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सात माह बाद मिला रेडी टू इट, 12 महीने से बकाया पोषाहार राशि, 8 महीने से बंद है सेविकाओं का मानदेय

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Bermo: पांच साल तक के बच्चों को स्कूल पूर्व शिक्षा देने के उद्देश्य से सरकार द्वारा आंगनबाड़ी केन्द्रों का गठन किया गया है. सरकार द्वारा आंगनबाड़ी केन्द्रों को प्ले स्कूल की तर्ज पर ही विकसित करने की योजना बनायी गयी है, लेकिन यह तभी कारगर है जब इस दिशा में समय से काम हो सके. बेरमो प्रखंड और बोकारो थर्मल के आंगनबाड़ी केंद्रों में ऐसा होता नहीं दिख रहा है.

फरवरी 2018 से बंद है बच्चों का पोषाहार राशि

बोकारो थर्मल के 21 आंगनबाड़ी केंद्रों में बच्चों का पोषाहार फरवरी 2018 से ही बंद है. जबकि केंद्र को चलाने वाली सभी सेविकाओं के द्वारा प्रत्येक माह समय पर बच्चों के पोषाहार का वाउचर समय पर जमा कर दिया जाता है. दबी जुबान में सेविकाओं द्वारा आरोप लगाया जा रहा है कि आंगनबाड़ी केंद्रों का कोई भी कार्य बिना चढ़ावा के नहीं होता है. बच्चों के पोषाहार सहित अन्य वाउचर जमा करने के एवज में सुपरवाइजर के द्वारा प्रति सेविका प्रति माह 300 रुपया का चढ़ावा देना पड़ता है. यही कारण है कि बच्चों के पोषाहार की राशि देने में विलंब होती है. आंगनबाड़ी सेविकाओं को बच्चों का पोषाहार बाजार के दूकानदारों से उधार खरीदकर खिलाना पड़ता है. भुगतान में विलब के कारण दूकानदारों द्वारा उधार सामग्री देने में भी अब आनाकानी की जाने लगी है.

सात माह से बंद है रेडी टू इट

बोकारो थर्मल के सभी 21 आंगनबाड़ी केंद्रों में बच्चों,गर्भवती और धातृ महिलाओं को दिया जाने वाला रेडी टू इट सात महीने से बाधित है. सात माह के बाद दिसंबर 2018 में सभी केंद्रों को दिसंबर माह का रेडी टू इट भुगतान किया गया है.

मानदेय मांगने पर कहा जाता है काम छोड़ने को

जून 2018 से बंद है सेविकाओं का मानदेय-स्थानीय ज्यादातर आंगनबाड़ी केंद्रों की सेविकाओं ने नाम नहीं छापने की शर्त पर जानकारी देते हुए बताया कि बच्चों के पोषाहार तथा रेडी टू इट कर ही तरह उनका मानदेय भी जून 2018 से ही बंद है. काम के बाद भी मानदेय का भुगतान नहीं होने पर काम करने की इच्छा नहीं रह गयी है. उनका कहना था कि जब भी बेरमो की बैठकों में मानदेय का मामला उठाया जाता है तो उन्हें कहा जाता है कि जो काम नहीं करना चाहती हैं, वे काम छोड़ दें. उनका कहना था कि जब भी बच्चों के पोषाहार एवं मानदेय की राशि तथा रेडी टू इट का मसला उठाया जाता है, तो कहा जाता है कि जिला एवं राज्य से राशि एवं सामग्री नहीं आयी है, आने पर भुगतान कर दिया जाएगा. इसके अलावा जब भी उनका मानदेय आता है तो उन्हें यह नहीं बताया जाता है कि उन्हें किस माह का मानदेय भुगतान किया गया है.

आक्रोश के अलावा बहुत कुछ झेलना पड़ता है सेविकाओं को-बच्चों का पोषाहार तथा रेडी टू इट आंगनबाड़ी केंद्रों में नहीं आने से आंगनबाड़ी सेविकाओं को बच्चों के अभिभावकों और पंचायतों के ग्रामीणों का आक्रोश के साथ-साथ बहुत कुछ झेलना पड़ता है. सेविकाओं का कहना है कि उनका प्रयास हमेशा रहता है कि केन्द्र का संचालन सही और नियमित हो. लेकिन पोषाहार सामग्री, रेडी टू ईट और डीलर के यहां से मिलने वाला चावल समय पर नहीं मिलने के कारण उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ता है.

केंद्रों में अंडे की नहीं होती नियमित सप्लाई

आंगनबाड़ी केंद्रों बच्चों को दिया जाने वाला अंडा सप्लायर के द्वारा नियमित रुप से सप्लाई नहीं की जाती है, जिसके कारण बच्चों को नियमित अंडा नहीं दी जाती है. कई बच्चों के अभिभावकों का आरोप है कि केन्द्रों से मिलने वाला अंडे सड़े होते हैं. उससे बदबू आती है. बच्चे उसे पसंद नहीं करते.

क्या मिलता है आंगनबाड़ी केन्द्रों से

आंगनबाड़ी केन्द्रों पर 0 से लेकर तीन वर्ष तक के बच्चों को नाश्ता और भोजन देने का प्रावधान है. 3 से 6 वर्ष वर्ष तक के बच्चों, गर्भवती और धातृ महिलाओं को रेडी टू इट दिया जाता है. खिचड़ी या भोजन का चावल पीडीएस दुकानदार देते हैं. जबकि अन्य सामान सेविका को खुद खरीदना पड़ता है. पीडीएस से मिलने वाला चावल भी तीन से चार महीने विलंब से मिलता है. जिसके कारण केन्द्रों को चलाने में कठिनाई का सामना करना पड़ता है.

बेरमो बीडीओ सह सीडीपीओ ने जांच की बात कही

इस पूरे मामले पर बेरमो के बीडीओ सह प्रभारी सीडीपीओ अखिलेश कुमार का कहना था कि बेरमो में मई महीने से वे सीडीपीओ के प्रभार में हैं. रेडी टू इट का आवंटन जिला से ही बंद था और इस मसले को वे जिला की बैठक में लगातर उठाते रहे हैं, जिसके कारण दिसंबर का आबंटन केंद्रों को मिला है. उन्होंने कहा कि बच्चों के बकाया पोषाहार का भुगतान फरवरी के अंत तक आ जाएगा. जबकि सेविकाओं के सितंबर माह से बकाया मानदेय का भी भुगतान कर दिया जाएगा. सेविकाओं से सुपरवाइजर के द्वारा वाउचर जमा करने पर तीन सौ रुपये की मांग के मामले पर उन्होंने कहा कि ऐसा उनके संज्ञान में नहीं आया है, लेकिन ऐसा है तो मामले की जांच करवाकर कार्रवाई की जाएगी.

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