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सरायकेला खरसांवा: पूर्व थाना प्रभारी वेदानंद झा पर लगा रिश्वत का आरोप हुआ सिद्ध, लोकायुक्त ने दिया कार्रवाई का आदेश

Seraikela Kharsanva:  सरायकेला खरसांवा जिले के राजनगर थाना के तत्कालीन थाना प्रभारी वेदानंद झा ने बालू उठाव की अनुमति देने के नाम पर रिश्वत मांगने का आरोप लगा था. थाना प्रभारी पर लगे आरोप को लोकायुक्त ने सही पाया है. इस मामले में लोकायुक्त ने विधि सम्मत कार्रवाई करने की अनुशंसा गृह विभाग के अपर मुख्य सचिव से की है. लोकायुक्त ने वेदानंद झा के खिलाफ की गयी कार्रवाई की रिपोर्ट तीन महीने में मांगी है.

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क्या है मामला

दरअसल चाईबासा के आदर्श नगर टूंगरी निवासी मानवेन्द्र झा के भाई को सरायकेला जिला के कुजू पंचायत अंतर्गत बालूघाट आवंटित किया गया था. सीजेएम सरायकेला की अदालत ने 12 दिसंबर, 2017 को बालू उठाव का आदेश दिया था. इस आदेश की प्रति राजनगर थाना प्रभारी वेदानंद झा के पास जमा करते हुए बालू उठाव की अनुमति मांगी गयी.

लेकिन वेदानंद झा ने बालू उठाव की अनुमति देने के लिए एक लाख रुपए रिश्वत की मांग की थी.  जबकि कोर्ट ने सभी बिंदु पर जांच के बाद उठाव का आदेश दिया था. इस बारे में शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया था कि पूर्व थाना प्रभारी वेदानंद झा ने उससे कहा था कि, मुख्यमंत्री या कोर्ट किसी का भी आदेश हो, लेकिन पैसा देने के बाद ही बालू उठाने देंगे. साथ ही शिकायतकर्ता का कहना था कि 20 हजार रुपए रिश्वत भी दी गयी, फिर भी परेशान किया जा रहा था.

लोकायुक्त 17 मार्च, 2018 को भ्रष्टाचार के खिलाफ अभियान चाईबासा में चला रहे थे.  जहां मानवेन्द्र झा ने थानेदार के खिलाफ लिखित शिकायत की थी. जिसमें शिकायतकर्ता ने थानेदार से हुई बातचीत की रिकॉडिंग की सीडी साक्ष्य के रूप में दिये थे.

लोकायुक्त ने थानेदार और शिकायतकर्ता की आवाज की जांच सीएफएसएल चडीगढ़ में करायी. लोकायुक्त ने पहले प्राप्त सीडी एवं शिकायतकर्ता एवं वेदानंद झा की आवाज विशेषज्ञ की मौजूदगी में रिकार्डिंग करायी.

फिर प्राप्त सीडी एवं लाइव रिकॉर्ड आवाज दोनों को चडीगढ़ भेजा गया. जहां दोनों आवाज मैच कर गयी. जिसपर लोकायुक्त ने कार्रवाई की अनुशंसा की है.

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लोकायुक्त ने सुनवाई के दौरान कहा

वहीं इस मामले में लोकायुक्त ने सुनवाई के दौरान कहा कि शिकायतकर्ता ने जिस साहस का परिचय दिया है, उसकी प्रशंसा करनी होगी. राज्य का प्रत्येक व्यक्ति इस तरह जाग जाये तो निश्चित रूप से भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाया जा सकता है.

रिकॉर्डिंग वार्तालाप पर दोषी का पहला मामला

लोकायुक्त कार्यालय का यह पहला मामला है, जिसमें मोबाइल पर हुई बातचीत की जांच करायी गयी. जांच में हर प्रकार की सावधानी बरती गयी. साथ ही संबंधित पदाधिकारियों के साथ लोकायुक्त कार्यालय के स्टाफ भी मौजूद थे.

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Nayika

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