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ऊर्जा विभाग के जीएम एचआर पर लगे कई गंभीर आरोप, आरोप पत्र गठित- कार्मिक ने किया शो-कॉज

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Ranchi: जेबीवीएनएल के फाइनेंस कंट्रोलर उमेश कुमार पर विभागीय कार्रवाई होने के बाद ऊर्जा विभाग के जेयूबीएनएल के जीएम एचआर राजीव रंजन मुसीबत में हैं. उनरपर कई तरह के गंभीर आरोप लगे हैं. आरोप ऊर्जा विभाग के पूर्व सीएमडी नितिन मदन कुलकर्णी ने लगाए हैं.

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उनके खिलाफ पपत्र ‘क’ यानि आरोप पत्र भी गठित कर दिया गया है. पूर्व सीएमडी की तरफ से आरोप कार्मिक को भेजने के बाद राजीव रंजन को कार्मिक विभाग ने शो-कॉज किया है. खबर लिखे जाने तक जीएम एचआर ने कार्मिक को अपना जवाब नहीं दिया है. आरोप पत्र गठित करते वक्त जो आरोप उनपर लगे हैं वो काफी गंभीर हैं. एक-एक कर उनपर करीब नौ आरोप पूर्व सीएमडी ने लगाए हैं.

जाने क्या-क्या आरोप लगा है जीएम एचआर राजीव रंजन पर

– जेवीबीएनएल के फाइनेंस कंट्रोलर उमेश कुमार को 2008 में प्रमोशन दिया. इस पर एजी ने 30 जुलाई 2015 को सवाल खड़े किए. एजी ने कहा कि उमेश कुमार को गलत तरीके से प्रमोशन दिया गया है. तर्क यह था कि जिस पद पर उन्हें प्रमोशन दिया गया, वो पद विभाग में था ही नहीं. जीएम एचआर का यह दायित्व था कि तत्काल इस महत्वपूर्ण विषय पर आवश्यक कार्रवाई करते. लेकिन जीएम एचआर ने इस विषय पर कोई कार्रवाई नहीं की. इस मामले पर एजी ने एक समिति बनाकर जांच करने को कहा. समिति बनने में 1 साल और 4 महीने लग गए.

समिति ने 28 दिसंबर 2016 को अपनी रिपोर्ट सौंपी. एजी के आरोपों को सही पाया गया. बावजूद इसके जीएम एचआर ने कोई कार्रवाई नहीं की. जिस कारण उमेश कुमार पद पर लगातार बने रहे और वित्तीय लाभ लेते रहे. आखिर में सीएमडी के संज्ञान में बात आने के बाद 28 मई 2017 को विभागीय प्रमोशन की समिति की बैठक बुलाई गयी. 22 जून 2018 को आयोजित निदेशक मंडल की बैठक में उमेश कुमार को दिए गए गलत प्रमोशन को निरस्त करने का निर्णय लिया गया.

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– बनहरदी कोल ब्लॉक के मामले में झारखंड ऊर्जा उत्पादन निगम लिमिटेड ने निगरानी जांच की अनुशंसा की. उस प्रस्ताव को तत्कालीन सीएमडी 19 नवंबर 2016 को अनुमोदित भी किया. इसके बाद निगम के सचिवालय का दायित्व था कि वो कार्रवाई करे. लेकिन जीएम एचआर राजीव रंजन ने इस विषय पर कोई कार्रवाई नहीं की. आखिर में यह विषय जब मीडिया में आया तो सीएमडी ने 12 जुलाई 2018 को इस विषय पर जीएम एचआर को शो-कॉज किया. जीएम एचआर ने जवाब में यह सामने आया कि फाइल उन्हीं के पास थी. इससे यह स्पष्ट होता है कि सीएमडी के आदेश की संपूर्ण जानकारी जीएम एचआर को थी. जीएम एचआर ने इस फाइल को अपने पास ही रखा और इस विषय पर कोई कार्रवाई नहीं हो सकी. इससे जीएम एचआर की मिलीभगत और कर्तव्यों के निर्वहन से जानबूझकर बरती गई लापरवाही स्पष्ट होती है.

