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झारखंड में राजनीतिक दलों के पास स्टार प्रचारकों का टोटा

लोकसभा चुनाव में पार्टी के अध्यक्ष ही संभालेंगे प्रचार की बागडोर

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Deepak

Ranchi: झारखंड की 14 सीटों पर होनेवाले लोकसभा चुनाव को लेकर एक ओर जहां सरगर्मी बढ़ने लगी है. वहीं राष्ट्रीय, क्षेत्रीय और झारखंडी नामधारी दलों में स्टार प्रचारकों का टोटा भी नजर आने लगा है. सत्ताधारी दल भाजपा, कांग्रेस, झारखंड मुक्ति मोर्चा, राष्ट्रीय जनता दल, जनता दल यूनाईटेड, झारखंड विकास मोर्चा, आजसू पार्टी और झारखंड नामधारी दलों की सूची में कोई ऐसे कद्दावर नेता नहीं हैं, जो आम मतदाताओं के बीच अपनी बातों को ठोक-ठठा कर रख सकें. महागठबंधन होने से झारखंड में विपक्ष को राष्ट्रीय स्तर पर बड़े नेताओं का साथ जरूर मिलता दिख रहा है. वैसे सत्ताधारी दल में मुख्यमंत्री रघुवर दास और पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा को छोड़ अन्य कोई नेता नजर नहीं आते हैं.

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मोदी-शाह पर दारोमदार

वैसे भी बीजेपी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मैजिक और राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित साह पर अधिक निर्भर हैं. 2014 के चुनाव में 12 सीटें झारखंड से भाजपा के खाते में गयी थीं. दो सीटें जीतनेवाली झारखंड मुक्ति मोर्चा के पास गुरूजी और प्रतिपक्ष के नेता हेमंत सोरेन के अलावा कोई स्टार प्रचारक नहीं है. हालांकि, हाल ही में विधायक कुणाल षाडंगी अपनी वाकपटुता से विधानसभा में काफी छाये रहे. इनके अलावा अन्य नेताओं में जनता को रिझाने के गुण नहीं हैं.

कांग्रेस में राहुल-प्रियंका चेहरा

कांग्रेस पार्टी में भी नेताओं की कमी सामने आ रही है. प्रदेश अध्यक्ष डॉ अजय कुमार अपने ही क्लेवर में रहते हैं. इनके अलावा पूर्व केंद्रीय मंत्री सुबोध कांत सहाय, पूर्व प्रदेश अध्यक्ष सह विधायक सुखदेव भगत, विधानसभा में प्रतिपक्ष के नेता आलमगीर आलम, पूर्व मंत्री राजेंद्र सिंह और चंद्रशेखर दुबे भी हैं. पर इन्हें पार्टी का स्टार प्रचारक नहीं माना जा रहा है. सारा दारोमदार कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी और हाल ही में महासचिव बनीं प्रियंका गांधी पर ही टिका है. प्रदेश के कई नेता भी कांग्रेस के राष्ट्रीय स्तर के नेताओं के भरोसे ही लोकसभा चुनाव पार करना चाहते हैं.

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क्षेत्रीय दलों में स्टार प्रचारकों की कमी

क्षेत्रीय दलों में झारखंड विकास मोर्चा में पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी, विधायक प्रदीप यादव और पूर्व मंत्री बंधु तिर्की के अलावा कोई बड़ा नेता नजर नहीं आ रहा है. जदयू में पूर्व प्रदेश अध्यक्ष जलेश्वर महतो के हटने से पार्टी में स्टार प्रचारकों की भारी कमी हो गयी है. कमोवेश यही स्थिति आजसू पार्टी की भी है. पार्टी के केंद्रीय अध्यक्ष और पूर्व उप मुख्यमंत्री सुदेश महतो और वर्तमान में झारखंड सरकार के मंत्री चंद्रप्रकाश चौधरी, गोमिया विधानसभा उप चुनाव में दूसरे नंबर पर रहे लंबोदर महतो पार्टी के लिए महत्वपूर्ण हैं. इनकी जादुई चाल को पार्टी कार्यकर्ता भंजाने की फिराक में हैं. कहने को पार्टी में चार विधायक भी हैं. पर उनके बोल-वचन मतदाताओं को अधिक प्रभावित नहीं कर पायेंगे.

जहां तक राष्ट्रीय जनता दल का सवाल है, तो पार्टी के कद्दावर नेता रहे लालू प्रसाद के कारा में होने से प्रचार-प्रसार का काम प्रभावित हो रहा है. तेजस्वी यादव और झारखंड में पूर्व मंत्री रही अन्नपूर्णा देवी पार्टी की कमान संभालेंगे. झारखंड नामधारी दलों की स्थिति यहां और खराब है.

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