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SC/ST एक्ट केस में नहीं होगी सीधे गिरफ्तारी: इलाहाबाद हाईकोर्ट

हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला देते हुए गिरफ्तारी पर लगाई रोक

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Lucknow: एससी-एसटी एक्ट में संशोधन को लेकर पहले दलित और फिर सवर्णों के नाराजगी और भारत बंद के बाद इलाहाबाद हाईकोर्ट का एक बड़ा फैसला आया है. इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने मंगलवार को पुलिस से कहा कि वह उच्चतम न्यायालय के 2014 के एक आदेश द्वारा समर्थित सीआरपीसी के प्रावधानों का पालन किए बगैर एक दलित महिला और उसकी बेटी पर हमले के आरोपी चार लोगों को गिरफ्तार नहीं कर सकती.

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कोर्ट ने सीधे गिरफ्तारी पर लगाई रोक

यह मामला आईपीसी के साथ-साथ अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (उत्पीड़न निरोधक) कानून के तहत दर्ज हुआ था. लेकिन हाईकोर्ट ने पुलिस को तत्काल रूटीन गिरफ्तारी करने से रोक दिया. उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ में न्यायमूर्ति अजय लांबा और न्यायमूर्ति संजय हरकौली की खंडपीठ ने यह आदेश पारित किया. साल 2014 में उच्चतम न्यायालय ने अर्णेश कुमार के मामले में आरोपी की गिरफ्तारी पर दिशानिर्देशों का समर्थन किया था.

सीआरपीसी की धारा 41 और 41-ए कहती है कि सात साल तक की जेल की सजा का सामना कर रहे किसी आरोपी को तब तक गिरफ्तार नहीं किया जाएगा, जब तक पुलिस रिकॉर्ड में उसकी गिरफ्तारी के पर्याप्त कारणों को स्पष्ट नहीं किया जाता.

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उच्च न्यायालय का आदेश ऐसे समय पर आया है जब अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (उत्पीड़न निरोधक) कानून का दुरूपयोग रोकने के लिए उच्चतम न्यायालय की ओर से पारित आदेश को पलटने की मंशा से हाल में संसद ने इस कानून में संशोधन के लिए एक विधेयक पारित किया है.

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