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शहीद रणधीर वर्मा और “अशोक-चक्र”

03 जनवरी, रणधीर वर्मा के शहादत दिवस पर विशेष

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KISHOR KUMAR

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गजब संयोग है कि शांतिकाल में वीरता के लिए दिया जाने वाला सर्वोच्च पुरस्कार “अशोक-चक्र” की स्थापना 4 जनवरी 1952 को हुई और इसके एक महीना पूरा होते-होते 3 फरवरी 1952 को शहीद रणधीर वर्मा का जन्म हुआ. ऐसा लगता है मानो उनके जन्म से पहले ही इतिहास लिख दिया गया था. सन् 1991 में भारत सरकार ने एक इतिहास रचा. भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) के 1974 बैच के अधिकारी रणधीर वर्मा की शहादत के तुरंत बाद पहली बार राज्य पुलिस को भी यह पदक देने का नियम बना. इस तरह शहीद वर्मा को मरणोपरांत यह सर्वोच्च पदक दिया गया था. इसके बाद से अब तक देश के नौ अन्य पुलिसकर्मियों को यह पदक मिल चुका है.

पंजाब के भगोड़े आतंकवादियों ने जब धनबाद के हीरापुर शाखा को लूटने के लिए दस्तक दी थी तब शहीद रणधीर वर्मा वरीय आरक्षी अधीक्षक थे. सहायक आरक्षी महानिरीक्षक के पद पर उनकी प्रोन्नति कोई एक साल से लंबित थी. चर्चा के मुताबिक अविभाजित बिहार के तत्कालीन मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव, जो रणधीर वर्मा के सहपाठी रहे थे, इस बात से नाराज हो गए थे कि लालकृष्ण आडवाणी की राम रथयात्रा को रोकने के लिए उन्हें धनबाद में गिरफ्तार नहीं किया गया था. शहीद वर्मा की पदोन्नति में देरी को इसी घटना से जोड़कर देखा जाता रहा है. खैर, रणधीर वर्मा ने अपनी कर्तव्यनिष्ठा का परिचय देते हुए आतंकवादियों से मुठभेड़ की, जिसमें एक आतंकवादी को मौत के घाट उतारने के बाद खुद वीरगति को प्राप्त हुए थे. उनकी असाधारण वीरता के लिए मरणोपरांत “अशोक- चक्र” से सम्मानित किया गया था. भारत सरकार ने उनके सम्मान में सन् 2004 में स्मारक डाक टिकट भी जारी किया था.

सन् 1952 में “अशोक-चक्र” की स्थापना के बाद उसी साल एक साथ तीन सैनिकों को वीरता के इस सर्वोच्च पदक से सम्मानित किया गया था. वे थे – भारतय  थलसेना के हवलदार वचित्तर सिंह व लांसनायक नरबहादुर थापा और  फ्लाइट लेफ्टिनेंट सुहास बिस्वास. अब तक 88 वीरों को अशोक-चक्र से सम्मानित किया जा चुका है. इनमें सर्वाधिक आर्मी के 50 वीर शामिल हैं. वायु सेना के तीन वीरों को अशोक-चक्र से सम्मानित किया जा चुका है. एक पदक पारा मिलिट्री के जवान को और 24 पदक असैनिक व्यक्तियों को दिया जा चुका है. पहली बार किसी महिला को 1987 में अशोक-चक्र से सम्मानित किया गया था. वह थीं नीरजा भनोट. पैन ऍम एयरलाइन्स की विमान परिचारिका थीं. 5 सितंबर 1986 को मुम्बई से न्यूयॉर्क जा रहे पैन एम फ्लाइट 73 के अपहृत विमान में यात्रियों की सहायता एवं सुरक्षा करते हुए वे आतंकवादियों की गोलियों का शिकार हो गईं थीं. उनकी बहादुरी के लिए मरणोपरांत अशोक चक्र से सम्मानित किया था. खास बात यह कि भारत सरकार ने सन् 2004 में रणधीर वर्मा और नीरजा भनोट का एक साथ डाक टिकट जारी किया था.

मौजूदा समय में “अशोक-चक्र” सम्मान पाने वालों का भत्ता 12,000 रूपए हैं. उधर, रेलवे ने “अशोक-चक्र” से सम्मानित वीरों को मिलने वाला फायदा परमवीर-चक्र एवं महावीर-चक्र पाने वालों के बराबर कर दिया है. अब “अशोक-चक्र” से सम्मानित किसी भी ट्रेन की एग्जिक्यूटिव श्रेणी के डिब्बे में मुफ्त यात्रा कर सकते हैं. मरणोपरांत वीरता पुरस्कार पाने वाले शहीदों की विधवाएं अपने एक सहयोगी के साथ आजीवन मेट्रो रेलवे, कोलकाता को छोड़कर समूचे रेल नेटवर्क में प्रथम श्रेणी, वातानुकूलित श्रेणी/द्वितीय श्रेणी, वातानुकूलित श्रेणी में यात्रा के योग्य हैं.

देश के आजाद होने के बाद भारत सरोकार ने 26 जनवरी, 1950 को प्रथम तीन वीरता पुरस्कार परमवीर चक्र, महावीर चक्र और वीर चक्र प्रारंभ किया था. इसे 15 अगस्त, 1947 से प्रभावी माना गया था. सन् 1952 में 4 फरवरी को अन्य तीन वीरता पुरस्कार अशोक-चक्र श्रेणी – I, अशोक-चक्र श्रेणी-II और अशोक-चक्र श्रेणी-III  शुरू किया गया था. इन्हे भी 15 अगस्त, 1947 से ही प्रभावी माना गया था. जनवरी 1967 में इन पुरस्कारों का नाम बदल कर क्रमशः अशोक चक्र, कीर्ति चक्र और शौर्य चक्र कर दिया गया था.

इन सभी वीरता पुरस्कारों की घोषणा साल में दो बार की जाती है – गणतंत्र दिवस के अवसर पर और फिर स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर. इन पुरस्कारों का वरीयता क्रम इस प्रकार है – परमवीर चक्र, अशोक चक्र, महावीर चक्र, कीर्ति चक्र, वीर चक्र और शौर्य चक्र है. युद्ध काल में “परमवीर-चक्र” का जो महत्व है, वहीं महत्व शांति काल में “अशोक-चक्र” का है. बदले हुए नियमों के मुताबिक “अशोक-चक्र” पदक सैनिकों के अलावा राज्य पुलिस और आम नागरिकों को भी दिया जाता है. रक्षा मंत्रालय वर्ष में दो बार सशस्त्र सेनाओं और केंद्रीय गृह मंत्रालय से वीरता पुरस्कारों के लिए सिफारिशें आमंत्रित करता है. सिफारिशें सामान्यतः गणतंत्र दिवस के अवसर पर घोषित किए जाने वाले पुरस्कारों के लिए अगस्त माह में और स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर घोषित किए जाने वाले पुरस्कारों के लिए मार्च माह में आमंत्रित की जाती हैं.

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