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प्री, पोस्ट मैट्रिक और अल्पसंख्यक छात्रवृति में 2017 से चल रहा घोटाला, मुख्यमंत्री से जांच कराने की मांग

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Ranchi : भारत सरकार की ओर से दी जाने वाली प्री मैट्रिक, पोस्ट मैट्रिक और मैरिट कम अल्पसंख्यक छात्रवृति योजना में बीते 2017 से गड़बड़ी चल रही है. राज्य में ऐसे कई गिरोह हैं,  जो स्टूडेंट्स के नाम पर छात्रवृति की राशि ले ले रहे हैं. और जो स्टूडेंट हैं ही नहीं. गिरोह के लोग आधार कार्ड और बैंक खाता लेकर ऑनलाइन आवेदन कर पैसे निकाल लेते हैं. वहीं जिनके नाम पर छात्रवृति की राशि निकाली जाती है, उन्हें कमीशन के तौर पर 40 फीसदी राशि दी जाती है.

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कई गिरोह सक्रिय हैं

छात्रवृति के नाम पर लगातार हो रही गड़बड़ी की जांच को लेकर झारखंड छात्र संघ ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, मंत्री आलमगीर आलम, मंत्री हाजी हुसैन अंसारी सहित मुख्य सचिव और कल्याण सचिव को पत्र लिखा है. इस संबंध में संघ के अध्यक्ष एस अली ने बताया कि सरकार योजनाओं का लाभ दिलवाने के नाम पर कई गिरोह 2017 से लोगों से आधार कार्ड और बैंक खाता लेकर ऑनलाइन आवेदन करवा कर छात्रवृत्ति की राशि की निकासी बैंक से कर रहे हैं. जिनके नाम पर निकासी की जा रही है वे किसी शैक्षणिक संस्थान के छात्र ही नहीं हैं.

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करोड़ों रुपये के घोटाले किये

पिछले तीनों वर्षों से झारखंड में करोड़ों रुपये के घोटाले किये गये हैं. वर्तमान में भी ऑनलाइन आवेदन करवाया गया है. जिस कारण स्कूलों और शैक्षणिक संस्थानों में पढ़ाई करने वाले जरूरतमंद छात्र छात्रवृत्ति से वंचित हो रहे हैं. संघ की ओर से मांग की गयी है कि जिन विद्यालयों व शैक्षणिक संस्थानों को तीन वर्षों में यूजर आईडी एवं पासवार्ड निर्गत किया गया है उन सभी विद्यालयों का भौतिक सत्यापन कराया जाये. जिन छात्रों ने जिस स्कूल का नाम लेकर छात्रवृत्ति प्राप्त की है वास्तव में वे वहां के छात्र हैं अथवा नहीं इसकी जांच हो.

आधार नंबर से आयु की जांच हो

छात्रवृत्ति प्राप्त करने वाले छात्रों के आधार नंबर से आयु की जांच हो. छात्रवृत्ति प्राप्त करने वाले अधिकतर छात्र खुद को हॉस्टल में रह कर पढ़ाई करने वाला बताते हैं. वे किस हॉस्टल में रह कर पढ़ाई कर रहे हैं, इसकी जांच हो. बैंक खाता एवं आधार नंबर के अनुसार छात्रवृत्ति प्राप्त करने वाले छात्रों का स्थायी पता व आवास की जांच हो. अल्पसंख्यक छात्रवृत्ति कार्यान्वयन हेतु जिन अधिकारियों व कर्मचारियों को जिम्मेदारी दी गयी है, उनकी कार्यप्रणाली की जांच हो.

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