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सरयू राय ने बार काउंसिल के सदस्यों को पत्र लिखा, कहा – मेरे खिलाफ की गयी टिप्पणियों को रद्द करते हुए मुझे अपना पक्ष रखने दिया जाये

झारखंड राज्य बार काउंसिल की बैठक 29 जून को

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Ranchi: खाद्य आपूर्ति मंत्री सरयू राय ने झारखंड राज्य बार काउंसिल के सभी सदस्यों को पत्र लिख कर 29 जून की बैठक में उनके खिलाफ पारित प्रस्ताव को वापस लेने का आग्रह किया है. उन्होंने पत्र में कहा है कि बैठक में उन्हें अपना पक्ष रखने का मौका दिया जाये. श्री राय ने कहा है कि 23 नवंबर, 2018 को बार काउंसिल की हुई बैठक में उनके खिलाफ कुछ सदस्यों ने अपमानजनक और आपत्तिजनक टिप्पणी की थी. उन्होंने कहा है कि सभी सदस्यों ने उनके लिखे पत्र को पढ़ा होगा. बार काउंसिल की बैठक एक लंबे अंतराल के बाद हो रही है. काउंसिल के अध्यक्ष से सदस्य स्पष्टीकरण की मांग करें. बार काउंसिल के अध्यक्ष से यह भी पूछा जाये कि खान विभाग के जिस मुक़दमे का जिक्र किया है, उसमें खान विभाग का पक्ष रखते समय परामर्श क्यों नहीं किया गया. माननीय उच्च न्यायालय से क्यों तथ्य छुपाये गये, जिस पर विभाग ने असहमति जतायी थी.

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किससे प्रेरित होकर गलत तथ्य प्रस्तुत किया अध्यक्ष ने

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फिल्म रॉ के जासूस रहे रविन्द्र कौशिक के जीवन पर आधारित है. जिसमें उन्हें जासूसी के दौरान पकड़े जाने पर अनेक यातनाएं भी झेलनी पड़ी थीं.

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खाद्य आपूर्ति मंत्री ने कहा है कि बार काउंसिल के अध्यक्ष से यह भी पूछा जाना चाहिए कि किससे प्रेरित होकर अथवा किसके आदेश पर राजस्व विभाग से संबंधित टाटा स्टील लि. बनाम सरदार दलजीत सिंह मामले में गलत कारण प्रस्तुत किया गया. इसकी वजह से सरकार ने सरदार दलजीत सिंह के करीब 5 एकड़ क्षेत्रफल के भूखंड की जमाबंदी रद्द करने का आदेश दे दिया. जब सरदार दलजीत सिंह के अधिवक्ता द्वारा उच्च न्यायालय को वस्तुस्थिति से अवगत कराया गया, तो न्यायालय ने इसके लिए काउंसिल के अध्यक्ष को फटकार भी लगायी. इतना सब कुछ होने पर राजस्व विभाग को पत्र लिख कर अपने पूर्व के पत्र को वापस लिया. सरदार दलजीत सिंह भाजपा के पूर्व प्रदेश प्रवक्ता सरदार अमरप्रीत सिंह के भाई हैं. बार काउंसिल की बैठक में विचार होना चाहिए कि इस मामले में बार काउंसिल के अध्यक्ष की भूमिका न्यायोचित है या राजनीति से प्रभावित है. बार काउंसिल के अध्यक्ष का यह आचरण “प्रोफ़ेशनल मिसकंडक्ट” की श्रेणी में आता है या नहीं?

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