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SC ने 16 अप्रैल को आयोग के प्रतिनिधि को तलब किया,  बतायें नेताओं के हेट स्पीच पर क्या  कर रहे हैं

हेट स्पीच और सांप्रदायिक बयानबाजी करने पर चुनाव आयोग के पास क्या अधिकार हैं इस बात का परीक्षण करने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने 16 अप्रैल को आयोग के प्रतिनिधि को बुलाया है.

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NewDelhi :  SC ने 16 अप्रैल को आयोग के प्रतिनिधि को पेश होने के लिए कहा है. बता दें कि चुनाव अभियान के क्रम में हेट स्पीच और सांप्रदायिक बयानबाजी करने पर चुनाव आयोग के पास क्या अधिकार हैं इस बात का परीक्षण करने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने 16 अप्रैल को आयोग के प्रतिनिधि को बुलाया है. सुप्रीम कोर्ट को चुनाव आयोग ने बताया है कि आचार संहिता तोड़ने वालों के खिलाफ वह केवल नोटिस और एडवाइजरी जारी कर रहा है. लेकिन वह न तो किसी को अयोग्य करार दे सकता है और न किसी पार्टी की मान्यता रद्द कर सकता है.  इस पर सीजेआई ने आयोग से मंगलवार की सुबह SC में रहने को कहा है.  बता दें कि कोर्ट ने अली और बजरंग बली जैसे बयानों पर भी सख्त रुख अपनाते हुए आयोग को फटकार लगाई है. सुप्रीम कोर्ट ने पूछा कि मायावती के बयान पर उसने क्या कार्रवाई की और कानून के हिसाब से क्या कदम उठाये जायेंगे.

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 पूर्व सुप्रीम कोर्ट जज की अध्यक्षता में संवैधानिक समिति गठित करने की मांग

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इस पर आयोग ने कहा कि वह मायावती के खिलाफ शिकायत दर्ज करा सकता है. इस पर कोर्ट ने आयोग से पूछा कि क्या उसे चुनाव आयोग की सख्तियों के बारे में पता है? वहीं आयोग ने यह भी कहा कि योगी आदित्यनाथ के खिलाफ की गयी शिकायत को उनके जवाब के बाद बंद कर दिया गया है, जबकि मायावती और अन्य ने कोई जवाब नहीं दिया है. जान लें कि चुनाव के क्रम में नेताओं द्वारा दिये जा रहे आपत्तिजनक, धार्मिक, जातिवादी बयानों के खिलाफ दायर याचिका पर सुप्रीम कोर्ट सुनवाई कर रहा है.  पिछली सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने राजनीतिक दलों के प्रवक्ताओं और प्रतिनिधियों के बयानों को लेकर चुनाव आयोग को नोटिस जारी किया है.

इस संबंध में दायर एक याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया कि धार्मिक या जातिगत टिप्पणी करने वाले प्रवक्ताओं या प्रतिनिधियों के खिलाफ चुनाव आयोग कार्रवाई करे. सीजेआई रंजन गोगोई, जस्टिस दीपक गुप्ता और जस्टिस संजीव खन्ना की पीठ ने एनआरआई हरप्रीत मनसुखानी की याचिका पर यह नोटिस जारी किया है. याचिका में कहा गया है कि चुनाव आयोग की निष्पक्षता और चुनाव प्रक्रिया पर नजर रखने के लिए किसी पूर्व सुप्रीम कोर्ट जज की अध्यक्षता में संवैधानिक समिति गठित की जाये.

उन राजनीतिक दलों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाये जिनके प्रवक्ता या प्रतिनिधि मीडिया में धर्म अथवा जाति संबंधी बयान देते हैं. याचिका में मांग की गयी है कि चुनाव आयोग को भी आदेश दिया जाये  कि वह जाति या धार्मिक बयानों को बहस में शामिल करने वाले मीडिया संस्थानों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करे. भ्रष्टाचार-मुक्त चुनाव कराने के लिए क्या कदम उठाये गये,  इस संबंध में चुनाव आयोग को रिपोर्ट देने का निर्देश  देने की मांग की गयी है.  याचिका के अनुसार राजनीतिक पार्टियों के प्रवक्ताओं के बयान चुनाव और जनमत को सबसे ज़्यादा प्रभावित करते हैं, लेकिन वे न तो जनप्रतिनिधित्व अधिनियम के तहत जिम्मेदार हैं और ना ही आचार संहिता के तहत.

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