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सेंसेक्स 55 हजार के नीचे, कहीं आप पैनिक होकर पैसे तो नहीं निकाल रहे, जानिए क्या कहते हैं एक्सपर्ट्स

संजय प्रसाद

Jamshedpur: रूस-यूक्रेन युद्ध, विदेशी निवेशकों की निकासी और आरबीआई के रेपो रेट में हुई बढोतरी के बाद बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का सूचकांक 55 हजार के नीचे चला गया है. इससे घरेलू निवेशकों में घबड़ाहट है. विशेषकर वैसे निवेशक जो नये हैं और कोविड के बाद शेयर बाजार या म्यूचुअल फंड में निवेश किए हैं.

विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) ने इस साल अब तक भारतीय बाजारों से 1,14,855.97 करोड़ रुपये की निकासी की है. भू-राजनीतिक तनाव और मुद्रास्फीति की चिंता के बीच विदेशी निवेशक, भारतीय बाजारों में बिकवाली बने हुए हैं. डिपॉजिटरी के आंकड़ों के अनुसार एफपीआई ने अप्रैल माह में अब तक भारतीय शेयरों बाजारों से 48,261.65 करोड़ रुपये की निकासी की है. बैंक और डाकघरों में कम ब्याज दरों की वजह से जमशेदपुर जैसे शहरों में भी म्यूचुअल फंड में निवेश काफी बड़ा है. कोविड के बाद यह निवेश दोगुना से ज्यादा हो गया है.

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पैनिक नहीं होना है-सीए राजेश सिंह

बाजार के इस उथल पुथल पर बाजार के विशेषज्ञ सीए राजेश सिंह कहते हैं कि निवेशकों को न तो सेंसेक्स में आई गिरावट से बहुत ज्यादा पैनिक होना चाहिए और न ही बाजार के चढ़ने से बहुत ज्यादा झूमना या एक्साइटमेंट होना चाहिए. कई निवेशक होते हैं, जो सेंसेक्स चढ़ने पर निवेश करते हैं और सेंसेक्स में गिरावट होने पर पैसा निकालना शुरू कर देते हैं. यह सही नहीं है. सेंसेक्स में गिरावट होने पर निवेश और बढ़ने पर निकासी करना बेहतर होता है.
कोविड की पहली लहर में सेंसेक्स में आई गिरावट के बाद जो लोग बाजार में टिके रहे, उन्हें काफी बेहतर रिटर्न मिला. जो डर गये और घबड़ाहट में आकर पैसे की निकासी कर ली, उन्हें हानि हुई. एक समय था जब विदेशी निवेशक भारतीय बाजार को अपने अनुसार नचाते थे. हमारा जीडीपी बेहतर है, फॉरेन रिजर्व बेहतर है और भारतीय कंपनियां बेहतर परफॉर्म कर रही है.

ऐसे में लोगों को डरने की जरूरत नहीं है. बाजार का अपना साइकिल होता है. जो गिरेगा, वह कल चढेगा भी. निवेश का मकसद लांग टर्म होना चाहिए. जो लोग बाजार को लॉटरी समझते हैं वे गच्चा खाते हैं. मुझे लगता है कि एक आम निवेशक को सीधे इक्विटी में न जाकर म्यूचुअल फंड में निवेश करना चाहिए. एसआईपी सबसे सुरक्षित है. वर्तमान स्थिति में जमशेदपुर के निवेशक मल्टीकैप में निवेश कर सकते है.

शहर के एक मशहूर म्यूचुअल फंड के अधिकारी ने नाम नहीं प्रकाशित करने की शर्त पर बताया कि जो बाजार में रूकता है, ठहरता है, वही बाजार से बेहतर रिटर्न ले पाता है. निवेश में पैनिक नहीं होना है और धैर्य बनाए रखना है. ऐसी ही स्थिति 2017 में थी, लेकिन बाजार में तेजी आई और जो बाजार को समय दिए, उन्हें उसका रिटर्न मिला.

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