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शाह ब्रदर्स खनन घोटालाः AG,DMO,विभागीय मंत्री पर प्राथमिकी दर्ज करने की मांग को लेकर ACB पहुंची कांग्रेस

कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष डॉ अजय कुमार ने एसीबी एसपी को दिया आवेदन, शाह ब्रदर्स के पक्ष में हुआ फैसला, राज्य को 1365 करोड़ का नुकसान

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Ranchi: झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी की तरफ से शाह ब्रदर्स खनन घोटाले में महाधिवक्ता अजीत कुमार, जिला खनन पदाधिकारी चाईबासा और अन्य अधिकारियों की संलिप्तता को लेकर भ्रष्टाचार अधिनियम ब्यूरो के एसपी को आवेदन देकर प्राथमिकी दर्ज करने का आग्रह किया गया है. मंगलवार को एसीबी कार्यालय में शाह ब्रदर्स के 13 सौ करोड़ के खनन घोटाले में कांग्रेस ने महाधिवक्ता, विभागीय मंत्री (मुख्यमंत्री), जिला खनन पदाधिकारी और अन्य अधिकारियों की मिलीभगत से हुए राजस्व के नुकसान की निष्पक्ष जांच की मांग की है.

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क्या है कांग्रेस के आवेदन में

अपने आवेदन में कहा गया है कि झारखंड हाईकोर्ट में शाह ब्रदर्स के खनन पट्टे के नवीकरण और विखंडन से संबंधित रिट याचिका में महाधिवक्ता अजीत कुमार की सक्रिय सहभागिता की बातें सामने आयी हैं. डॉ कुमार ने कहा है कि पूरे प्रकरण में झारखंड सरकार की किरकिरी हुई है, इसकी जांच जरूरी है. हाईकोर्ट में सही तथ्य नहीं रखे जाने से शाह ब्रदर्स के पक्ष में फैसला आया है. इसमें शामिल सभी लोगों की साजिश को जनता तक लाने की आवश्यकता भी है.

अपर मुख्य सचिव उदय प्रताप सिंह ने मामले पर 29.4.2016 को पत्रांक 1107 के जरिये तत्कालीन अपर महाधिवक्ता श्री कुमार ने तथ्यों को तोड़-मरोड़ कर प्रस्तुत करते हुए शाह ब्रदर्स को लाभ पहुंचाने की कोशिश की थी. उन्होंने अपर महाधिवक्ता को पद से हटाने का आग्रह भी मुख्यमंत्री से किया था. पर उन्हें महाधिवक्ता बना दिया गया. अपर महाधिवक्ता की वजह से सरकार के खिलाफ हाईकोर्ट का आदेश आया था.

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शाह ब्रदर्स को पहुंचाया गया लाभ

उन्होंने अपने आवेदन में कहा है कि कंपनी को अनुचित लाभ पहुंचाने में सरकार के खान एवं भूतत्व विभाग के वरीय पदाधिकारी और मंत्री स्तर के व्यक्ति शामिल हैं. उन्होंने कहा है कि एक अप्रैल 2016 को फॉरेस्ट क्लीयरेंस नहीं रहने की वजह से खनन पट्टा रद्द कर दिया गया था, जिसे हाई कोर्ट में चुनौती दी गयी थी. हाईकोर्ट ने खनन पट्टे के विस्तार के स्पष्ट कारणों का हलफनामा दर्ज नहीं करने की वजह से सरकार के आदेश को निरस्त कर दिया था.

उन्होंने कहा है कि सारा कुछ विधि द्वारा स्थापित नन डिस्क्लोजर ऑफ रीजन, नैसर्गिक न्याय के प्रतिकूल है. सरकार द्वारा कारणों का उल्लेख नहीं कर किसी के निजी हित की रक्षा एक सुनियोजित साजिश के तहत की गयी. इतना ही नहीं, खान विभाग के अधिकारियों ने खनन कंपनी पर तैयार किये गये 1365 करोड़ की जुर्माना राशि को घटा कर 252 करोड़ कर दिया. इस पर भी शाह ब्रदर्स ने एलपीए दायर की.

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एलपीए संख्या 351-2018 के मामले में भी महाधिवक्ता ने झारखंड हाईकोर्ट को गलत सूचना दी और कहा कि राज्य सरकार और शाह ब्रदर्स के बीच इस मामले पर समझौता हो गया है. इस पर झारखंड हाईकोर्ट ने 1.10.2018 को आदेश दिया कि शाह ब्रदर्स 252 करोड़ के राजस्व का भुगतान किस्तों में कर सकती है. महाधिवक्ता के स्टेटमेंट से शाह ब्रदर्स के पक्ष में हाईकोर्ट का फैसला आया. और कंपनी को हाईकोर्ट के आदेश के बाद माइनिंग चालान निर्गत कर दिया गया.

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