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पलामू किले को मौजूदा हालात से जोड़ती है “द सिक्रेट्स ऑफ द पलामू फोर्ट”

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Ranchi : कांके रांची के रहने वाले डॉ रजी अहमद मेडिका के क्रिटिकल केयर यूनिट में कार्यरत हैं. मेडिकल की आपात स्थिति को संभालने के साथ उन्होंने बड़े ही संजिदगी से अपने कलम के हुनर को भी बचाये रखा है. अपने स्कूल के दिनों से ही सफेद कागज पर अपनी भावनाओं को हर्फ दर हर्फ पिरोते रहे हैं.

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भावनाओं को शब्द का रूप देते हुए उन्होंने हाल ही में पलामू के किले पर आधारित एक उपन्यास लिखी है. चेरो राजवंश का 350 साल के इतिहास को समेटे पलामू किला पर लिखी इस उपन्यास को लोगों ने हाथों हाथ लिया है. यही वजह है कि मुंबई में इस नोवेल की लांचिंग के दो हफ्ते के भीतर ऑनलाइन प्लेटफॉर्म अमेजन पर 6000 से अधिक प्रतियां बिक चुकी हैं.

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अपने इस नॉवेल के संबंध में डॉ रजी अहमद बताते हैं कि मेरे इस उपन्यास की कहानी  काल्पनिक है, लेकिन इस उपन्यास के पात्र और स्थान सभी जीवंत हैं. उपन्यास का पात्र डिटेक्टिव रॉबिन होरो और इंसपेक्टर पैट्रिक मिंज ये दोनों नाम डॉ रजी अहमद के साथ मेडिका में ही काम करते हैं.

कहानी का प्लॉट झारखंड का ही है. कहानी के संबंध में डॉ अहमद बताते हैं कि इस नॉवेल की शुरुआत संत जेवियर्स कॉलेज के कैंपस से होती है, जहां इतिहास के एक प्रोफेसर ही हत्या हो जाती है. इस हत्या की कड़ी पलामू के किले से जुड़ी होती है. तब पलामू में चेरों राजवंश का शासन होता है.

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हत्या की इस कड़ी को सुलझाने में कांके का रहने वाला डिटेक्टिव रॉबिन होरो काफी मेहनत करता है. उसके इस काम में इंस्पेक्टर पैट्रिक मिंज उसकी काफी मदद करते हैं. चूंकि इस नॉवेल की कहानी के पात्र जीवंत हैं, इसलिए इस नॉवेल में संत जेवियर्स कॉलेज, रिम्स, रातू रोड व हरमू आदि जगहों से आप रूबरू होते हैं.

डॉ अहमद अपनी लेखनी के संबंध में बताया कि मुझे स्कूल के दिनों से ही लिखने में आनंद आता है. इनकी लिखी कहानी द कोलेबिरा इंसिडेंट को राष्ट्रीय स्तर पर पुरस्कार मिल चुका है. झारखंड सरकार के पर्यटन विभाग की ओर से आयोजित स्लोगन राइटिंग प्रतियोगिता में इनके लिखे स्लोगन को प्रथम स्थान भी मिल चुका है

वे कहते हैं कि झारखंड में लिखने को काफी कुछ है. कई विषय हैं, जिन्हें अपनी लेखनी से दुनिया भर में पहुंचानी है.

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