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सीवरेज-ड्रेनेज परियोजना: सांसद की चिट्ठी के बाद RMC पर उठे सवाल

दो सालों में महज 20 प्रतिशत ही हो सका सिवरेज-ड्रेनेज का काम

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Ranchi: राज्यसभा सांसद महेश पोद्दार के सिवरेज-ड्रेनेज परियोजना पर उठाये सवाल के बाद अब रांची नगर निगम (RMC) की कार्यशैली पर सवाल उठने लगी है. कहा जा रहा है कि शहर में सिवरेज-ड्रेनेज का जो काम निगम ने शुरू किया था, वह पूरी तरह से खोखला साबित हो गया है. परियोजना को लेकर साल 2006 में एक डीपीआर बना था. लेकिन हकीकत यह है कि अब तक महज परियोजना का 20 प्रतिशत ही काम पूरा हुआ है. ऐसे में जहां शहर के लोग परियोजना की नीति से परेशान हैं, वहीं निगम के किसी अधिकारी से इसकी जानकारी ली जाये, तो वे यही पुरानी बात कहते हैं कि कार्य में बाधा आ रही है. अब जबकि भाजपा के ही कई जनप्रतिनिधियों ने परियोजना पर सवाल खड़ा किया है, तो इससे निगम की कार्यशैली पर सवाल उठना लाजमी है.

सांसद ने कहा, परियोजना का हाल कहीं रांची-टाटा हाईवे जैसा न हो जाये

सीवरेज-ड्रेनेज परियोजना पर नगर विकास मंत्री सीपी सिंह और राज्यसभा सांसद महेश पोद्दार ने खुलकर कर खिंचाई की है. पोद्दार ने केवल यह कहा है कि गड़बड़ी के कारण कई परियोजना का हाल रांची-टाटा रोड की तरह न हो जाये. बल्कि परियोजना में भारी गड़बड़ी और पर्याप्त मात्रा में भ्रष्टाचार की बू आ रही है. कुछ माह पहले ही उन्होंने कहा था कि लगभग 360 करोड़ रुपये की इस योजना की राशि से शुरू में 192 किलोमीटर सिवरेज-ड्रेनेज का निर्माण कार्य होना था, बाद में इसे 280 किलोमीटर कर दिया गया है. लेकिन, रोचक बात यह है कि पहले 360 करोड़ रुपये की इस योजना का वर्तमान में होने वाले खर्च से कोई संबंध नहीं है,  क्योंकि नगर विकास विभाग से लेकर नगर निगम को 280 किलोमीटर सिवरेज-ड्रेनेज पर कितने करोड़ रुपये खर्च होने हैं. इसकी जानकारी किसी अधिकारी को नहीं है.

कई क्षेत्रों में गड्ढे भरने का काम नहीं हुआ है पूरा

राजधानी में 2011 के अंत में शुरू सिवरेज-ड्रेनेज के तहत फेज एक के तहत वार्ड नंबर 1, 2, 3, 4, 5, 32, 35 वार्ड में काम होना था, लेकिन सभी वार्डो में गड्ढे खोदे गए हैं, लेकिन उन्हें भरने का काम अबतक अधर पर है. वही बरसात बीते डेढ़ माह से भी अधिक समय बीत गए है पर अब भी एदलहातु, मोरहाबादी, बड़गाई, रातुरोड आदि कई क्षेत्रों में गड्ढे भरने का काम अबतक नहीं हुआ है. जिसके कारण लोगों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है.

जमीन अधिग्रहण में फंसा है सिवरेज-ड्रेनेज का मामला

सीवरेज-ड्रेनेज परियोजना पर उठ रहे सवाल पर मुख्य अभियंता के तकनि‍की सलाहकार यूएन तिवारी ने बताया कि 2006 में डीपीआर बना था. 280 किलोमीटर में सीवरेज-ड्रेनेज का काम दो सालों में करना था, जिसमें से 113 किलोमीटर काम हो चुका है. मार्च 2019 तक काम पूरा करना का लक्ष्य है. पर जमीन अधिग्रहण के कारण काम काफी धीमी गति से चल रहा है. वहीं रफू-चक्कर के मामले में उन्होंने कुछ भी कहने से इंकार किया है.

दो सालों में महज 20 प्रतिशत ही हुआ काम 

तकनि‍की सलाहकार की जानकारी के बाद यह तय है कि अबतक सिवरेज-ड्रेनेज योजना के तहत करोड़ों रुपये खर्च किये जा चुके हैं. मैनहर्ट कंपनी द्वारा काम शुरू किया गया था. अब ज्योति बिल्डटेक इस काम को कर रही है. लेकिन अबतक महज 20 प्रतिशत ही काम पूरा किया जा सका है. योजना की शुरूआत सितंबर 2015 में शुरू की गयी थी और सितंबर 2017 में इस योजना को पूरा कर का लक्ष्य रखा गया था. पर कंपनी की सुस्त कार्यशैली के कारण कंपनी एक्टेंशन पर एक्टेंशन मांगी जा रही है. प्राप्त जानकारी के अनुसार कंपनी अगले तीन सालों में भी काम पूरा नहीं कर पायेगी.

सीपी सिंह ने कहा- बेहतर होगा नगर आयुक्त से करें बात

सिवरेज-ड्रेनेज के मामले में नगर विकास मंत्री सीपी सिंह ने कहा है कि बेहतर यही होगा कि आप नगर आयुक्त इस पर बात करें. परियोजना में हो रही गड़बड़ी पर समुचित कार्रवाई करने के लिए नगर आयुक्त और मुख्य सचिव को लिखे पत्र पर उन्होंने कहा कि जिस पद पर वह बैठे हैं उसके अनुरूप ही वे काम करते हैं. अगर कोई मेरे नाम से कोई परियोजना पर सवाल खड़ा करता है तो जरूरी नहीं कि वह सही हो. इसके लिए आवश्यक है कि आमने-सामने आकर परियोजना की नीति पर बात की जाये. मंत्री सीपी सिंह के जवाब पर जब परियोजना पर की गयी कार्रवाई के लिए नगर आयुक्त मनोज कुमार, उप नगर आयुक्त संजय कुमार समेत अन्य आला अधिकारियों से बातचीत की गयी, लेकिन उनसे संपर्क नहीं हो सका.

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