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जम्मू-कश्मीर के शोपियां में सुरक्षा बलों ने 4 आतंकियों को किया ढेर, एक्सीडेंट में दो जवान शहीद

Srinagar : जम्मू-कश्मीर के शोपियां में गुरुवार को सुरक्षा बलों ने मुठभेड़ में 4 आतंकवादियों को मार गिराया है. वहीं, मुठभेड़ स्थल के रास्ते में आर्मी का वाहन दुर्घटनाग्रस्त होने की वजह से दो जवानों की मौत हो गई. एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि शोपियां के जैनापोरा इलाके के बडीगाम में आतंकवादियों की मौजूदगी की सूचना मिलने पर सुरक्षा बलों ने घेराबंदी कर तलाशी अभियान शुरू किया था. उन्होंने बताया कि तलाशी अभियान के दौरान आतंकवादियों ने सुरक्षा बलों पर गोलीबारी की जिसके बाद मुठभेड़ हुई. गोलीबारी में चार आतंकवादी मारे गए और उनकी पहचान और समूह से जुड़े होने का पता लगाया जा रहा है.

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दो जवान घायल

अधिकारी ने बताया कि मुठभेड़ स्थल पर जाते समय उनके वाहन के दुर्घटनाग्रस्त होने से सेना के दो जवान शहीद हो गए और दो अन्य घायल हो गए हैं. यह हादसा उस समय हुआ जब 44 राष्ट्रीय राइफल्स के कुछ जवान एक सूमो गाड़ी में बैठकर बडीगाम मुठभेड़ स्थल की ओर जा रहे थे, लेकिन चौगाम के पास उनका वाहन पलट गया. जिसमें दो जवान शहीद हो गए और दो घायल हो गए.

Sanjeevani

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बीते 20 दिनों में 7 प्रवासी कामगारों को मारी गयीं गोलियां

कश्मीर में बीते 20 दिनों में सात प्रवासी कामगारों को गोली मारकर घायल कर दिया गया है. सभी हमले पुलवामा के दक्षिणी जिले में हो रहे हैं. अधिकारियों को संदिग्धों को खोजने में कुछ खास सफलता हासिल नहीं हुई है. भय और अनिश्चितता के बीच कई प्रवासी श्रमिक या तो अपने गृह नगर या फिर घाटी के अन्य हिस्सों के लिए रवाना हो गए हैं.
अंग्रेजी अखबार इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के मुताबिक पुलवामा के प्रूचू गांव में सड़क के किनारे बिहार के बगहा जिले के निवासी धीरज कुमार राहगीरों पर नज़र रखता है, क्योंकि वह घर बनाने के लिए मोर्टार तैयार करता है. जब कोई अजनबी आता है तो वह डर जाता है.

उसने इंडियन एक्सप्रेस को बताया, “मुझे पता है वे (आतंकवादी) कश्मीर के बाहर के लोगों को निशाना बना रहे हैं. लेकिन हम और क्या कर सकते हैं? हम किसी भी तरह से मरेंगे.

अगर मैं यहां काम नहीं करता हूं, तो मैं अपने परिवार को क्या खिलाऊंगा? मैं सिर्फ सावधानी बरत रहा हूं और उम्मीद करता हूं कि कुछ नहीं होगा.”

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अक्टूबर में पांच लोग मारे गए थे

आपको बता दें कि प्रवासी लोगों पर हमले करीब पांच महीने के बाद हुए हैं. इससे पहले अक्टूबर में पांच लोग मारे गए थे. हालिया गोलीबारी की पहली घटना 19 मार्च को हुई थी, जब संदिग्ध आतंकवादियों ने उत्तर प्रदेश के एक बढ़ई मोहम्मद अकरम को गोली मार दी थी. आखिरी बार 7 अप्रैल को पंजाब के पठानकोट के एक मजदूर सोनू शर्मा पर पुलवामा के यादेर गांव में हमला किया गया था. वहीं, 21 मार्च को बिहार के एक मजदूर बिस्वजीत कुमार घायल हो गए थे.

3 अप्रैल को पठानकोट के एक ड्राइवर धीरज दत्त और कंडक्टर सुरिंदर को संदिग्ध आतंकवादियों ने गोली मार दी थी. चार अप्रैल को बिहार के दो मजदूरों पातालश्वर कुमार और जक्कू चौधरी पर हमला किया गया था.

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20,000-30,000 प्रवासी श्रमिक जातें हैं

एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने इंडियन एक्सप्रेस से कहा, “वर्तमान में पुलवामा में लगभग 6,000-6,500 प्रवासी श्रमिक होंगे. यह काम के मौसम की शुरुआत है, लेकिन फिर भी यह संख्या बहुत कम है. एक सामान्य मौसम में हमारे पास इस समय लगभग 20,000-30,000 प्रवासी श्रमिक होते हैं. ”

आधिकारिक अनुमानों के अनुसार, लगभग 3 लाख प्रवासी श्रमिक ज्यादातर बिहार, उत्तर प्रदेश, पंजाब और झारखंड से हर साल काम के लिए कश्मीर आते हैं. बिहार के कई लोग कश्मीर को “भारत का दुबई” बताते हैं. घाटी में दैनिक मजदूरी के के लिए उन्हें 500-700 रुपये मिलते हैं.

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