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सत्यमेव जयते ने बदल दी जिंदगी, दुर्घटना में घायल लोगों के बन गये हैं मसीहा  

सड़क पर तड़पते दुर्घटनाग्रस्त मरीजों को देखकर पहले तो मैं भी रूकना नहीं चाहता था

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Saurav Shukla

Ranchi : साल 1983 से ही रांची में ऑटो चलाकर अपने परिवार का भरण-पोषण कर रहा हूं. सड़क पर तड़पते दुर्घटनाग्रस्त मरीजों को देखकर पहले तो मैं भी रूकना नहीं चाहता था. लेकिन टीवी पर सत्यमेव जयते कार्यक्रम में बताया गया कि लोगों की सबसे ज्यादा मौत सड़क हादसे की वजह से हो जाती है. टीवी पर उस दिन कार्यक्रम देखा और खुद को बदलने का निश्चय कर लिया. पेशे से ऑटो चालक रांची के दिपाटोली निवासी अलाउद्दीन अंसारी ने ये बातें कहीं.

उन्होंने कहा कि पिछले चार सालों से सड़क हादसे में घायल लोगों को निशुल्क नजदीकी अस्पताल पहुंचाने का काम कर रहा हूं. अलाउद्दीन ने बताया कि सड़क पर लगे भीड़ में मैं कभी खड़ा नहीं हुआ, अगर ऑटो के पहिये में ब्रेक लगती है तो जरूरतमंद लोगों की मद्द के लिए ही रूकती है.

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सप्ताह में तीन-चार दुर्घटनाग्रस्त की करते हैं मदद

सत्यमेव जयते ने बदल दी जिंदगी, दुर्घटना में घायल लोगों के बन गये हैं मसीहा

अरगोड़ा चौक से बिग बाजार तक ऑटो चलाने वाले अलाउद्दीन कहते हैं कि सप्ताह में तीन-चार दुर्घटनाग्रस्त लोगों को मदद पहुंचाते हैं. इसके लिए वे किसी से एक रूपया भी नहीं लेते. दुर्घटानाग्रस्त लोगों को न केवल अपने ऑटो से लेकर जाते हैं, बल्की नजदीकी अस्पताल में भर्ती भी करवाते हैं.

साथ ही दुर्घटनाग्रस्त के परिजनों को संपर्क कर घटना की जानकारी भी देते हैं. चार साल में अब तक सैकड़ों लोगों को मदद पहुंचा चुका है और बदले में जो मिलती है, वो है दुआ, जो दिल को सुकुन देती है.

समाज के रक्षक का रूप देख मन मायूस हो जाता है

एक घटना का जिक्र करते हुए अलाउद्दीन काफी मायूस हो गए. कहने लगे की पुलिस हमारे समाज की रक्षक जरूर है, लेकिन कभ-कभी वो भक्षकों जैसा व्यवहार भी करने लगती है. एक दुर्घटनाग्रस्त मरीज को लेकर राज हॉस्पिटल जा रहा था. इस दौरान ट्रैफिक पर तैनात एक जवान ने “नो इंट्री” का हवाला देकर फाइन काट दिया. जवान को दुर्घटनाग्रस्त व्यक्ति के हालत भी दिखाया, लेकिन ट्रैफिक पुलिस का दिल नहीं पसीजा और आखिरकार फाइन लेने के बाद ही जाने दिया गया.

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ऑटो चलाकर अपने बच्चों को दे रहे हैं शिक्षा

अलाउद्दीन अंसारी कहते हैं कि ऑटो चलाकर अपने दो लड़के और एक लड़की को स्नातक की पढ़ाई पूरी करवा चुके हैं. आगे भी इच्छा है कि बच्चों को अच्छी शिक्षा मिले, ताकी वे भी देश और समाज का नाम रौशन कर सकें.

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