JharkhandRanchi

सीवरेज-ड्रेनेज परियोजना : ‘सजा’ पाकर भी नहीं सुधरी कंपनी, विभाग से पैसे तो ले रही, पर पूरा नहीं कर रही काम

विज्ञापन

Ranchi : झारखंड राज्य बने 18 साल बीतने को हैं. इसके बावजूद राजधानी रांची में सीवरेज-ड्रेनेज परियोजना की स्थिति पड़ोसी राज्य बिहार से भी काफी बदतर स्थिति में है. बिहार अर्बन इन्फ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट लिमिटेड जहां सीवरेज-ड्रेनेज परियोजना पर तेजी से काम कर रहा है, वहीं रांची नगर निगम ने जिस कंपनी को परियोजना का कार्य दिया था, उसकी स्थिति राज्यसभा सांसद महेश पोद्दार के लिखे पत्र से पता चलती है. सीवरेज-ड्रेनेज जोन-1 से जुड़ी कंपनियों की कार्यशैली पर परियोजना के डिजाइन और डीपीआर बनानेवाली सिंगापुर की मैनहर्ट कंपनी ने भी सवाल खड़ा किया था. अब जिस तरह से राज्यसभा सांसद महेश पोद्दार ने झारखंड के मुख्य सचिव को पत्र लिख रांची की सीवरेज-ड्रेनेज परियोजना पर सवाल खड़ा किया है, उससे यह परियोजना पुनः एक बार विवादों में घिरती जा रही है.

लापरवाही को देख निगम ने किया था डिबार

सांसद महेश पोद्दार के उठाये सवाल के पहले भी रांची नगर निगम ने गत वर्ष मई माह में एक कार्यालय आदेश जारी कर परियोजना से जुड़ी कुछ कंपनियों को डिबार किया था. निगम ने अपने आदेश में कहा था कि सीवरेज एंड ड्रेनेज परियोजना जोन-1 को लेकर इससे जुड़ी संवेदक कंपनियां ‘ज्योति बिल्डटेक प्राइवेट लिमिटेड’ एवं ‘विभोर वैभव इन्फ्रा प्राइवेट लिमिटेड’ ने काफी लापरवाही बरती है. परियोजना के डीपीआर बनानेवाली सिंगापुर की मैनहर्ट कंपनी के निर्देशों के बावजूद कंपनी ने कार्य में अपेक्षित प्रगति नहीं दिखायी थी. उस समय तक कार्य शुरू हुए एक वर्ष आठ माह का समय बीत चुका था. शेष कार्यावधि केवल चार माह ही शेष था. ऐसे में रांची नगर निगम ने संबंधित कंपनी को भविष्य में निगम के कार्यों से डिबार करने का निर्देश भी दिया था. फिर भी इस कंपनी की कार्यशैली में कोई सुधार नहीं आया है.

सीवरेज-ड्रेनेज परियोजना : ‘सजा’ पाकर भी नहीं सुधरी कंपनी, विभाग से पैसे तो ले रही, पर पूरा नहीं कर रही काम
पिछले साल ही काम में लापरवाही को लेकर निगम ने आदेश जारी कर कंपनी को किया था डिबार.

सीवरेज-ड्रेनेज परियोजना पर बिहार की स्थिति है बेहतर

सीवरेज-ड्रेनेज परियोजना को लेकर अगर झारखंड और बिहार की तुलना की जाये, तो पता चलता है कि बिहार में काफी तेज गति से काम चल रहा है. बिहार अर्बन इन्फ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट लिमिटेड के अंतर्गत L&T, EMS जैसी बड़ी कंपनियां वहां नयी तकनीक से काम कर रही हैं. वहीं, अगर रांची नगर निगम क्षेत्र के अंतर्गत जुडको के कार्यों का आकलन किया जाये, तो रांची नगर निगम ने ज्योति बिल्डटेक प्राइवेट लिमिटेड नामक जिस कंपनी को परियोजना का जिम्मा दिया है, वह न तो अपने कार्य के प्रति समर्पित दिख रही है, न ही वह सप्लायरों को नियमित पैसे ही दे रही है, जबकि वह विभाग से पैसे लेती ही जा रही है.

advt

परियोजना पर सांसद ने उठाया था सवाल

सीवरेज-ड्रेनेज परियोजना : ‘सजा’ पाकर भी नहीं सुधरी कंपनी, विभाग से पैसे तो ले रही, पर पूरा नहीं कर रही काम

मालूम हो कि दो दिनों पहले ही राज्यसभा सांसद महेश पोद्दार ने राज्य के मुख्य सचिव सुधीर त्रिपाठी को पत्र लिखकर रांची नगर निगम क्षेत्र में सीवरेज-ड्रेनेज परियोजना की कार्यशैली पर सवाल खड़ा किया था. उन्होंने कहा था कि रांची में सीवरेज-ड्रेनेज परियोजना का कार्य, जो वर्ष 2006 में शुरू हुआ था, उसके 12 साल बीतने के बाद भी स्थिति काफी खराब है. परियोजना की प्राक्कलित राशि तब 359 करोड़ रुपये थी, लेकिन वर्तमान स्थिति यह है कि परियोजना के क्रियान्वयन में लगी पूरी टीम में से संभवतः किसी को भी नहीं पता कि परियोजना के क्रियान्वयन में कुल कितनी राशि का व्यय किया जायेगा. वहीं, जब टेंडर जारी किया गया था, तब प्रस्तावित सीवरेज लाइन की कुल लंबाई 192 किलोमीटर थी, जो अब तक बढ़कर 280 किलोमीटर हो चुकी है.

महेश पोद्दार ने पत्र में यह भी लिखा था कि इस परियोजना के क्रियान्वयन में करीब आधा दर्जन एजेंसियां जुड़ी हैं, लेकिन स्थिति यह है कि कोई भी जिम्मेदारी लेने को तैयार नहीं. परियोजना के बेसिक काम अर्थात सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट का निर्माण अब तक हुआ ही नहीं है. इसके उलट बरसात के मौसम में सड़कें खोदकर छोड़ दी गयी हैं. वहीं, कई जगह सीवर के पाइप डालकर उन्हें केवल मिट्टी से ढंककर छोड़ दिया गया है.

Advertisement

Related Articles

Back to top button
Close