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पूर्व IPS की उगाही समेत सभी मामलों में गिरफ्तारी पर SC ने लगाई रोक, चंद दिनों पहले ही थामा था भाजपा का दामन

कभी पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की थीं करीबी, 4 फरवरी को बीजेपी में हुईं शामिल

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New Delhi: उच्चतम न्यायालय ने हाल ही में पश्चिम बंगाल भाजपा में शामिल होने वाली पूर्व आईपीएस अधिकारी भारती घोष के खिलाफ दर्ज सभी मामलों में गिरफ्तारी पर मंगलवार को रोक लगा दी. एक समय तृणमूल कांग्रेस की सुप्रीमो ममता बनर्जी की काफी नजदीक समझी जाने वाली भारती घोष ने गिरफ्तारी से संरक्षण का अनुरोध करते हुये शीर्ष अदालत में याचिका दायर की है. उन्होंने याचिका में दावा किया कि पुलिस ने कथित उगाही और प्रतिबंधित मुद्रा के बदले सोना लेने के मामले सहित उसके खिलाफ अब तक 10 प्राथमिकी दर्ज की हैं.

न्यायमूर्ति ए के सीकरी, न्यायमूर्ति एस अब्दुल नजीर और न्यायमूर्ति एम आर शाह की पीठ ने कहा कि भारती घोष के खिलाफ कोई भी दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जानी चाहिए. न्यायालय ने इसके साथ ही मामले की सुनवाई तीन सप्ताह के लिये स्थगित कर दी. भारती घोष की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता महेश जेठमलानी ने कहा कि शीर्ष अदालत ने पहले उनके खिलाफ दर्ज सात मामलों में उन्हें गिरफ्तारी से संरक्षण प्रदान किया था, लेकिन राज्य सरकार ने अब उसके खिलाफ तीन नये मामले दर्ज किये हैं.

वहीं पश्चिम बंगाल सरकार की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने इस तरह की राहत के अनुरोध का विरोध किया और कहा कि घोष के खिलाफ पुख्ता सबूत हैं. जो यह साबित कर सकते हैं कि वह क्या कर रहीं थीं. उन्होंने कहा कि जांच जारी है और ऐसी स्थिति में न्यायालय को नये मामलों में उनकी गिरफ्तारी पर रोक नहीं लगानी चाहिए.

सिब्बल ने पीठ के समक्ष उनकी टेप की गयी बातचीत की प्रतिलिपि पेश की और कहा कि इससे घोष और उनके निजी सुरक्षा अधिकारी की अपराध में संलिप्तता का पता चलता है.

पीठ ने इस तथ्य के अवलोकन के बाद कहा कि वह सारे मामलों में भारती घोष को गिरफ्तारी से संरक्षण प्रदान कर रही है. पीठ ने साथ ही मामले को तीन सप्ताह बाद सूचीबद्ध कर दिया. ये नये मामले दर्ज होने के बाद घोष ने शीर्ष अदालत में याचिका दायर करके गिरफ्तारी से संरक्षण प्रदान करने का अनुरोध किया था. उनका कहना था कि पश्चिम बंगाल सरकार उन्हें झूठे मामलों में फंसा रही है.

शीर्ष अदालत ने एक अक्टूबर, 2018 को भारती घोष को कथित रूप से प्रतिबंधित मुद्रा के बदले गैरकानूनी तरीके से सोना प्राप्त करने और उगाही के मामले में गिरफ्तारी से संरक्षण प्रदान किया था. इससे पहले मामले की सुनवाई के दौरान घोष के वकील ने कहा था कि उनके खिलाफ 2016 के एक मामले के संबंध में सात प्राथमिकी दर्ज की गयी हैं. उनका कहना था कि पुलिस उनके मुवक्किल के खिलाफ अलग-अलग स्थानों पर कार्रवाई कर रही है. इसलिए उसे कोई भी दंडात्मक कार्रवाई करने से रोका जाये.

हालांकि, राज्य सरकार की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने याचिका का विरोध करते हुये कहा था कि वह रिट याचिका के आधार पर गिरफ्तारी पर रोक चाहती हैं जो नहीं किया जा सकता.

फरवरी में ही ज्वाइन की बीजेपी

गौरतलब है कि पूर्व आईपीएस अधिकारी भारती घोष चार फरवरी को केन्द्रीय मंत्री रवि शंकर प्रसाद और वरिष्ठ नेता विजयवर्गीय की उपस्थिति में भाजपा में शामिल हो गयी थीं. और उन्होंने आरोप लगाया था कि पश्चिम बंगाल में ‘डेमोक्रेसी’ का स्थान ‘ठगोक्रेसी’ ने ले लिया है. ऐसा माना जाता है कि मुकुल रॉय के बीजेपी में शामिल होने के बाद ममता बनर्जी और भारती घोष के संबंधों में खटास आ गई थी. इसके बाद पश्चिम बंगाल में मेदिनीपुर ज़िले की साबंग सीट पर उपचुनाव हुए. इस चुनाव में बीजेपी के जनाधार में बढ़त देखने को मिली थी.

बता दें कि इंडियन एक्सप्रेस की ख़बर के अनुसार, घोष जबरन वसूली और आपराधिक षड्यंत्र के मामले को लेकर आपराधिक जांच विभाग (सीआईडी) की जांच के दायरे में हैं, जबकि उनके पति राजू हिरासत में हैं. वहीं द क्विंट की ख़बर के अनुसार, पिछले साल सीआईडी ने घोष के घर छापेमारी की थी, जिसमें 2.5 करोड़ नकद बरामद किया था.

सीआईडी ने मोस्ट वांटेड किया था घोषित

इतना ही नहीं, जांच में सहयोग न करने पर जांच एजेंसी ने घोष को ‘मोस्ट वांटेड’ तक करार दिया था. सीआईडी ने कोर्ट के आदेश पर अवैध वसूली के एक मामले में भारती घोष के खिलाफ जांच शुरू की थी. इस जांच के दौरान ही सीआईडी को भारती घोष के घर से 300 करोड़ रुपये की ज़मीन खरीदने के दस्तावेज़ मिले थे. इसी सिलसिले में सीआईडी भारती घोष से पूछताछ करना चाहती थी, लेकिन जब उनका कोई पता नहीं लगा तो सीआईडी ने उन्हें मोस्ट वांटेड घोषित कर दिया था.

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