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पीएमसीएच के प्रसूति विभाग में सेकेंड क्लास और थर्ड क्लास ट्रीटमेंट

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Dhanbad: राज्य के बड़े और प्रसिद्ध अस्पतालों में से एक पीएमसीएच के प्रसूति विभाग में इन दिनों मरीजों के साथ सेकेंड क्लास और थर्ड क्लास का ट्रीटमेंट हो रहा है. यहां इलाज के लिए आनेवाली गर्भवती महिलाओं को प्रसूति विभाग की दो जगहों पर बेड मिलते हैं. कुछ प्रसूति महिलाओं को वार्ड के अंदर बेड मिलता है तो वहीं दूसरी ओर कई महिलाओं को कमरे के बाहर ही यानी थर्ड क्लास स्थिति में बेड पर जगह दे दी जाती है. उनसे यह कहा जाता है कि अभी अंदर कमरे में बेड खाली नहीं है. यहां 10 से 15 बेड लगे हुए हैं. यहां प्रसूति महिलाओं के साथ नवजात शिशुओं को भी छोड़ दिया जाता है.

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बड़े-बड़े दावों के बावजूद लचर है व्यवस्था!

करोड़ों की लागत से बने इस अस्पताल के विकास के नाम पर सरकार लगातार करोड़ों रुपये पानी में बहा रही है. यहां तरह-तरह की सुविधा उपलब्ध कराने के नाम पर हर साल अनाप-शनाप खर्च हो रहे हैं. नेताओं और मंत्रियों का आना-जाना लगा रहता है. व्यवस्था सुधारने के तरह-तरह के दावे किये जाते हैं. प्रबंधन को कड़े और बड़े-बड़े दिशा-निर्देश दिये जाते हैं.

सडांध, बदबू और गंदगी का लगा है अंबार

सडांध, बदबू ऐसी आ रही है कि लोगों को मुंह पर रुमाल रख कर रहना पड़ता है. आसपास से गुजरने में भी भारी बदबू का सामना करना पड़ता है. गुटखा, पान की पीक हर तरफ कोने में भरा हुआ. दवाओं और इन्जेक्शन के वेस्टज भी इधर-उधर बिखरे पड़े हैं. गंदगी की वजह से यहां मच्छर और मक्खियों की भरमार है. इससे कई अनचाही बीमारियों के पनपने का खतरा लगातार बना रहता है.

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नवजात को हो सकती है अनचाही समस्या, फिर भी अस्पताल प्रबंधन है बेखबर !

शुक्रवार को भी अस्पताल के प्रसूति विभाग के बाहर ही 8- 10 की संख्या में बैड लगे हुए थे. जिस पर 8 प्रसूति महिला के साथ उनके नवजात शिशु जिनका जन्म 1-2 दिन पहले ही हुआ सोये थे. सुबह ही जन्म ली नवजात शिशु को भी यहां सुलाया गया था.
टुंडी से आई एक महिला जिसने शुक्रवार को ही लड़की को जन्म दिया. उसने बताया कि अस्पताल प्रबंधन ने उससे कहा कि अभी अंदर वार्ड में बेड खाली नहीं है. फिलहाल यहीं रहना पड़ेगा. जब अंदर बेड खाली होगा तो जगह दे दी जायेगी. जबकि, आसपास गंदगी काफी फैली हुई है.

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पीएमसीएच अधीक्षक किसी काम से रांची गये थे. वह अस्पताल में नहीं थे. अस्पताल के कुछ डॉक्टरों और स्टाफ से पूछने पर बताया गया कि दिन में दो बार परिसर की सफाई होती है. बाहर लगे बेड मरीजों के लिए नहीं बल्कि उनके साथ आनेवाले परिजनों के लिए हैं. आनेवाला मरीज और उनके परिजन गंदगी फैला कर अस्पताल को दूषित कर देते हैं और जवाबदेही अस्पताल की बढ़ जाती है.

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