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#Shaheen_Bagh : प्रदर्शनकारियों के एक गुट ने रास्ता खोला, कुछ ही देर बाद दूसरे गुट ने बंद किया…असमंजस बरकरार

डीसीपी साउथ ईस्ट के अनुसार प्रदर्शनकारियों के एक गुट ने रोड नंबर 9 को खोल दिया था, लेकिन कुछ ही देर बाद दूसरे गुट ने दोबारा रोड को बंद कर दिया.

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NewDelhi : दिल्ली के शाहीन बाग में शनिवार शाम को करीब दो महीने बाद नोएडा-फरीदाबाद को जोड़ने वाली सड़क खुल गयी, लेकिन कुछ देर बाद ही यह दोबारा बंद कर दी गयी. नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे प्रदर्शनकारियों का एक गुट रोड नंबर 9 से हट गया, जिसके बाद यहां से आवाजाही शुरू हो गयी. लेकिन कुछ ही देर बाद प्रदर्शनकारियों के दूसरे गुट ने आकर सड़क दोबारा बंद कर दी. डीसीपी साउथ ईस्ट के अनुसार प्रदर्शनकारियों के एक गुट ने रोड नंबर 9 को खोल दिया था, लेकिन कुछ ही देर बाद दूसरे गुट ने दोबारा रोड को बंद कर दिया.

 

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जश्न मनाने लगे लोग, लेकिन…

शनिवार शाम नोएडा-कालिंदी कुंज रोड खुलते ही वहां जश्न का माहौल बन गया.  लोग पटाखे फोड़कर रोड खुलने का जश्न मनाने लगे.  हालांकि उनका यह जश्न कुछ देर बाद ही गम में तब्दील हो गया.  दूसरे गुट ने आकर रोड को फिर  से बंद कर दिया.  इससे पहले लगातार चौथे दिन शनिवार सुबह वार्ताकार रामचंद्रन यहां पहुंचीं और उन्होंने प्रदर्शनकारियों को रास्ता खोलने के लिए समझाया.  प्रदर्शनकारियों ने वार्ताकार के समक्ष सात मांगे रखते हुए कहा कि जब तक  CAA  वापस नहीं लिया जाता, तब तक सड़क खाली नहीं की जायेगी.  सुबह 10.30 बजे यहां पहुंची साधना रामचंद्रन ने कहा, यदि मार्ग नहीं खुला तो हम आपकी मदद नहीं कर पायेंगे.  हम प्रदर्शन खत्म करने को नहीं कह रहे हैं.

उन्होंने कहा,मैं यहां सरकार की ओर से नहीं आयी हूं.  हम सुप्रीम कोर्ट से कहेंगे की आपको सुरक्षा दी जाये. आपको एक पार्क दे दिया जायेगा, जहां पर आप प्रदर्शन को जारी रख सकते हैं.

हालांक सभी प्रदर्शनकारियों ने एक स्वर में खंडन कर दिया और उनके समक्ष सात मांगे रखीं.  प्रदर्शनकारियों ने कहा, ‘हमारी मांग है कि यदि आधी सड़क खुलती है तो सुरक्षा और एल्युमिनियम शीट चाहिए.  साथ ही शाहीनबाग के लोगों और जामिया के विद्यार्थियों पर दर्ज  मुकदमे वापस लिये जाने चाहिए.

प्रदर्शनकारियों ने कहा, NPR लागू नहीं करें

प्रदर्शनकारियों ने कहा, ‘राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (NPR) लागू नहीं किया जाये. केंद्रीय मंत्रियों के विवादित बयानों पर कार्रवाई होनी चाहिए.  आंदोलन में मारे गये लोगों के परिजनों को मुआवजा राशि दी जानी चाहिए.  प्रदर्शन के दौरान घायल हुए लोगों के इलाज का खर्च सरकार वहन करे.  हमें दिल्ली पुलिस पर भरोसा नहीं है, सुप्रीम कोर्ट हमारी सुरक्षा को लेकर आश्वासन दे.

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