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SC का NJAC पर पुनर्विचार से इनकार, मोदी सरकार को झटका, कोलेजियम प्रणाली रहेगी

राष्ट्रीय न्यायिक नियुक्ति आयोग (एनजेएसी) एक्ट के संदर्भ में 2015 में अपने दिये फैसले पर पुनर्विचार करने से SC ने इन्कार कर दिया है.  बता दें कि SC उस कानून पर भी दोबारा विचार नहीं करना चाहता जिसके कारण उच्च न्यायपालिका में जजों की नियुक्ति के लिए कोलेजियम प्रणाली बहाल हुई है

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NewDelhi : राष्ट्रीय न्यायिक नियुक्ति आयोग (एनजेएसी) एक्ट के संदर्भ में 2015 में अपने दिये फैसले पर पुनर्विचार करने से SC ने इन्कार कर दिया है.  इसे मोदी सरकार के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है.   बता दें कि SC उस कानून पर भी दोबारा विचार नहीं करना चाहता जिसके कारण उच्च न्यायपालिका में जजों की नियुक्ति के लिए कोलेजियम प्रणाली बहाल हुई है. सीजेआई  रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने शनिवार को समीक्षा याचिका खारिज करते हुए कहा कि इसे दायर करने में 470 दिनों की देरी हुई है. कहा कि इसमें कोई मेरिट भी नहीं है.  खंडपीठ में शामिल एम खानविल्कर और अशोक भूषण ने 27 नवंबर को दिये अपने आदेश में यह बात कही, जिसे शनिवार को सुप्रीम कोर्ट (SC) की वेबसाइट पर अपलोड किया गया है.  खंडपीठ ने कहा कि उन्होंने पुनर्विचार याचिका का गहन अध्ययन किया है और उससे संबद्ध दस्तावेज भी देखे हैं.  हमें उसमें कोई भी ठोस आधार नजर नहीं आया.  इसलिए समीक्षा याचिका देर से लाने और मेरिट न होने के आधार पर खारिज की जाती है. बता दें कि नेशनल ज्यूडीशियल अप्वाइंटमेंट्स कमीशन (एनजेएसी) एक्ट 2014 से उच्च न्यायापालिका में जजों की नियुक्ति के लिए अधिशासी अफसरों की अहम भूमिका होती है.

SC का 2015 का फैसला असंवैधानिक और अवैध था

समीक्षा याचिका दायर करने वाले संगठन नेशनल लायर्स कैंपेन फार ज्यूडीशियल ट्रांसपिरेंसी एंड रिफार्म ने पांच जजों की संविधान पीठ के फैसले पर पुनर्विचार करने की अपील की थी.  इस याचिका में कहा गया था कि  SC का 2015 का फैसला असंवैधानिक और अवैध था. बता दें  कि सुप्रीम कोर्ट ने 16 अक्टूबर, 2015 को एनजेएसी एक्ट, 2014 खारिज कर उसके स्थान पर 22 साल पुरानी जजों की नियुक्ति की कोलेजियम प्रणाली बहाल कर दी थी. उस समय संविधान पीठ के पांच में से चार जजों ने एनजेएसी एक्ट और संविधान (99वां संशोधन) एक्ट, 2014 को अवैध और असंवैधानिक घोषित कर दिया था इससे पहले 16 अक्टूबर 2015 को ऐहतिहासिक फैसला सुनाते हुए पांच जजों की संविधान पीठ ने मोदी सरकार के राष्ट्रीय न्यायिक नियुक्ति आयोग NJAC को असंवैधानिक करार देते हुए रद्द कर दिया था, जिससे 22 साल पुराना कोलेजियम सिस्टम वापस आ गया था.

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