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#Sci&Tech आइआइटी टीम ने ज्यादा डेटा संग्रहण, तेज कंप्यूटेशन के लिए चुंबकीय रैम विकसित की

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New Delhi : डेटा संग्रहित करने की चिंता बहुत जल्द इतिहास बननी वाली है. क्योंकि भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आइआइटी), मंडी के अनुसंधानकर्ता ऐसी चुंबकीय रैंडम एक्सेस मेमोरी (रैम) विकसित कर रहे हैं जो तेज है, कम ऊर्जा लेती है. और मौजूदा डेटा संग्रहण प्रौद्योगिकियों की तुलना में कम मात्रा में ज्यादा डेटा संग्रहित करने में सक्षम होगी.

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इस प्रौद्योगिकी को पेटेंट कराने की प्रक्रिया से गुजर रही टीम ने दावा किया है कि स्पिन ट्रांसफर टॉर्क (एसटीटी) आधारित सूक्ष्म स्पिनट्रोनिक उपकरण बिजली आपूर्ति में बाधा पहुंचने पर होने वाले डेटा नुकसान को भी रोकेगा. और इस तरह इनमें अगली पी़ढ़ी के कंप्यूटर, स्मार्टफोन और अन्य उपकरणों के निर्माण की क्षमता है.

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अनुसंधानकर्ताओं के मुताबिक, चुंबकीय रैम जिसमें डेटा को इलेक्ट्रॉन के घुमाव से दर्शाया जाता है वह पारंपरिक चार्ज आधारित रैम की तुलना में ज्यादा बेहतर संग्रहण क्षमता उपलब्ध कराएगी.

उन्होंने कहा कि स्पिनट्रोनिक प्रौद्योगिकी पर काम करने वाला उपकरण इलेक्ट्रॉन के घुमाव का इस्तेमाल सूचना को तैयार और प्रसारित करने के लिए करता है जबकि सामान्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों में इलेक्ट्रॉन चार्ज का इस्तेमाल किया जाता है.

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चुंबकीय स्थिति का प्रयोग कर इलेक्ट्रॉन के घुमाव को काम में लाने को ही स्पिन ट्रांसफर टॉर्क-मैग्नेटिक रैंडम एक्सेस मेमोरी (एसटीटी-एमआरएएम) कहा जाता है. आइआइटी मंडी के स्कूल ऑफ कंप्यूटिंग एंड इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग के सह प्राध्यापक सतिंदर के शर्मा ने यह जानकारी दी है.

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