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चाईबासा डीडीसी IAS आदित्य रंजन जिस स्कॉर्पियो पर घूमते हैं, वह कांट्रैक्टर अश्वनि मिश्रा उर्फ सोनू मिश्रा की है

Ranchi: IAS आदित्य रंजन चाईबासा के डीडीसी हैं. इससे पहले वर्ष 2018 में वह हजारीबाग के एसडीओ के पद पर थे. वर्तमान में वह जिस गाड़ी से घूमते हैं, वह उसी कांट्रेक्टर अश्वनि मिश्रा उर्फ सोनू मिश्रा के नाम से है, जिस पर चाईबासा में करोड़ों रुपये के सरकारी काम करने का आरोप है.

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गाड़ी तब खरीदी गयी थी, जब आदित्य रंजन हजारीबाग एसडीओ थे

जिस स्कॉर्पियो वाहन पर डीडीसी चाईबासा घूमते हैं, उसका नंबर JH-02AT-3973 है. इस गाड़ी पर डीडीसी सिंहभूम (वेस्ट) का नेम प्लेट लगा है. गाड़ी का नंबर हजारीबाग से रजिस्टर्ड है. और इस गाड़ी को 05 जनवरी 2018 को खरीदा गया था. गाड़ी के मालिक का नाम अश्वनि कुमार मिश्रा है. जिस वक्त इस गाड़ी की खरीद की गयी थी, उस वक्त IAS आदित्य रंजन हजारीबाग में एसडीओ के पद पर पदस्थापित थे.

गौर करने वाली बात यह है कि 9 जुलाई को चाईबासा डीडीसी ने न्यूज विंग को बताया था कि उनका किसी अश्वनि कुमार मिश्रा से कोई संबंध नहीं है. जबकि सच्चाई यह है कि वह जिस वाहन का इस्तेमाल करते हैं, वह अश्वनि मिश्रा की ही है. तथ्य यह भी है कि गाड़ी तब खरीदी गयी, जब आदित्य रंजन हजारीबाग में पोस्टेड थे. उनके चाईबासा आने के बाद यही गाड़ी चाईबासा आ गयी.

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यह उस स्कॉर्पियो गाड़ी की डिटेल है जिससे चाईबासा डीडीसी आदित्य रंजन घूमते हैं. इस डिटेल से स्पष्ट होता है कि गाड़ी कांट्रैक्टर अश्वनि मिश्रा उर्फ सोनू मिश्रा की है.

इन तथ्यों से साफ है कि IAS आदित्य रंजन और अश्वनि मिश्रा के बीच संबंध तो है. और इस बात को सहज समझा जा सकता है कि इस देश में जब किसी कांट्रेक्टर का संबंध किसी IAS से है, तो उस जिले में उस कांट्रेक्टर का क्या रुतबा होगा. बताया जाता है कि वर्ष 2018 में अश्वनि मिश्रा को हजारीबाग नगर निगम में बहुत काम मिले थे.

अब IAS आदित्य रंजन का कहना है जिस स्कॉर्पियो का इस्तेमाल वह डीडीसी की हैसियत से कर रहे हैं, उसे चाईबासा डीआरडीए ने भाड़े पर लिया है. क्योंकि चाईबासा में डीडीसी के लिये जो सरकारी गाड़ी है, उसकी हालत खराब है. उनका यह बयान एक जांच का विषय हो सकता है. क्योंकि इससे पहले उन्होंने 9 जुलाई को न्यूज विंग से कहा था कि वाहन उनके भाई की है, जिसका किस्त वह देते हैं.

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न्यूज विंग ने IAS आदित्य रंजन से 4 सवाल किये, जवाब मिला सिर्फ एक

न्यूज विंग ने 11 जुलाई की सुबह IAS आदित्य रंजन से उनके वाट्सएप नंबर पर गाड़ी की तसवीर भेज कर 4 सवाल किये. हालांकि उन्होंने सिर्फ एक लाईन का जवाब दिया.

सवाल-

– जिस गाड़ी पर डीडीसी चाईबासा का बोर्ड लगा है, बगल में आप खड़े हैं. क्या यह स्कॉरपियो सरकारी है ?
– ऑनलाईन चेक करने पर स्कॉरपियो का मालिक अश्वनि मिश्रा बता रहा है. क्या यह बात सच है ?
– आपने 9 जुलाई को बताया था कि अश्वनि मिश्रा से आपका कोई संबंध नहीं. फिर उसके नाम की गाड़ी आप कैसे इस्तेमाल कर रहे हैं?
– क्या स्कॉरपियो का मालिक वही अश्वनि मिश्रा है, जो चाईबासा जिला में करोड़ों रूपये के सरकारी काम कर रहा है?

जवाब-

चाईबासा डीडीसी की सरकारी गाड़ी कंडम है. कोई गाड़ी नहीं है. ये गाड़ी डीआरडीए को भाड़े पर दी गयी है.

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10 Comments

  1. आप पत्रकार के नाम पे कलंक है.. ढेकेदारो का चमचागिरी बंद करें…

  2. कोरोना महामारी के इस विकट समय में डीडीसी सर ने बहुत अच्छा काम किया है और इसके लिए जितनी भी तारीफ की जाए वह कम ही होगा. उनकी मेहनत और लगन उनके काम के प्रति ईमानदारी को बयां करती है. सच कहा जाए तो सरकारी महकमे में ऐसे ही होनहार लोगों की जरूरत है.
    इस लेख को पढ़कर ऐसा महसूस होता है कि कुछ लोग इन्हें बदनाम करना चाहते हैं कांट्रेक्टर ने गाड़ी दिया या सर ने गाड़ी गिफ्ट में लिया तो क्या गलत किया. हम भी अगर धनवान होते हैं तो कसम से सर ने जिस तरह का काम किया है हम भी गाड़ी गिफ्ट में दे देता है.
    देश में कई बड़े नेताओं ने और राजनीतिक दलों ने संविधान और देश को ताक में रखकर लेन-देन की है केवल कुर्सी के लिए. सत्ता का प्रयोग केवल अपने स्वार्थ के लिए किया है और आज भी हो रहा है. आज भी भ्रष्टाचार हर जगह पांव फैला कर बैठी है ऊपर से नीचे तक लॉक पैसे उगाने में व्यस्त है जरा उन पर भी तो गौर कीजिए. कोई बंदा अच्छा काम किया और पड़ गए उसे बदनाम करने के लिए. शर्म आनी चाहिए ऐसी पत्रकारिता करते हुए.

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