JharkhandKhuntiMain Slider

शहीद ग्राम आवास योजना : दो साल दो माह पूर्व अमित शाह ने किया था भूमि पूजन, एक ईंट भी नहीं जुड़ी

Pravin kumar

Ranchi : 17 सितंबर 2017 को रांची से लेकर खूंटी के उलिहातू तक भगवा लहरा रहा था. बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह अपने पूरे लाव-लश्कर के साथ धरती आबा भगवान बिरसा मुंडा के गांव उलिहातू पहुंचे थे.

वहां उन्होंने भगवान बिरसा मुंडा के परपोते सुखराम मुंडा के आंगन में शहीद ग्राम विकास अंतर्गत आवास योजना का भूमि पूजन किया था.

Sanjeevani

15 नवम्बर को 2019 को इसके दो साल दो माह हो गये, लेकिन अब तक एक ईंट भी नहीं जोड़ी जा सकी है. रोजगार की तलाश में उलिहातू के कई युवा पलायन कर चुके हैं.

क्या थी शहीदों के गांवों की आवास योजना

कल्याण विभाग की योजना है कि राज्य के शहीदों के गांवों में आवास बनाकर दिया जाये.

योजना के मुताबिक, कल्याण विभाग की तरफ से झारखंड में आठ शहीदों के गांव के लिए शहीदों के नाम पर आवास योजना की शुरुआत की गयी, जिसमें सबसे पहला नाम उलिहातू का है. योजना की शुरुआत बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने उलिहातू से की थी.

दरअसल योजना के मुताबिक 8 बाय 9 फीट के दो कमरे, 6 बाय 6.6 फीट का एक किचन, 7 बाय 6.6 फीट का एक बरामदा, 4 बाय 4 का बाथरूम और 4 बाय 3 फीट का ट्वॉयलेट वाला एक मॉडल मकान बनाकर दिया जाना था.

कल्याण विभाग की तरफ से इस योजना के तहत उलिहातू में 136 आवास बनने थे. इन आवासों को गांववालों के बीच बांटना था. जो पूरा नहीं हो सका.

इसे भी पढ़ें : #Jamshedpur: जमशेदपुर में एसीबी ने सिंचाई विभाग के मुख्य अभियंता के घर की छापेमारी, 2.44 करोड़ रुपये बरामद, जमीन और फ्लैट के दस्तावेज भी मिले

अब मीडिया से बात करने से डरते हैं गांव के लोग

उलिहातू के युवा नेलशन मुंडा कहते हैं- शहीदों को आवास देने की घोषणा रघुवर दास ने की थी, लेकिन गांव में आज तक शहीद आवास की एक ईंट नहीं जोड़ी जा सकी है. गांव की समस्याओं को पत्रकारो को बताने पर जिला प्रशासन के लोग ग्रामीणों को डांटते भी है. इस कारण सरकार की घोषणा के बारे में ग्रामीण कैमरा के सामने कुछ भी कहने से बचते हैं.

उलिहातू भगवान बिरसा के जन्मस्थल के रूप में जाना जाता है. राज्य बनने के पूर्व से ही गांव के विकास करने के दावे सरकारें करती रही हैं. लेकिन कई सरकारें आयीं और गयीं पर यहां विकास के दावे खोखले ही सबित हुए.

उलिहातू राजस्व गांव चार टोले में बंटा है, जिसमें पीड़ीटोला, इंचाडीह, बोकोलडीह और गामाडीह टोले हैं. गांव के चारों टोले में लगभग 200 मुण्डा परिवार के पूर्ती गोत्र के लोग रहते हैं.

महीने में एक या दो बार आते हैं डॉक्टर

गांव के बुजुर्ग गोलगा मुंडा काफी प्रयास के बाद गांव के बारे में बताते हुए कहते हैं- गांव का विकास हो इसके लिए मैंने अपनी जमीन स्वास्थ्य उपकेन्द्र बनने के लिए दी है. इस स्वास्थ्य उपकेन्द्र में महीने में कभी-कभी डॉक्टर आते हैं. अगर महीने में कभी एक से दो बार आ गये, तो गांव वालों की तो जैसे लॉटरी ही लग जाती है. इस स्वास्थ्य उपकेन्द्र में तीन पारा मेडीकल स्टाफ की प्रतिनियुक्ति की गयी है लेकिन वह भी सप्ताह में एक या दो दिन ही आते हैं.

इसे भी पढ़ें : #JharkhandElection के ठीक पहले निकाली गयी पांच विभिन्न पदों पर वैकेंसी, इनमें दो पर बैकलॉग का भारी बोझ

 एक भी महिला का प्रसव उपकेंद्र में नहीं हुआ

स्वास्थ्य उपकेन्द्र उलिहातू में महिलाओं को प्रसव की सुविधा मिले इस बात का भी ख्याल रखा गया था. इसलिए दो नर्सों की पदस्थापना भी की गयी थी. ग्रामीण बताते हैं आज तक इस उपस्वास्थ केंद्र के प्रसव वार्ड में गांव की किसी भी महिला का प्रसव नहीं हुआ. झोलाछाप डॉक्टरों के भरोसे गांव की स्वास्थ्य व्यवस्था टिकी हुई है.

परंपरागत पेयजल स्रोतों से ही अपनी जरूरतों को पूरा करते हैं लोग

गांव के इचाडीह और बोकोलडीह टोटो में पानी की टंकी लगी हुई है.दो सोलर टकी लगा था वह 6 माह से खराब है. कई बार जिला प्रशासन को सूचना देने की बात ग्रामीण कहते हैंच

गांव के दो टोले पीड़ी टोली और गाताडीह के लोग आज भी परंपरागत पेयजल के स्रोत से ही अपनी पेयजल की जरूरतों को पूरा करते हैं. हैंडपंप लगा जरूर है लेकिन वह खराब हो जाता है और गर्मियों में तो सूख ही जाता है. ग्रामीण बताते हैं कि गर्मी में पानी दूर से लाते हैं.

वन उपज पर निर्भर ग्रामीण आजीविका

गांव के लोगों की आजीविका खेती और वनोपज पर निर्भर है. साथ ही पशुपालन करके भी यहां के लोग अपनी जरूरतों को पूरा करते हैं. सिंचाई का साधन नहीं होने के कारण एक फसली खेती होती है.

गांव में रोजगार की कोई और व्यवस्था नहीं है. अमित शाह के दौरे से पूर्व से ही यहां बकरी पालन के लिए शेड का निर्माण कराया जा रहा है जो अभी तक पूरा नहीं हुआ है.

इसे भी पढ़ें : गोमियाः बीजेपी उम्मीदवार के मैदान में उतरने से बिगड़ेगा समीकरण, फिलहाल बबीता, लंबोदर और माधव हैं मैदान में

Related Articles

Back to top button