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पहले विभागीय पेंच में फंसी इंटर शिक्षकों की सेवा शर्त नियमावली, अब शिक्षा मंत्री के अनुमोदन के लिए रूकी

Ranchi : राज्य में वित्त रहित शिक्षक और स्कूलों की स्थिति दयनीय है. न ही इन स्कूलों के लिए नियमावली है और न ही अनुदान के लिए तय राशि ही इन्हें मिल पाती है. वित्त रहित इंटरमीडिएट शिक्षकों के लिए भी राज्य सरकार को सेवा शर्त नियमावली बनानी थी. लेकिन राज्य गठन के 19 सालों के बाद भी राज्य में इन शिक्षकों के लिए नियमावली नहीं बन पायी.

मई 2018 में शिक्षा विभाग की ओर से झारखंड अद्यिविद्य परिषद् जैक को आदेश दिया गया. जिसके बाद जैक ने इन शिक्षकों के लिए नियमावली बनाना शुरू किया. जुलाई 2018 में जैक ने नियमावली शिक्षा विभाग को दी.

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शिक्षा विभाग ने नियमावली में कुछ त्रुटियां बताते हुए नियमावली को फिर से जैक को दिया. त्रुटियों की समीक्षा के बाद 2018 में ही जैक ने नियमावली विभाग को सौंप दी थी. लेकिन विभाग की ओर से इसपर कोई कार्रवाई नहीं की गयी.

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 30 सिंतबर को की गयी समीक्षा, शिक्षा मंत्री के अुनमोदन के लिए रूकी

लगभग दस माह बाद 30 सिंतबर 2019 नियमावली पर विभाग की ओर से समीक्षा तो की गयी. लेकिन अब शिक्षा मंत्री के अनुमोदन के लिए इसे विभाग स्तर में ही रखा गया है. समीक्षा शिक्षा विभाग के प्रधान सचिव अमरेंद्र प्रताप सिंह ने की. इसके साथ ही इस बैठक में परियोजना निदेशक, उप निदेशक समेत अन्य अधिकारी मौजूद थे.

जानकारी मिली है कि शिक्षा मंत्री के अनुमोदन के बाद इसे विधि और वित्त विभाग को दी जायेगी. यहां से अनुमोदन के बाद ही इसे कैबिनेट में स्वीकृति मिलेगी. गौरतलब है कि पिछले दिनों वित्त रहित शिक्षकों की ओर से लंबे समय तक अनशन किया गया था. जिसके बाद विभाग ने अपनी कार्रवाई में तेजी लायी.

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कक्षा एक से दस के लिए बनी थी कमेटी, लेकिन अब तक नहीं हुई कार्रवाई

शिक्षकों के संघर्ष को देखते हुए साल 2015 में उच्चस्तरीय कमिटी का गठन किया गया, कमेटी ने 2017 में विभाग को अपनी रिपोर्ट दी. जिसमें वित्तरहित शिक्षकों की सेवा शर्त समेत अनुदान से संबंधित मामलों की अनुशंसा की गयी थी. इनकी नियमावली पिछले दो साल से बनकर विभाग में है.

वित्त रहित शिक्षक संघर्ष मोर्चा के रघुनाथ सिंह ने कहा कि राज्य में लगभग दो सौ स्कूल हैं, जो वित्त रहित की सभी शर्तें पूरी करते हैं. वहीं 172 इंटरमीडिएट स्कूल, जो स्थाई स्वीकृति प्राप्त हैं. और 130 स्कूल स्थायी स्वीकृति के प्रयासरत हैं.

लेकिन विभागीय कार्रवाई से शिक्षकों और स्कूलों की परेशानी बढ़ गयी है. इतना ही नहीं मदरसा और संस्कृत स्कूल को डबल अनुदान की नियमवली भी 2014 में बन गयी. लेकिन यह नियमावली कैबिनेट से अब तक पास नहीं हुई.

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