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कर्ज लेकर नौकरी करने गया सऊदी, हुई मौत, शव के लिए भटक रहे परिजन

Ranjeet Kumar Singh
Dhanbad : सिंदरी क्षेत्र का रहने वाला युवक कर्ज लेकर सऊदी नौकरी करने गया था. जहां काम के दौरान उसकी मौत हो गयी, और अब उसके परिजन उसका शव लाने के लिए कार्यालयों के चक्कर लगा रहे हैं.

गौरतलब है कि सिंदरी के मनोहरटांड़ के रहने वाले 34 वर्षीय जयप्रकाश महतो की सऊदी में काम के दौरान मौत हो गयी. वह अपने घर का एकमात्र कमाउ सदस्य था. जयप्रकाश फिटर का काम जानता था और इसी काम के लिए सऊदी की कंपनी सऊदी सर्विस इलेक्ट्रो मैकेनिकल कंपनी ने उसका सलेक्शन किया.

जयप्रकाश ने सऊदी जाने के लिए लोगों से कर्ज भी लिया. उम्मीद थी कि सऊदी जाकर उसके घर की आर्थिक स्थिति सुधरेगी. उसका परिवार खुशहाल होगा लेकिन सऊदी में उसे फिटर का काम नहीं दिया गया. कंपनी ने उसे उस काम में लगा दिया जो वह नहीं जानता था.

जयप्रकाश ने इस बात की जानकारी अपनी मां को दी. मां ने कहा घर लौट आओ. जिसपर जयप्रकाश ने कहा कि अब इतनी जल्दी घर लौटना संभव नहीं है, कुछ दिन काम करने के बाद वापस आउंगा. लेकिन फिर कुछ ही दिन के बाद 28 दिसंबर की शाम को सऊदी से खबर आयी कि काम के दौरान एक दुर्घटना में जयप्रकाश की मौत हो गयी.

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अभी तक आश्वासन के सिवा नहीं मिला कुछ

खबर सुनने के बाद से परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है. परिजनों ने बताया कि अभी तक मौत की सूचना कंपनी की ओर से उन्हें नहीं दी गयी है. जयप्रकाश का मौसेरा भाई, जो सउदी में ही काम करता है उसने फोन कर बताया कि जयप्रकाश की मौत हो गयी है.

इस खबर के बाद परिवार पर विपत्तियों का पहाड़ टूट पड़ा है. सबसे बड़ी समस्या यह है कि जयप्रकाश का शव आखिर घर तक कैसे आयेगा. आर्थिक रूप से यह परिवार इतना सक्षम नहीं कि खुद से कोई पहल करे.

जयप्रकाश का शव लाने के लिए पिता और भाई ने सिंदरी विधायक और धनबाद डीसी से गुहार लगायी है. लेकिन इसके बावजूद कोई समाधान अब तक नहीं निकल पाया है. वे लोग प्रतिदिन कार्यालयों का चक्कर लगा रहे हैं लेकिन अब तक आश्वासन के सिवा कुछ नहीं मिला है.

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अन्न का एक दाना भी हलक से नहीं उतर रहा नीचे

परिजनों ने कहा कि जब घर में किसी की मौत हो जाती है, तो उसके अंतिम संस्कार के बिना घर के लोग कुछ खाते-पीते नहीं हैं. मां-पिता और पत्नी का रो-रोकर बुरा हाल है. उन्होंने बताया कि अन्न का एक दाना भी उनके हलक से नहीं उतर रहा. कहीं से कोई सही जानकारी नहीं मिल पा रही है उनके बच्चे का शव आखिरकार कब तक भारत आ पायेगा.

कंपनी की तरफ से अभी तक मौत की सूचना भी नहीं दी गयी है. परिजनों को समझ में नहीं आ रहा है कि जयप्रकाश के तीन बच्चों का भरण-पोषण कैसे होगा. इतने बड़े परिवार की जिम्मेदारी कौन उठायेगा.

जयप्रकाश के पिता डोमन महतो कहते हैं कि उन्होंने भरण-पोषण के लिए मुआवजे की मांग की है लेकिन इस मामले में भी कहीं से कोई ठोस आश्वासन नहीं मिला है.

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