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सीबीआई विवाद :  SC के तेवर तल्ख, सरकार से पूछा, डायरेक्टर को छुट्टी पर भेजने से पहले चयन समिति की मंजूरी क्यों नहीं ली  

सीबीआई विवाद पर सुनवाई के क्रम में मोदी सरकार को SC की तल्खी झेलनी पड़ी हैं.  SC ने सरकार के समक्ष सवाल उठाये हैं कि सीबीआई बनाम सीबीआई विवाद दो बड़े अफसरों के बीच की ऐसी लड़ाई नहीं थी जो रातोंरात सामने आयी

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NewDelhi : सीबीआई विवाद पर सुनवाई के क्रम में मोदी सरकार को SC की तल्खी झेलनी पड़ी हैं.  SC ने सरकार के समक्ष सवाल उठाये हैं कि सीबीआई बनाम सीबीआई विवाद दो बड़े अफसरों के बीच की ऐसी लड़ाई नहीं थी जो रातोंरात सामने आयी.  कहा कि यह ऐसा मामला नहीं था कि सरकार  सिलेक्शन कमेटी से बातचीत किये बिना सीबीआई निदेशक की शक्तियां तुरंत खत्म करने का फैसला ले. बता दें कि सीबीआई डायरेक्टर आलोक वर्मा से अधिकार वापस लेने और उन्हें छुट्टी पर भेजने के सरकार के फैसले के खिलाफ वर्मा की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को सुनवाई की. सीजेआई रंजन गोगोई की नेतृत्व वाली बेंच ने कहा कि केंद्र ने खुद माना है कि ऐसी स्थितियां पिछले तीन माह से पैदा हो रही थीं.  इस क्रम में बेंच ने कहा कि अगर केंद्र सरकार ने सीबीआई डायरेक्टर की शक्तियों पर रोक लगाने से पूर्व चयन समिति की मंजूरी ले ली होती तो कानून का बेहतर तरीके से पालन होता. साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सरकार की कार्रवाई की भावना संस्थान के हित में होनी चाहिए. सीजेआई रंजन गोगोई सरकार से पूछा कि कुछ महीने इंतजार कर लेते तो क्या हो जाता?

 चयन समिति से परामर्श क्यों नहीं किया

बता दें कि गुरुवार को सीबीआई विवाद की सुनवाई के क्रम में SC के तेवर तल्ख नजर आये.  चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से पूछा कि सरकार ने 23 अक्टूबर को सीबीआई डायरेक्टर आलोक वर्मा की शक्तियां वापस लेने का फैसला रातोंरात क्यों लिया?  कहा कि वर्मा कुछ माह में रिटायर होने वाले थे तो और कुछ महीनों का इंतजार और चयन समिति से परामर्श क्यों नहीं हुआ? जवाब में तुषार मेहता ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि केंद्रीय सतर्कता आयोग (सीवीसी) इस निष्कर्ष पर पहुंचा था कि असाधारण स्थितियां पैदा हुईं है.  कहा कि असाधारण परिस्थितियों में कभी-कभी असाधारण उपचार की आवश्यकता होती है.  सॉलिसिटर जनरल के अनुसार सीवीसी का आदेश निष्पक्ष था, दो वरिष्ठ अधिकारी लड़ रहे थे और अहम केसों को छोड़ एक दूसरे के खिलाफ मामलों की जांच कर रहे थे.

इससे पूर्व केंद्र सरकार ने बुधवार को SC से कहा था कि उसने सीबीआई डायरेक्टर आलोक वर्मा और स्पेशल डायरेक्टर राकेश अस्थान के बीच इसलिए दखल दिया कि वे बिल्लियों की तरह लड़ रहे थे.  केंद्र ने सीबीआई की विश्वसनीयता और अखंडता को बहाल करने के लिए हस्तक्षेप किया.  बता दें कि बुधवार को सुनवाई के दौरान महाधिवक्ता केके वेणुगोपाल ने सीजेआई रंजन गोगोई, जस्टिस संजय किशन कौल और जस्टिस केएम जोसेफ की बेंच से कहा था कि सरकार को आश्चर्य था कि दो शीर्ष  बिल्लियों की तरह लड़ रहे थे. ‘

चयन समिति में प्रधानमंत्री, नेता विपक्ष और सीजेआई शामिल होते हैं

महाधिवक्ता केके वेणुगोपाल ने सीबीआई डायरेक्टर आलोक वर्मा से शक्तियां छीनने के फैसले का बचाव करते हुए  कहा था कि सरकार ने अपने अधिकार क्षेत्र में काम किया है. जान लें कि सीनियर ऐडवोकेट फली एस नरीमन, कपिल सिब्बल, दुष्यंत दवे और राजीव धवन ने 29 नवंबर को पिछली सुनवाई में वर्मा की शक्तियां छीनने के सरकार की कार्रवाई की कानूनी वैधता पर सवाल उठाया था. SC ने कहा था कि वह सुनवाई इस पर सीमित करेगी कि क्या सरकार के पास बिना चयन समिति की सहमति के सीबीआई प्रमुख के खिलाफ कार्रवाई करने का अधिकार है या नहीं? बता दें कि  चयन समिति में प्रधानमंत्री, नेता विपक्ष और सीजेआई शामिल होते हैं.

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