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अपने ही बनाये नियमों को टूटते देख रहा सहकारी सहयोग समितियां, चुनाव जीतकर डेलीगेट्स बन गये डिफॉल्टर लैंप्स के सदस्य

बैंक डिफॉल्टर लैंप्स का डेलीगेट बने हैं भाजपा नेता चंडीचरण साव, चुन्नूराम माझी एवं प्रतिमा सिंह, गम्हरिया लैंप्स को डिफॉल्टर की श्रेणी से बाहर निकालने स्वयं का पैसा जमा किया बास्को बेसरा ने

Arun Kumar Singh

Ghatshila : झारखंड स्टेट को-आपरेटिव बैंक लिमिटेड ( जेएससीबी ) के निदेशक मंडल के गठन की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है. पिछले सप्ताह से राज्यभर के लैम्पस, सोसायटीज आदि के डेलीगेट चयन के लिए वोटिंग जारी है. चुनाव जीतने वाले डेलीगेट में से डायरेक्टर का चयन होगा. सहकारी समितियां द्वारा तय नियमानुसार चुनाव वही लड़ सकेगा जिसके स्वयं के ऊपर या फिर वे जिस लैम्प्स या सोसायटी से जुड़े है/सदस्य हैं, वह संस्था भी बैंक डिफाल्टर ना हो. लेकिन अब जबकि डेलीगेट्स का चुनाव शुरू हो चला है तो बैंक डिफॉल्टर लैंप्स/सोसायटी के सदस्य चुनाव लड़ भी रहे हैं और कई लोग चुनाव जीतकर डेलीगेट घोषित भी किए जा चुके हैं. सहकारिता बैंक स्वयं अपने बनाए नियमों को तोड़ने वालों की जीत पर मुहर लगा रहा है.
उदाहरण के लिए, पूर्वी सिंहभूम जिलान्तर्गत बहरागोड़ा लैंप्स से चंडीचरण साव, बड़ाजुड़ी लैंप्स से प्रतिमा सिंह, मुटुरखाम लैंप्स से चुन्नूराम माझी को बतौर डेलीगेट विजयी घोषित किया जा चुका है, जबकि उपरोक्त तीनों ही लैंप्स बैंक डिफाल्टर हैं. बहरागोड़ा लैंप्स पर 5 लाख, 75 हजार, 177 रुपये का लोन है तो सबसे कम मात्र 4 रुपये का बैंक डिफॉल्टर है मुटुरखाम लैंप्स. लेकिन ऐसे लैंप्स के सदस्यों को चुनाव लड़ने की अनुमति न जाने सहकारिता विभाग ने किन नियमों के तहत प्रदान की है. अब इन्हीं विजयी डेलीगेट्स में से कोई बोर्ड आफ डायरेक्टर का मेंबर बनकर बैंक का भविष्य भी तय करेगा.

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बोर्ड आफ डायरेक्टर के चेयरमैन का चुनाव लड़ने की तैयारी में बास्को

सराकेला-खरसावां जिला के गम्हरिया लैंप्स लगभग 13 लाख रुपए का डिफॉल्टर था. यहां से चुनाव लड़ रहे बास्को बेसरा के खिलाफ सहकारी सहयोग समिति के रांची कार्यालय में पूर्व विधायक अनंतराम टुडू ने शिकायत भी की है. दूसरी ओर, डेलीगेट का चुनाव लड़ रहे बास्को बेसरा ने बताया कि गम्हरिया लैंप्स ने बैंक का बकाया रकम जमा करा दिया है. भरोसेमंद सूत्रों की मानें तो 13 लाख में से कुछ रकम बास्को बेसरा ने अपनी जेब से भी बैंक में जमा कराया है, ताकि उनके चुनाव लड़ने में सहकारी समिति का नियम बाधक ना बने. बास्को बेसरा सहकारिता बैंक के पिछले निदेशक मंडल में शामिल थे और तत्कालीन अध्यक्ष अभयकांत प्रसाद से नहीं बनी तो सालभर पहले ही रिजाइन कर दिया था. इस बार बास्को बेसरा अध्यक्ष पद का चुनाव लड़ेंगे, यह बात वे स्वयं तथा उनके समर्थक भी कहते हैं.

बैंक डिफॉल्टर होने के कारण दो डायरेक्टर हटना पड़ा था

सहकारिता बैंक के पिछले निदेशक मंडल में शामिल रहे नगीना सिंह एवं रघुनाथ यादव को बैंक डिफॉल्टर होने के कारण कार्यकाल के बीच में ही हटना पड़ गया था. नगीना सिंह इचाक लैंप्स एवं रघुनाथ यादव देवघर जिला के एक लैंप्स में मेंबर थे. और, दोनों ही लैंप्स तब बैंक डिफॉल्टर थे. लेकिन जब ये दोनों डेलीगेट्स एवं डायरेक्टर का चुनाव लड़े थे तब सहकारी सहयोग समितियां के साहेबानों ने चुनाव लड़ने से न जाने क्यों रोक लगाना मुनासिब नहीं समझा था.

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