न्यूज़ विंग
कल का इंतज़ार क्यों, आज की खबर अभी पढ़ें

अलगाववादी नेता यासीन मलिक 22 अप्रैल तक एनआइए की रिमांड पर

यासीन मलिक को मंगलवार शाम कड़ी सुरक्षा के बीच दिल्ली की तिहाड़ जेल लाया गया

42

NewDelhi : बुधवार को जम्मू कश्मीर लिब्रेशन फ्रंट के प्रमुख यासीन मलिक 22 अप्रैल तक के लिए एनआइए की रिमांड पर भेज दिया गया  है. इससे पूर्व मलिक को दिल्ली अदालत में विशेष न्यायाधीश राकेश स्याल के सामने पेश किया गया था.   बता दें कि   यासीन  को जम्मू की कोट भलवाल जेल में रखा गया था. खबर  है कि एनआइए यासीन से उनकी फंडिंग को लेकर सवाल जवाब करेगी. बता दें  कि केंद्र सरकार ने हाल ही में जेकेएलएफ पर गैरकानूनी गतिविधियों में शामिल होने के कारण बैन लगा दिया था.

यासीन मलिक को मंगलवार शाम कड़ी सुरक्षा के बीच दिल्ली की तिहाड़ जेल लाया गया है. रिमांड  में एनआइए मलिक से उनके संगठन की फंडिंग को लेकर पूछताछ करेगी.  यासीन को तिहाड़ के किस बैरक में रखा गया है. यह जानकारी नहीं  दी गयी है. उसे जेल में कड़ी सुरक्षा दी गयी है.

इसे भी पढ़ेंः अल्पेश ठाकोर ने कांग्रेस को अलविदा कहा, भाजपा में जाने के कयास

यासीन मलिक पर 1990  में वायु सेना के चार जवानों की हत्या का आरोप

सुरक्षा में तैनात कर्मचारियों को  हिदायत दी गयी है कि उच्चाधिकारी की अनुमति के बिना यासीन से कोई भी व्यक्ति न मिलने पाये. हाल ही में सीबीआइ ने एक याचिका दायर की थी, जिसमें जम्मू-कश्मीर के तीन दशक पुराने मामले में मलिक के खिलाफ केस खोलने की मांग की गयी थी.  वर्तमान में  जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट याचिका पर फैसला सुरक्षित रखा है.

बता दें कि जम्मू कश्मीर लिबरेशन फ्रंट प्रमुख पर 1989 में तत्कालीन केंद्रीय गृह मंत्री मुफ्ती मोहम्मद सईद की बेटी का अपहरण करने और 1990 के शुरुआती दौर में वायु सेना के चार जवानों की हत्या के आरोप है.  इस मामले में हाफिज सईद का भी नाम है, इसमें  सैयद अली शाह गिलानी और मीरवाइज उमर फारूक, हिजबुल मुजाहिदीन और दुख्तारन-ए-मिलत के नाम भी शामिल है.

पुलवामा हमले के बाद से जम्मू-कश्मीर में कड़ी कार्रवाई करते हुए अलगाववादियों के खिलाफ सख्त रुख अपनाते हुए फरवरी में यासीन मलिक को गिरफ्तार किया गया था.  बता दें कि पुलवामा हमले के बाद सरकार ने लगभग 18 नेताओं की सुरक्षा में या तो कटौती की है या सुरक्षा हटा दी गयी थी.  मंगलवार को राज्य के राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने राज्य के 400 से ज्यादा नेताओं की सुरक्षा फिर से बहाल कर दी है.

पुलवामा हमले के बाद 900 से ज्यादा लोगों की सुरक्षा हटा दी गयी थी.  दरअसल यह फैसला राज्य के मुख्य सचिव बीवीआर सुब्रमण्यम के इस विवादित फैसले पर कई राजनीतिक दलों ने विरोध जताया था.  इसपर राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने गृह मंत्रालय के इस फैसले पर एतराज भी जताया था.

इसे भी पढ़ेंः  हिटलर आज जिंदा होता, तो वह पीएम मोदी की करतूत देखकर खुदकुशी कर लेता : ममता

हमें सपोर्ट करें, ताकि हम करते रहें स्वतंत्र और जनपक्षधर पत्रकारिता...

Get real time updates directly on you device, subscribe now.

You might also like
क्या आपको लगता है हम स्वतंत्र और निष्पक्ष पत्रकारिता कर रहे हैं. अगर हां, तो इसे बचाने के लिए हमें आर्थिक मदद करें.
आप अखबारों को हर दिन 5 रूपये देते हैं. टीवी न्यूज के पैसे देते हैं. हमें हर दिन 1 रूपये और महीने में 30 रूपये देकर हमारी मदद करें.
मदद करने के लिए यहां क्लिक करें.-

you're currently offline

%d bloggers like this: