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सरायकेला: शिक्षक नेता को घेरने के चक्कर में पूरे श‍िक्षा विभाग की फजीहत, संदेह के घेरे में एक पदाधकारी की भूमिका

Saraikela : सरायकेला-खरसावां जिले में शिक्षकों के स्थानांतरण का मामला तूल पकड़ता जा रहा है. हालत यह हो गयी है कि इस मामले में अब शिक्षा विभाग तक की फजीहत होने लगी है. इस पूरे मामले में गम्हरिया प्रखंड स्तर के एक चर्चित पदाधिकारी की भूमिका संदेह के घेरे में बतायी जा रही है. मामले ने किस कदर तूल पकड़ा है, उसका अंदाजा झारखंड सरकार के शिक्षा एवं साक्षरता विभाग के सचिव राजेश कुमार शर्मा के उस पत्र से भी लगाया जा सकता है, जिसमें छह अगस्त 2019 के संकल्प के दिन से हुये स्थानांतरण को रद्द करने की बात कही गयी है.

हालांकि उसके बाद भी हर जिले में काफी शिक्षकों का स्थानांतरण हुआ है. बावजूद इसके आज की तिथि में किसी भी जिले से एक भी स्थानांतरण रद्द होने की बात सामने नहीं आयी है. दूसरी ओर जानकारों की मानें तो केवल सरायकेला-खरसावां जिले में आनन-फानन पिछले 23 फरवरी को अखिल भारतीय प्राथमिक शिक्षक संघ के सरायकेला जिले के पदाधकारी माणिक प्रसाद सिंह समेत अन्य शिक्षकों का स्थानांतरण कर दिया गया. इस बीच विभागीय स्तर पर उन्हें नये विद्यालय में योगदान देने के लिये सात दिनों का समय दिया गया था, लेकिन यहीं से शुरू हुयी मामले में गम्हरिया प्रखंड के एक चर्चित पदाधकारी की संदिग्ध भूमिका.

श‍िक्षकों के स्‍थानांतरण से बढ़ा व‍िवाद

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जानकार बताते हैं कि उसी पदाधकारी ने जिला स्तर तक मामले को इस कदर मोड़ा कि मात्र 24 घंटे के भीतर शिक्षक नेता समेत अन्य छह शिक्षकों को दूसरे विद्यालय में भेजने का काम किया. इसे शिक्षक संघ भी दुर्भावना और पूर्वाग्रह से ग्रस्त कार्रवाई करार दे चुका है. उसके बाद ही शिक्षकों के स्थानांतरण का यह पूरा मामला तूल पकड़ता गया. खासकर राज्य स्तर पर इसके संज्ञान लेने के बाद आनन-फानन में जिले के 63 बचे शिक्षकों के पदस्थापना और नियुक्ति का विवरण छह मार्च तक आनन-फानन में जिले के डीएसई और डीइओ और मांगा गया. इससे पहले स्थानीय विधायक सह राज्य के मंत्री चंपई सोरेन के अलावा पक्ष-विपक्ष के कई नेताओं के समक्ष भी संघ मामले को उठा चुका है. नतीजन विभाग के कई पदाधिकारी इस पूरे मामले में घिरने लगे हैं.
कहीं आदिवासी शिक्षिका की प्रताड़ना से तो जुड़ा नहीं है मामला
इधर, पूरे मामले को जानकार गम्हरिया प्रखंड की आदिवासी शिक्षिका राधी पूर्ति से जुड़े होने का संदेह भी जता रहे हैं. इसकी वजह प्रताड़ना के उस मामले के मुख्य गवाह शिक्षक नेता माणिक प्रसाद सिंह का होना बताया जा रहा है. इतना ही नहीं मामले में आरोपी पदाधिकारी के खिलाफ संघ के बैनर तले महिला को न्याय दिलाने के लिये वे पूरी मजबूती के साथ खड़े हुये थे. कहीं उसी मामले को लेकर तो उन्हें निशाने पर नहीं लिया जा रहा है. यह सवाल मामले से जुड़े जानकार उठाने लगे हैं.
विद्यालय प्रबंधन समिति भी शिक्षक नेता के समर्थन में
स्थानांतरण के इस मामले में गम्हरिया स्थित बालिका अभ्यास विद्यालय प्रबंधन समिति भी शिक्षक नेता माणिक प्रसाद सिंह के समर्थन में आ गया है. उन्होंने मामले में जिले के उपायुक्त को खुला पत्र दिया है. इसकी वजह एक तो उस विद्यालय का सरकार की महत्वाकांक्षी योजना के तहत नोडल और उत्कृष्ट विद्यालय घोषित होना है. वह भी उसके बाद जब शिक्षक नेता ने तमाम जरूरी शर्तों को पूरा करने के बाद बतौर प्रधानाध्यापक विद्यालय का कार्यभार संभाला. उसके बाद ही सारी व्यवस्था पटरी पर लौटी. इसी को लेकर प्रबंधन समिति के साथ अभिभावक भी शिक्षक नेता समर्थन में हैं. वे उनके मेडिकल ग्राउंड और सुरक्षा का हवाला देते हुये भी स्थानांतरण का विरोध कर रहे हैं. अब आगे मामला किस ओर जाता है इस पर सारी निगाहें टिकी हुयी हैं.

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