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एसबीआइ कैप्स करेगा लातेहार में बने एस्सार पावर प्लांट को नीलाम

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सुप्रीम कोर्ट के कोल ब्लॉक आंवटन रद्द करने के बाद कंपनी हुई दीवालिया, 3300 करोड़ एसबीआइ से लिया था लोन

2018 में ऊर्जा विभाग ने किया था असेसमेंट, आठ महीने में चालू हो जाता प्लांट, 2800 करोड़ का हो चुका है काम

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ऊर्जा उत्पादन निगम लिमिटेड को देने की थी योजना

Chhaya

Ranchi: एस्सार पावर लिमिटेड के आवंटित प्लांट की नीलामी की तैयारी की जा रही है. कंपनी को लातेहार के चंदवा में पावर प्लांट बनाने के लिये अशोका और चकला कोल ब्लॉक आंवटित किया गया था. कंपनी को पावर प्लांट बनाने के लिये कोल ब्लॉक 1993 में आवंटित किया गया था. जिसे 2015 में सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद रद्द किया गया.

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कंपनी ने लगभग 3300 करोड़ एसबीआइ से लोन लेकर आवंटित जगह पर काम किया. सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद कोल ब्लॉक रद्द होने पर कंपनी ने काम बंद किया. वहीं लोन ली गयी राशि के एवज में कंपनी बैंक की डिफॉल्टर हो गयी. अब एसबीआइ कैप्स की ओर से इन पावर प्लांट को नीलाम करने की तैयारी की जा रही है.

इस प्रोजेक्ट में एसबीआइ का अधिक शेयर था. जिसके बाद एसबीआइ ने इसे एसबीआइ कैप्स को दिया. जो एसबीआइ की मेजर कपंनी है. जानकारी है कि एसबीआइ कैप्स लगातार पावर प्लांट नीलामी की तैयारी में लगी है.

1200 मेगावाट के लिये 2800 करोड़ खर्च किया कंपनी ने

सुप्रीम कोर्ट के कोल ब्लॉक आवंटन रद्द करने तक कंपनी ने लगभग 2800 करोड़ का काम कर लिया था. और अनुमान है कि आठ महीने और काम किया जाता तो प्लांट शुरू हो जाता. जबकि कंपनी ने 3300 करोड़ का लोन ले रखा था. बैंक इंसोल्वेंसी डिफॅाल्टर कानून के तहत एनसीएलटी में मुकदमा दर्ज किया. मामला फिलहाल चल रहा है. वहीं साल 2015 में कंपनी को भी दीवालिया घोषित किया गया. जानकारी मिली है कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश देने के बाद, कंपनी भी बैंकरप्ट हो गयी थी. इस पावर प्लांट बनने पर राज्य को 1200 मेगावाट बिजली मिलती.

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2018 में कराया गया था असेसमेंट

ऊर्जा विभाग के तत्कालीन सचिव नितिन मदन कुलकर्णी ने साल 2018 में पावर प्लांट का असेसमेंट कराया था. जिससे जानकारी हुई थी कि कंपनी सिर्फ आठ महीने में चालू हो जाती. ऊर्जा विभाग की ओर से तब निर्णय लिया गया था कि ऊर्जा विकास उत्पादन निगम लिमिटेड को पावर प्लांट दिया जाये. निगम सरकार के जरिये प्लांट का अधिग्रहण करती. साथ ही पतरातू को मिलने वाले कोयला लिंकेज इस प्लांट को देने की योजना थी. इसके बाद ऊर्जा सचिव का तबादला हो गया. और मामला भी ठंडा पड़ गया. पूर्व सरकार चाहती तो कंपनी का अधिग्रहण कर सकती थी. लेकिन मामला एनसीएलटी में जाने के बाद, अब एसबीआइ कैप्स इसकी नीलामी करायेगा.

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