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वन्यजीवों की हत्या के खिलाफ BJD सांसद की याचिका पर SC का बिहार, हिमाचल प्रदेश को नोटिस

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New Delhi: देश के विभिन्न हिस्सों में खड़ी फसल को जंगली जानवरों के नुकसान पहुंचाने से बचाने के लिये उनका वध करने की अनुमति देने के खिलाफ दायर याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई. गुरुवार को सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने बिहार और हिमाचल प्रदेश सरीखे राज्यों को नोटिस जारी किये. न्यायालय ने कहा कि हमें ‘मनुष्य और जानवरों’ के बीच टकराव पर नियंत्रण पाने के तरीके खोजने होंगे.

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‘समस्या का समाधान चाहिये’

प्रधान न्यायाधीश एस ए बोबडे, न्यायमूर्ति ए एस बोपन्ना और न्यायमूर्ति वी रामासुब्रमणियन की पीठ ने वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से इस मामले में याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ लूथरा की दलीलें सुनीं. लूथरा का कहना था कि फसलों को बर्बाद होने से बचाने के लिये नीलगाय जैसे जंगली पशुओं को बड़ी संख्या में मारने की अनुमति दी गयी है.

पीठ ने इस पर टिप्पणी की, ‘‘हमें समाधान चाहिए. यह कहना समाधान नहीं है कि उन्हें मत मारो. इसके समाधान के बारे में सोचें. हम इस मामले को केरल के हाथी वाले मामले के साथ संलग्न कर रहे हैं. केरल में पटाखों से भरा अनन्नास खाने की वजह से एक हथिनी की मृत्यु हो गयी थी.’’
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‘मनुष्य और जानवरों’ के बीच टकराव पर नियंत्रण जरूरी

पीठ देश में जंगली पशुओं की हत्या की रोकथाम के उपायों के लिये बीजद के सांसद अनुभव मोहंती की याचिका पर सुनवाई कर रही थी. पीठ ने टिप्पणी की कि जानवरों का वध नहीं करने और फसलों को बर्बाद होने की इजाजत देना तो समाधान नहीं है.

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पीठ ने कहा कि जानवरों और मनुष्य के बीच इस टकराव पर नियंत्रण पाने के तरीके खोजने होंगे जिससे न तो जानवरों की हत्या हो और न ही फसलों को नुकसान पहुंचे. लूथरा ने कहा कि जंगली जानवरों के इलाकों तक मानव आबादी का विस्तार इस समस्या की एक वजह है. पीठ ने कहा कि ऐसे जानवरों का वध करने की बजाय उन्हें भगाने के लिये रबर की बुलेट का इस्तेमाल किया जा सकता है. पीठ ने वकील से कहा कि वह इस मसले से निबटने के उपाय सुझायें.

बता दें कि बीजू जनता दल के लोकसभा सदस्य मोहंती ने अपनी याचिका में जंगली जानवरों को मारने और इसके लिये पुरस्कार देने की परंपरा पर अंकुश लगाने का निर्देश देने का अनुरोध किया है. याचिका में कहा गया है कि बिहार, हिमाचल प्रदेश और केरल जैसे राज्य नीलगाय जैसे जानवरों को मारने के लिये पुरस्कार दे रहे हैं.

इससे पहले, केन्द्र ने दिसंबर, 2015 में बिहार में नीलगाय और जंगली भालू तथा हिमाचल प्रदेश में बंदरों को मारने को मंजूरी देते हुए उन्हें वन्यजीव संरक्षण कानून, 1972 के तहत हिंसक पशु घोषित कर दिया था.

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