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#GST मुआवजे को लेकर सात राज्य केंद्र सरकार के खिलाफ #SupremeCourt जाने को तैयार

इन राज्यों के वित्त मंत्री पिछले सप्ताह केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से मिल कर गुहार लगाई कि अगस्त के बाद का मुआवजा उन्हें तत्काल दिया जाये. इन राज्यों को हर माह औसतन 7,500 करोड़ रुपये का मुआवजा दिया जाता है.

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NewDelhi :  सात राज्य व केंद्र शासित प्रदेश केंद्र सरकार के खिलाफ GST के मुआवजे को लेकर सुप्रीम कोर्ट जाने की तैयारी कर रहे हैं. जानकारी के अनुसार इन राज्यों को पिछले तीन महीनों से वस्तु एवं सेवा कर (GST) का मुआवजा नहीं  मिला है.

इन राज्यों में  केरल, पश्चि‍म बंगाल, पंजाब, दिल्ली, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, राजस्थान और पुदुच्चेरी शामिल हैं.  केरल पहले ही सुप्रीम कोर्ट जाने की बात कह चुका है. इन राज्यों का कहना है कि  केंद्र सरकार अगर तत्काल बकाया राशि नहीं देती है, तो उनके पास कोर्ट जाने के अलावा कोई और रास्ता नहीं बचेगा.

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राज्यों को हर माह औसतन 7,500 करोड़ रुपये का मुआवजा दिया जाता है

इनका कहना है कि उनकी समस्याओं का समाधान नहीं किया गया तो वे सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटायेंगे. खबरों के अनुसार इन राज्यों के वित्त मंत्री पिछले सप्ताह केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से मिल कर गुहार लगाई कि अगस्त के बाद का मुआवजा उन्हें तत्काल दिया जाये. इन राज्यों को हर माह औसतन 7,500 करोड़ रुपये का मुआवजा दिया जाता है.

बिजनेस टुडे के अनुसार छत्तीसगढ़ के कॉमर्श‍ियल टैक्स मिनिस्टर टीएस सिंहदेव ने बताया कि ये राज्य पहले सभी विकल्पों पर काम कर रहे हैं, लेकिन अगर कोई रास्ता नहीं बचा तो सुप्रीम कोर्ट में जाना पड़ेगा. उन्होंने कहा, पहले हमने सुप्रीम कोर्ट जाने का मन बना लिया था, लेकिन अब हम सोच रहे हैं कि पहले विकल्प आजमा लेंगे, क्योंकि ऐसा हमें सुप्रीम कोर्ट ही करने को कह सकता है.

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दिल्ली हिंसा की जांच के लिए विशेष जांच टीम (एसआईटी) का गठन किया गया है.  दिल्ली पुलिस क्राइम ब्रांच के तहत दो एसआईटी का गठन किया गया है.

मुआवजा नहीं मिलने से राज्य वित्तीय रूप से भारी दबाव में हैं

एक अनुमान के अनुसार केंद्र को  सिर्फ अगस्त और सितंबर महीने के लिए ही राजस्थान का 4,400 करोड़ रुपए, पंजाब का 21,00 करोड़ रुपये, दिल्ली का 2,355 करोड़ रुपये, केरल का 1,600 करोड़ और पश्चिम बंगाल का 1,500 करोड़ रुपये का बकाया देना है.

पूर्व में पश्चिम बंगाल, पंजाब, केरल, राजस्थान और दिल्ली के वित्त मंत्री ने एक संयुक्त बयान जारी कर  कहा था कि मुआवजा नहीं मिलने से राज्य वित्तीय रूप से भारी दबाव में हैं और केंद्र सरकार ने इसकी कोई वजह भी नहीं बताई है.   जान लें कि दिल्ली में 17-18 दिसंबर को जीएसटी कौंसिल की बैठक होने वाली है जिसमें यह मसला गरमा सकता है.

जीएसटी काउंसिल ने  स्वीकार किया है कि मुआवजे की मांग बढ़ती जा रही है

जीएसटी काउंसिल  महीने अपनी बैठक में जीएसटी और मुआवजा सेस रेट की समीक्षा करने जा रही है. जीएसटी काउंसिल ने यह स्वीकार किया है कि मुआवजे की मांग बढ़ती जा रही है. काउंसिल ने राज्यों और केंद्र के अधि‍कारियों की एक कमिटी बनाई है जो इस बारे में केंद्र सरकार को उपाय सुझायेगी कि जीएसटी रेवेन्यू में किस तरह से बढ़त किया जा सके.

जिन वस्तुओं पर 28 फीसदी से कम जीएसटी लगता है, उन पर होने वाले राजस्व के नुकसान की भरपाई केंद्र सरकार राज्यों को करती है. यह मुआवजा वैसे तो पांच साल के लिए ही दिया जाना है यानी 2022 तक, लेकिन अब कई राज्य इसे आगे बढ़ाने की भी मांग कर रहे हैं. टीएस सिंहदेव का कहना है कि अगर जीएसटी का मुआवजा मिलना बंद हो गया, तो इससे मैन्युफैक्चरिंग पर आधारित छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों को काफी नुकसान होगा.

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