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– जेबीवीएनएल के खाता संख्या 1807/15 की जांच में यह बात सामने आयी कि आयकर एवं वाणिज्य कर के रूप में जेबीवीएनएल के लेखा शाखा ने करीब 15 करोड़ की राशि का गलत तरीके से भुगतान किया गया है. इससे निगम को वित्तीय क्षति हुई. एजी ने भी इस संबंध में टिप्पणी की. तत्कालीन सीएमडी ने एमडी जेबीवीएनएल और जीएम एचआर कोई निर्देश दिया कि पूरे प्रकरण की जांच करते हुए चार सदस्यीय समिति का गठन किया जाए. एक साल पांच महीने बाद भी इस संबंध में समिति गठित नहीं की गयी. जहां एक ओर निगम को 15 करोड़ की क्षति हुई. दूसरी तरफ उसके भरपाई के लिए किसी तरह का कोई कदम नहीं उठाया गया. संलिप्त पदाधिकारी भी अपने पदों पर बने रहे. पदाधिकारियों की रक्षा के लिए जीएम एचआर ने जानबूझकर इस संवेदनशील मामले पर कार्रवाई नहीं की, यह एक गंभीर लापरवाही का विषय है.

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– झारखंड ऊर्जा विकास निगम लिमिटेड ने एक आदेश पारित किया था. आदेश के मुताबिक एक ही जगह सालों से काम करते आ रहे कंप्यूटर ऑपरेटरों का तबादला किया जाना था. 17 नवंबर 2017 को छुट्टी पर रहने के बावजूद, बिना किसी सूचना और बिना किसी अनुमति के डिप्टी जीएम गोविंद यादव ने इस आदेश को स्थगित कर दिया. यह आदेश सीएमडी की तरफ से निकाला गया था. सीएमडी के अनुमोदित आदेश में परिवर्तन करने से पहले डिप्टी जीएम और जीएम एचआर ने इस विषय पर अध्यक्ष को अवगत कराने की कोई आवश्यकता नहीं समझी और अपने स्तर से ही अध्यक्ष के आदेश को स्थगित कर दिया. डिप्टी जीएम गोविंद यादव को शो-कॉज किया गया. गोविंद यादव के विरुद्ध विभागीय कार्रवाई के लिए 23 नवंबर 2017 को जीएम एचआर को निर्देश दिया गया. लेकिन जीएम एचआर ने सात महीने बाद भी आदेश का अपालन नहीं किया. जिससे यह स्पष्ट होता है कि जीएम एचआर लगातार दोषी पदाधिकारियों को संरक्षण देने का काम करते हैं.

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– झारखंड राज्य विद्युत बोर्ड ने कृष्णा लक्ष्मी स्टील उद्योग के खिलाफ झारखंड हाईकोर्ट में वाद दायर किया था. हाईकोर्ट ने तकनीकी खामियों की वजह से सुनवाई नहीं की. एक साल तक तकनीकी खामियों को दूर करने के लिए हाईकोर्ट ने समय दिया. लेकिन इस मामले में कोई कार्रवाई नहीं हुई. आखिर में 14 मार्च 2018 को हाईकोर्ट ने मामले को खारिज कर दिया. इस विषय पर जवाबदेही तय करते हुए दोषी पदाधिकारियों को दंडित करने के लिए जीएम एचआर को आदेश दिया गया. लेकिन जीएम एचआर ने इस संबंध में किसी तरह की कोई कार्रवाई नहीं की. निश्चित तौर पर एक साल तक तकनीकी खामियों को दूर नहीं किये जाना एक गंभीर मामला है. लेकिन इस मामले में आरोपियों पर किसी तरह की कोई कार्रवाई जीएम एचआर ने नहीं की.

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