ हुईं, चलते चलते और कल हो ना हो. चलते चलते एक औसत हिट साबित हुई. लेकिन कल हो ना हो, जो की करण जौहर की तीसरी फ़िल्म थी, राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय दोनों ही बाज़ारों में काफ़ी कामयाब रही. इस फ़िल्म में ख़ान ने एक दिल के मरीज़ का किरदार निभाया जो मरने से पहले अपने चारों ओर खुशियाँ फैलाना चाहता है और इस अदाकारी के लिये उन्हें सराहा भी गया.

कल हो ना हो, वीर जारा

2004 ख़ान के लिये एक और महत्वपूर्ण वर्ष रहा. इस साल की उनकी पहली फ़िल्म थी फ़राह ख़ान निर्देशित मैं हूँ ना, जो ख़ान द्वारा सह-निर्मित भी थी. यह फ़िल्म बॉक्स ऑफिस पर बड़ी हिट सिद्ध हुई.

इनकी अगली फ़िल्म थी यश चोपड़ा कृत वीर-ज़ारा भी हिट हुई थी. इसे भी कई अवार्ड और बहुत प्रशंसा मिली. उनकी आशुतोष गोवारिकर निर्देशित स्वदेश हालांकि दर्शकों को सिनेमा-घरों में लाने में तो सफल ना हो सकी लेकिन उसमें ख़ान के भारत लौटे एक अप्रवासी भारतीय की भूमिका को सराहा गया और ख़ान ने अपना छठवाँ फ़िल्मफ़ेयर सर्वश्रेष्ठ अभिनेता पुरस्कार जीता.

सन 2005 में उनकी एकमात्र फ़िल्म पहेली (जो की अमोल पालेकर द्वारा निर्देशित थी) बॉक्स ऑफिस पर असफल रही थी . 2006 में ख़ान एक बार फिर करण जौहर की फ़िल्म कभी अलविदा ना कहना में नजर आए जो एक अतिनाटकीय फ़िल्म थी. इस फ़िल्म ने भारत में तो सफलता प्राप्त की ही, साथ ही साथ यह विदेश में सबसे सफल हिन्दी फ़िल्म भी बन गई. उसी वर्ष ख़ान ने अमिताभ बच्चन की सुपरहिट फिल्मी डॉन की रीमेक डॉन में भी अभिनय किया जो हिट हुई.

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चक दे इंडिया

2007में ख़ान की दो फिल्में आई है – चक दे! इंडिया और ‘ओम शांति ओम। चक दे! इंडिया में ख़ान भारतीय महिला हॉकी टीम के कोच के किरदार में नज़र आते हैं जिनका लक्ष्य है भारत को विश्व कप दिलवाना. इस किरदार की लिये ख़ान को समीक्षकों से तो खासी प्रशंसा मिली ही है साथ ही साथ यह फ़िल्म सुपरहिट हुई .

ओम शांति ओम फराह ख़ान की शाहरुख़ ख़ान के साथ दूसरी फ़िल्म थी. इसमें ख़ान ने दोहरी भूमिका निभाई. पहला किरदार ओम एक जूनियर कलाकार है और एक हादसे में मारा जाता है और दूसरा एक नामी अभिनेता ओम कपूर है. ये सफल फ़िल्म थी.

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सबसे अमीर अभिनेता

वेल्थ रिसर्च फर्म वैल्थ एक्स के मुताबिक किंग ख़ान पहले सबसे अमीर भारतीय अभिनेता बन गए हैं. फर्म ने अभिनेता की कुल संपत्ति 3660 करोड़ रूपए आंकी थी लेकिन अब 4000 करोड़ बताई जाती है. शाहरुख आईपीएल की टीम कोलकाता नाइट राइडर्स के मालिक भी हैं.

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