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प्रभार में चल रही जैप की दस में से सात और आइआरबी की पांच बटालियन

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Saurav Singh

Ranchi: झारखंड सरकार ने केंद्र से मिलनेवाली राशि से नयी-नयी बटालियन का गठन तो कर लिया है.

लेकिन उनमें कामकाज सुचारु रूप से हो इसकी व्यवस्था ही नहीं की है. बटालियन में कमांडेंट तक की पोस्टिंग नहीं की जाती है.

हालात यह है कि झारखंड में जैप की दस बटालियन में से सात और आइआरबी की पांच में से पांचों बटालियन प्रभार पर चल रही है. जैप और आइआरबी को मिलाकर कर कुल 15 बटालियन है.

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जिनमें से 12 बटालियन प्रभारी के भरोसे है. जैप और आइआरबी की 15 बटालियन में कमांडेंट के पद पर एएसपी रैंक के अफसर को प्रभारी कमांडेंट बनाया गया है.

किसको मिला है JAP, IRB बटालियन का अतिरिक्त प्रभार

स्पेशल ब्रांच में कार्यरत एसपी क्रांति कुमार गड्देसी को अपने काम के अतिरिक्त जैप-1का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है. धनबाद सिटी अजीत पीटर डुंगडुंग को (पदभार ग्रहण नहीं किये हैं) अपने काम के अतिरिक्त जैप -3 का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है.

बोकारो एसपी पी मुरूगन को अपने काम के अतिरिक्त जैप-4 का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है. देवघर एसपी नरेंद्र कुमार सिंह अपने काम के अतिरिक्त जैप-5 का अतिरिक्त प्रभार संभाल रहे हैं.

जमशेदपुर एसपी अनूप बिरथरे को अपने काम के अतिरिक्त जैप-6 का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है. हजारीबाग एसपी मयूर पटेल कन्हैयालाल को जैप-7 का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है.चाईबासा एसपी इंद्रजीत महथा को अपने काम के अतिरिक्त जैप-8 का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है.

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इसके अलावे जामताड़ा एसपी अंशुमन कुमार को अपने कार्य के अतिरिक्त आइआरबी-1 का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है.
जमशेदपुर ग्रामीण एसपी पियूष पांडेय को अपने कार्य के अतिरिक्त आइआरबी-2 का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है.

चतरा एसपी अखिलेश वी वारियर को आइआरबी-3 का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है. लातेहार एसपी प्रशांत आनंद को अपने कार्य के अतिरिक्त आइआरबी-4 का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है. गुमला एसपी अंजनी झा को आइआरबी-5 का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है.

राज्य भर के 115 पिकेटों पर तैनात हैं जवान

जैप और आइआरबी की कुल 15 बटालियन के जवानों को नक्सल प्रभावित इलाकों में बनाये गये. 115 से अधिक पिकेटों पर इन्हें तैनात किया गया है.

झारखंड आइआरबी का गठन नक्सलियों के खिलाफ अभियान चलाने के लिए किया गया है. इसकी पांच बटालियन के गठन के लिए पूरी राशि केंद्र सरकार ने दी है.

ताकि नक्सलियों से जारी लड़ाई में अर्द्धसैनिक बलों पर निर्भरता को कम किया जा सके. बटालियनों में कमांडेंट के नहीं होने से पिकेटों के निरीक्षण का काम बंद हो गया है.

जवानों की सुविधाओं का ध्यान रखनेवाला कोई नहीं

पिकेटों में निरीक्षण के जो आंकड़े बन रहे हैं, वह ज्यादातर कागजों पर बन रहे है. नियमानुसार कमांडेंट को साल में एक बार हर पिकेट का निरीक्षण करना है और वहीं पर रात भी बितानी है.

जिस तरह से एसपी रैंक के अधिकारियों को जैप और आइआरबी के कुल 8 बटालियन का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है. ऐसे में सवाल ये है कि वो मिले अतिरिक्त प्रभार पर कितना ध्यान दे पायेंगे. इससे साफ जाहिर होता है की जवानों सुविधाओं पर ध्यान देनेवाला कोई नहीं है.

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