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सीबीआई डीएसपी बस्सी के तबादले पर एम नागेश्वर राव को SC का नोटिस

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NewDelhi : SC ने सीबीआई के अंतरिम निदेशक एम नागेश्वर राव को नोटिस जारी किया है. नोटिस सीबीआई के डीएसपी अजय कुमार बस्सी की याचिका पर जारी किया गया है. नोटिस का जवाब छह सप्ताह में देने का आदेश जारी किया गया है. बता दें कि डीएसपी बस्सी ने अपने पोर्ट ब्लेयर हुए तबादले को SC ने चुनौती दी थी. सुप्रीम कोर्ट ने बस्सी की याचिका पर शुक्रवार को सुनवाई की. याचिका में एके बस्सी ने दावा किया है कि उनका तबादला दुर्भावना से प्रेरित है और इससे सीबीआई के पूर्व निदेशक राकेश अस्थाना के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी की जांच प्रभावित होगी. सीबीआई के पूर्व विशेष निदेशक राकेश अस्थाना के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोप में दर्ज प्राथमिकी की जांच करने वाले एके बस्सी ने आरोप लगाया है कि वह सीबीआई के अंतरिम निदेशक एम नागेश्वर राव के शोषण के शिकार हैं. बस्सी ने याचिका में दावा किया था कि सीबीआई के भीतर कुछ तत्वों का प्रतिनिधित्व कर रहे नागेश्वर राव नहीं चाहते कि राकेश अस्थाना की प्राथमिकी के मामले में याचिकाकर्ता स्वतंत्र और निष्पक्ष तरीके से जांच करे.

याचिका के अनुसार नागेश्वर राव ने ही 24 अक्टूबर, 2018 को उनका तबादला पोर्ट ब्लेयर किया था और एक बार फिर वह आलोक वर्मा प्रकरण में शीर्ष अदालत के फैसले की अनदेखी करते हुए उन्हें अंडमान निकोबार भेजा. बस्सी ने अपनी याचिका में जांच ब्यूरो के अंतरिम निदेशक के 11 जनवरी के तबादला आदेश को चुनौती देते हुए कहा है कि इससे जांच एजेंसी के पूर्व निदेशक आलोक कुमार वर्मा के मामले में न्यायालय के निर्देशों का उल्लंघन होता है.

तबादला आदेश का मकसद उनका शोषण करना है

सीबीआई के आठ जनवरी के फैसले के बाद हालांकि आलोक वर्मा को जांच एजेंसी के निदेशक पद पर बहाल कर दिया गया था, लेकिन दो दिन बाद ही उन्हें उच्चस्तरीय समिति ने भ्रष्टाचार और जिम्मेदारियों के निर्वहन में लापरवाही की वजह से पद से हटा दिया था. SC ने अपने फैसले में बस्सी सहित उन सभी अधिकारियों, जिनका वर्मा को अवकाश पर भेजने के केंद्र सरकार के फैसले के बाद अलग-अलग स्थानों पर तबादला किया गया था. बस्सी के अनुसार वर्मा की बहाली के बाद 9 जनवरी को उन्होंने जांच एजेंसी के निदेशक को एक प्रतिवेदन दिया था जिस पर उनका वापस दिल्ली तबादला कर दिया गया था.

बस्सी ने अपनी याचिका में कहा है कि यह आदेश ऐसे अधिकारी ने दिया है जो ऐसे आदेश देने के लिए सक्षम नहीं है. याचिका में कहा गया है कि इस आदेश का मकसद उनका शोषण करना है और यह राकेश अस्थाना के खिलाफ 15 अक्टूबर, 2018 को दर्ज प्राथमिकी की जांच को अनुचित तरीके से प्रभावित करने वाला है.

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