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शहादत समारोह : मशहूर सूफी गायक मुख्तियार अली के गायन ने छोड़ी छाप

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Dilip Kumar

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Palamu : शहीद-ए-आजम भगत सिंह, राजगुरु, सुखदेव की याद में आयोजित दो दिवसीय शहादत समारोह का समापन देश के मशहूर सूफी गायक मुख्तियार अली के गायन से हुआ. मुख्तियार अली ने अपने गायन की शुरुआत ‘हरि ओम हरि मौला’ के नाद से की. इसके बाद कबीर व बुल्ले शाह के कलाम को लगातार प्रस्तुत करते रहे.

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इन गानों पर खूब झुमे श्रोता 

मुख्तियार अली ने झीनी झीनी बीनी चदरिया…., नित खैर मंगा…., झूले झूले लाल मस्त कलंदर…., ओ लाल मेरी पत रखियो बला…, ओ मेरा पिया घर आया ओ लाल नी….. जैसे कई गीतों की प्रस्तुति दी. उन्होंने अपने गीतों के माध्यम से आपसी प्रेम,  भाईचारा व एकता का संदेश देते हुए दर्शकों को खूब झुमाया.

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मुख्तियार अली के गायन से मिट गया गायक-दर्शकों का भेद 

मुख्तियार अली की गायकी में मंच पर बतौर कोरस वकार यूनुस साथ दे रहे थे और तबले पर उस्ताद गुलाम हुसैन, ढोलक पर राकेश कुमार, कीबोर्ड पर फखरुद्दीन व पैड पर विपिन कुमार उनके साथ संगत कर रहे थे. कार्यक्रम के दौरान श्री अली ने अपनी गायकी से दर्शकों को सूफी मत से परिचय कराते हुए भावविभोर कर दिया. वहीं सजिंदे कलाकारों ने अपने वादन कला से जीवन की लयात्मकता के भाव रस का भरपूर रसास्वादन कराया. मुख्तयार साहब ने ऐसा शमा बांधा कि कलाकार और दर्शकों का भेद ही मिट गया.

शहीदों ले लो मेरा सलाम गीत से हुई कार्यक्रम की शुरुआत

समापन समारोह के कार्यक्रम की शुरुआत पलामू इप्टा व डाल्टनगंज क्वायर के कलाकारों ने शहीदों ले लो मेरा सलाम गीत से की. इस गीत के बाद क्वायर की कलाकार निधि पांडे ने भोजपुरी गीत के माध्यम से देश में बढ़े भ्रष्टाचार पर चिंता करते हुए लोगों के बीच सवाल रखा, देश कैसे बचेगा? इसके बाद भागलपुर इप्टा के ताल डांस ग्रुप के कलाकारों ने जट जटिन की नोकझोंक पर आधारित लोकगीत के साथ नृत्य प्रस्तुत किया.

कई तरह के नृत्य प्रस्तुत किये गये

बिहार की सांस्कृतिक व सांझी विरासत संबंधित झिझिया नृत्य, मल्हा नृत्य, गोदना नृत्य समेत अन्य नृत्य की प्रस्तुति की. प्रस्तुत नृत्यों को भागलपुर इप्टा की सचिव श्वेता भारती के निर्देशन में तैयार किया गया था. ग्रुप के कलाकारों में जूली, राहुल कुमार, प्राची कुमारी, खुशी कुमारी, गौरव, प्रवीण व मनीषा शामिल थे.

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मल्हा नृत्य के इतिहास पर चर्चा 

नृत्य कार्यक्रम का संचालन भागलपुर इप्टा के साहिल कर रहे थे. उन्होंने संचालन के दौरान नाविक समाज की चर्चा करते हुए कहा कि बिहार गंगा के तटवर्ती क्षेत्र में स्थित है. यहां बहुत पहले ट्रांसपोर्टिंग का साधन जलमार्ग था. इससे मल्लाह समुदाय के लोगों की आजीविका चलती थी. आज उनकी आजीविका खतरे में है. मल्लाह समुदाय के बीच उत्सव के दौरान जो नाच गान होते थे, उन्हें मल्हा नृत्य के नाम से जाना जाता है.

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कला के संरक्षण और खतरे पर चिंता व्यक्त

आज यह कला भी खतरे में है, जिसका संरक्षण जरूरी है. इसी प्रकार किसानों के संघर्ष की भी उन्होंने चर्चा की. शहादत समारोह के मौके पर दो दिनों तक चलने वाले सांस्कृतिक आयोजनों का संचालन रविशंकर ने किया. समारोह के अंत में शहादत समारोह समिति की पूरी टीम ने हम होंगे कामयाब गीत प्रस्तुत किया. समिति के अध्यक्ष डॉ अरुण शुक्ला ने अतिथि कलाकारों व स्थानीय कलाकारों के साथ के सुधी दर्शकों व पलामू के पत्रकारों को धन्यवाद प्रेषित किया.

कलाकारों को किया सम्मानित

कार्यक्रम के अंत में सवेरा नाटक कला विकास मंच के द्वारा अतिथि कलाकारों को सम्मानित किया गया. इस दौरान सवेरा नाट्य कला मंच के नाट्य निर्देशक अब्दुल हमीद व जावेद सहित टुकटुक घोष, रिंकी सिंह, आसना भंगरा, तनवीर ने अतिथि कलाकारों को शॉल प्रदान कर सम्मानित किया. इसके साथ समिति की ओर से कराटे के कलाकारों को प्रशस्ति पत्र प्रदान किया गया.

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कार्यक्रम को सफल बनान में इनका रहा भरपूर योगदान

कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए शहादत समारोह समिति के कार्यकर्ता पिछले एक महीने से सक्रिय थे. सक्रिय कार्यकर्ताओं में विनीत कुमार, रवि शंकर, राजीव रंजन, राजन सिन्हा, मुकेश कुमार, प्रभात अग्रवाल, अरविंद गुप्ता, शशि पांडे, अजीत कुमार, ललन कुमार समरेश सिंह दिनेश कुमार शर्मा, नुदरत नवाज अब्दुल हमीद, शीला श्रीवास्तव, वंदना श्रीवास्तव सहित दर्जनों युवा कार्यकर्ता सक्रिय थे. जिनका नेतृत्व कर रहे थे डॉक्टर अरुण शुक्ला, उपेंद्र कुमार मिश्रा, शैलेंद्र कुमार, पंकज श्रीवास्तव ,सुरेश सिंह, शैलेंद्र अग्रवाल, प्रेम प्रकाश भसीन समेत अन्य.

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