न्यूज़ विंग
कल का इंतज़ार क्यों, आज की खबर अभी पढ़ें

छठ पूजा में चढ़ाये जाने वाले प्रसाद का वैज्ञानिक महत्‍व

119

NW Desk: चार दिनों तक मनाये जाने वाला छठ महापर्व कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी से सप्तमी तक चलता है. इसमें पहले दिन नहाय खाय, दूसरे दिन खरना, तीसरे दिन डूबते हुए सूर्य की पूजा और फिर अंतिम दिन उगते हुए सूर्य को अर्ध्य देते हैं. छठ व्रत विशेष रूप से पुत्र प्राप्ति के लिए किया जाता है. इसमें महिलाएं दो दिनों तक बिना पानी पिये व्रत रखती हैं. इसके साथ ही छठी मैया को कई प्रकार के भोग लगाये जाते हैं. इसमें चढ़ाये जाने वाले प्रसाद का बहुत महत्व होता है, जिसके बिना पूजा को पूर्ण नहीं माना जाता. आइये जानते हैं छठ में चढ़ने वाले प्रसाद और उसके पीछे के वैज्ञानिक कारण.

इसे भी पढ़ें: आस्था के महापर्व में दिखा सांप्रदायिक सौहार्द्रः मुस्लिम समुदाय के लोग बेच रहें सूप-दउरा

ठेकुआ: छठ पूजा में ठेकुए का प्रसाद सबसे अहम माना जाता है, जो कि गुड़ और आटे को मिलाकर बनाया जाता है. इसके बिना छठ की पूजा ही अधूरी मानी जाती है. इसके पीछे वैज्ञानिक तर्क है कि छठ के साथ सर्दी की शुरुआत हो जाती है और ठंड से बचने और सेहत को बेहतर रखने में गुड़ बेहद गुणकारी होता है.

गन्‍ना: छठी मैय्या की पूजा में गन्ना भी बहुत जरूरी है. अर्ध्‍य देते समय पूजा की सामग्री में गन्ने का होना अनिवार्य है. छठी मैय्या को गन्ना बहुत प्रिय है. इसके बिना पूजा संपूर्ण नहीं मानी जाती है. बताया जाता है कि सूर्य की कृपा से ही फसल उत्पन्न होती है, इसलिए छठ पूजा में सूर्य को सबसे पहले नई फसल का प्रसाद अर्पण किया जाता है और गन्ना इस दौरान ही तैयार होता है.

इसे भी पढ़ें: झरिया: छठ बाजार में खरीदारी के लिए उमड़ी भीड़

केले का गुच्‍छा: छठी माई की पूजा करने में केले का पूरा गुच्छ मां को अर्पित किया जाता है. छठ की पूजा में केले का भी विशेष महत्व है. इसे भी प्रसाद के रूप में बांटा और ग्रहण किया जाता है. इसके पीछे तर्क है कि छठ पर्व बच्चों के लिए किया जाता है और सर्दियों के मौसम में बच्चों में गैस की समस्या होती हैं, ऐसे में उन्हें इससे बचाने के लिए प्रसाद में केला दिया जाता है.

नारियल: छठ पूजा में छठी मैय्या को प्रसन्न करने के लिए नारियल अर्पित किया जाता है. इसके पीछे वैज्ञानिक तर्क है कि मौसम में बदलाव के कारण होने वाले सर्दी जुकाम की समस्या से यह बचाने में मदद करता है. इसके अलावा इसमें कई अहम पौष्टिक तत्व मौजूद हैं, जो इम्यून सिस्टम को बेहतर रखने में मदद करते हैं.

नींबू: छठी मैय्या को डाभ नींबू जो कि एक विशेष प्रकार का नींबू है वह अर्पित किया जाता है. दिखने में यह बाहर से पीला और अंदर से लाल होता है. आपको बता दें डाभ नींबू हमारे स्वास्थ्य के लिए किसी वरदान से कम नहीं है. यह हमें कई रोगों से दूर रखता है और बदलते मौसम में यह हमारे शरीर को बीमारियों से लड़ने के तैयार करता है.

चावल के लड्डू: चावल के लड्डू भी छठी मैय्या को बहुत प्रिय है. इन लड्डुओं को यूं ही नहीं, विशेष चावल से बनाकर तैयार किया जाता है. इसमें इस्तेमाल किए गए चावल धान की कई परतों से तैयार होते हैं. बता दें, इस दौरान चावलों की भी नई फसल होती है और जैसे माना जाता है कि छठ पूजा में सूर्य को सबसे पहले नई फसल का प्रसाद अर्पण किया जाना चाहिए, इसलिए चावल के लड्डू को भोग में चढ़ाने की परंपरा है.

हमें सपोर्ट करें, ताकि हम करते रहें स्वतंत्र और जनपक्षधर पत्रकारिता...

Comments are closed.

%d bloggers like this: