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मेरे आवास पर पुणे पुलिस के द्वारा की गई तलाशी, अवैध एवं अमानवीय थी – स्टेन स्वामी

Ranchi : पुणे के भीमा कोरेगांव हिंसा मामले को लेकर रांची में 28 अगस्त को रांची में बगीचा स्थित स्टेन स्वामी के आवास पर हुई छापेमारी के लेकर स्टेन ने कहा मेरे आवास पर पुणे पुलिस के द्वारा की गई तलाशी , अवैध एवं अमानवीय था. उस दौरान भी मैंने कहा था, चाहे पीएम का मामला हो या फिर भीमा कोरेगांव का, मुझे कोई जानकारी नहीं है. ना ही किसी से कोई संपर्क है. जो तलाशीऑर्डर लाया गया था, वह मराठी भाषा में था जिसको मैं समझता नहीं. बिना मुझे समझाए, मेरे परिसर की जबरदस्त तलाशी की गयी. सुबह 6 बजे से 9 बजे तक मेरे कमरे की हर चीज़ को उल्टा-पलटा किया गया और मेरे निजी वस्तुओं को कब्ज़ा किया गया. दु:ख की बात मेरी गोपनीयता के अधिकार का घोर उल्लंघन किया गया. अंत में जो रिपोर्ट बना वह भी मराठी में लिखा गया था, जिसको मैंने स्वीकार नहीं किया, जब तक उसका हिंदी-अनुवाद मुझे सुनाया नहीं गया. सवाल यह है कि क्या संदिग्ध व्यक्ति का अधिकार नहीं है, कि जो भी दस्तावेज उसके सामने रखा जाता है, उसको समझना जरूरी है?

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तलाशी के दौरान Code of Criminal Procedure in Section 100 का भी किया गया उल्लंघन

Code of Criminal Procedure in Section  100 निर्धारित करता है कि तलाशी के दौरान दो स्थानीय आदरणीय एवं स्वतंत्र व्यक्ति उपस्थित हो और रिपोर्ट में अपना हस्ताक्षर करना जरूरी है. मगर पुणे पुलिस पुणे से ही दो व्यक्तियों को साथ लाये थे, जिन्होंने हस्ताक्षर किया. पुणे पुलिस का यह व्यवहार कानून का साफ उल्लंघन है.

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दोनों कारणों से यह स्पष्ट है कि जो पुणे पुलिस ने 28 अगस्त को मेरे आवास की तलाशी ली गयी,  वह अवैध  एवं अमानवीय था. स्टने ने तलाशी के बाद सरकार पर आरोप लगाया था कि  सरकार के खिलाफ विचार प्रकट करने वालों को चुप कराने की ये साजिश है. राज्य में आदिवासी समुदाय के अधिकारो की वकालत करने वाले और दमन, भ्रष्टाचार, विस्थापन के खिलाफ आवाज उठाने वाले, वैसे लोगों को रास्ते से हटाना वर्तमान सरकार की राजनीति है. ये बेहद दुखद है.

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पुणे पुलिस तलाशी के बाद क्या ले गई थी, स्टेन के आवास से

बागीचा परिसर, जो कि फादर स्टेन स्वामी का निवास भी है, पर महाराष्ट्र और झारखंड पुलिस ने सुबह 6 बजे छापेमारी की. छापेमारी कई घंटो तक चली थी. पुलिस ने फादर स्टेन के मोबाइल, लैपटॉप, कुछ ऑडियो कैसेट, कुछ सीडी और यौन हिंसा व राजकीय दमन के खिलाफ महिलाएं (डब्ल्यूएसएस) संगठन के द्वारा पत्थलगड़ी आंदोलन पर जारी की गईं कुछ प्रेस विज्ञप्तियां ज़ब्त कर अपने साथ ले गई थी. इस पूरी कार्रवाई के दौरान फादर स्टेन को ये तक नहीं बताया गया कि उनके खिलाफ आरोप क्या हैं. इस पूरी प्रक्रिया की पुलिस ने वीडियो रिकॉर्डिंग भी किया थी.

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खूंटी के पत्थलगड़ी आन्दोलन को लेकर भी किया गया है मुकदमा

इससे पूर्व भी खूंटी पुलिस के द्वारा स्टेन और अन्य 19 सामाजिक कार्यकर्ताओं पर, पत्रकारों और बुद्धिजीवियों समेत पर राजद्रोह का मामला दर्ज किया गया था. पुलिस ने खूंटी के पत्थलगड़ी आंदोलन में इनके शामिल होने के सबूत के तौर पर फेसबुक पोस्ट का हवाला दिया. सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 (जिसे 2015 में सुप्रीम कोर्ट ने रद्द कर दिया था) की धारा 66अ के तहत भी इनपर मामला दर्ज किया गया.

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