न्यूज़ विंग
कल का इंतज़ार क्यों, आज की खबर अभी पढ़ें

सरयू राय यूं ही नहीं हैं व्यथित, भ्रष्टाचार के आरोपों पर सरकार व पार्टी दोनों का चुप रहना संदिग्ध

-              क्या भ्रष्टाचार पर भाजपा के मानदंड बदल गये, जो अटल के समय थे.

739

Surjit Singh

झारखंड के खाद्य आपूर्ति मंत्री सरयू राय द्वारा अमित शाह को पत्र लिखकर इस्तीफे की पेशकश करना और पत्र का मीडिया में आने पर झारखंड भाजपा में विवाद है. विपक्ष हमलावर है. भाजपा के प्रवक्ता इसे गलत बताते हैं, तो प्रदेश अध्यक्ष मामला सुलझाने की बात करते हैं. सरकार या मुख्यमंत्री रघुवर दास की तरफ से कोई जवाब अब तक नहीं आय़ा है. पत्र में रघुवर दास पर ही सवाल उठाये व आरोप लगाये गये हैं. भाजपा में विवाद पत्र लिखने व मीडिया में आने को लेकर है. भाजपा के लोग इस बात की चर्चा भी नहीं करते कि सरयू राय का मामला यहां तक कैसे पहुंचा. सरयू राय को क्यों राष्ट्रीय अध्यक्ष तक को पत्र लिखना पड़ा. क्यों सरयू राय की शिकायतों पर सरकार ने जांच कर कार्रवाई नहीं की. उनके आरोप, सवाल व शिकायतें क्या हैं. सरकार या पार्टी यह कहने की स्थिति में भी नहीं है कि सरयू राय के आरोपों में दम नहीं है.

सरयू राय के बारे में कुछ भी फैसला लेने से पहले पार्टी को यह समझना होगा कि सरयू राय कौन हैं, क्या हैं, उनका राजनीतिक जीवन क्या रहा है, उन्होंने भ्रष्टाचार के खिलाफ कब-कब लड़ाई की. पर पार्टी और सरकार को शायद अभी इसकी फुर्सत नहीं है. सरयू राय ने पिछले दो सालों में मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर जो-जो शिकायतें कीं, उनमें अधिकांश भ्रष्टाचार से संबंधित हैं. शायद ही सरकार ने समय रहते उन आरोपों की जांच कराकर कार्रवाई की. पार्टी को इस तथ्य को भी ध्यान रखना होगा.  यह समझना होगा कि भ्रष्टाचार के जिन मामलों में सरयू राय ने लड़ाई लड़ी, उन मामलों में तब के प्रभावशाली लोगों को जेल तक जाना पड़ा. नहीं तो यही समझा जायेगा कि भ्रष्टाचार को लेकर भारतीय जनता पार्टी और उसकी सरकार दोनों की सोंच में बड़ा परिवर्तन आ गया है. मानदंड बदल गये हैं.

“50 सालों से हमने जो परंपरा डाली थी. जो हमें विरासत में मिली थी. आज उसको चुनौती दी जा रही है. वो विरासत थेः कि अगर सत्ता में बैठे किसी राजनेता के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोप लगे और उन आरोपों में प्रथम दृष्टि में साधार माना जाये. आगे की जांच करना आवश्यक हो. तो ऐसे व्यक्ति के लिये उसका मामला अदालत में भेजने के साथ-साथ उस व्यक्ति को अपने उंचे पद से हट जाना चाहिए. स्वेच्छा से त्याग पत्र दे देने चाहिए. हवाला कांड तक इस परंपरा का पालन हुआ. जिन पर आरोप लगे थे, वह हटे. लालकृष्ण आडवाणी ने भी निर्दोष साबित होने तक पद छोड़ दी और चुनाव नहीं लड़ने का फैसला लिया. बिहार विधानसभा में विरोधी दल के नेता यशवंत सिन्हा हटे. क्योंकि हमारा मानदंड अलग है.”

स्व. अटल बिहारी वाजपेयी ( इंद्रकुमार गुजराल के प्रधानमंत्री रहते हुए लोकसभा में विपक्ष के नेता के तौर पर बिहार में भ्रष्टाचार पर दिये गये भाषण का अंश)

नीचे पढ़िये, सरयू राय की कुछ शिकायतें, जिसपर सरकार ने कार्रवाई नहीं की.

अगस्त 2018:

              सीपी सिंह जी ईईएसएल की एलईडी हफ्ते भर में हो जाती है फ्यूज, इसकी जांच हो.

–              मुख्य सचिव को पत्र लिख कर भवन निर्माण विभाग द्वारा की जा रही अनियमितताओं की जानकारी दी. साथ ही टिप्पणी किया कि एसा लगता है, जैसे झारखंड सरकार के विभागों ने अनियमितताएं करने की कसम खा ली है.

 

 18 सितंबर 2018 : सरयू राय ने एक ट्वीट किया. ट्वीट में उन्होंने लिखा-मेनहर्ट परामर्शी बनाम रांची शहर का सिवरेज-ड्रेनेज सिस्टमः लमहों ने खता की सदियों ने सजा पायी. यह ट्वीट सीधे-सीधे मुख्यमंत्री रघुवर दास पर निशाना माना गया. रघुवर दास मैनहर्ट मामले में फंसे हुए हैं.

– 05 जनवरी 2019 : एक बयान जारी कर कहा कि शाह ब्रदर्स का खनन पट्टा रद्द करना ही खान विभाग विभाग की समस्या का समाधान नहीं है. इसके लिये जिम्मेदार तत्कालीन विभागीय अधिकारियों और महाधिवक्ता पर कार्रवाई होनी चाहिए.

– 15 जनवरी   2019 : मंत्री सरयू राय ने मुख्यमंत्री सह गृह मंत्री रघुवर दास को पत्र लिख कर सवाल किया कि क्या अधिकारियों पर अदृश्य शक्ति की लगाम लगी हुई है, जो उन्हें कर्तव्य से विचलित कर रही है.

– 07 मई 2018 : मुख्य सचिव को पत्र लिख कर कहा कि राज्य में प्रशासनिक सिस्टम की जगह सिंडिकेट सिस्टम ने ले लिया है.

– 26 अप्रैल 2018 : मुख्यमंत्री को पत्र लिख कर कहा कि पशुपालन घोटाला जैसा ही है कंबल घोटाला, सीबीआई जैसी एजेंसी से करायी जाए जांच.

– 15 मार्च 2018 : तत्कालीन भवन निर्माण विभाग की प्रधान सचिव राजबाला वर्मा ने टेंडर मैनेज करने वाले इंजीनियरों को दिया संरक्षण, जांच हो.

26 दिसंबर 2017: सरयू राय ने सरकार से मांग की कि सारंडा में बिना जरुरत 31 किमी सड़क निर्माण का काम रामकृपाल कंस्ट्रक्शन को देने वाले राजबाला वर्मा पर कार्रवाई करें.

05 जनवरी 2018 : सरयू राय ने कहा कि पश्चिम सिंहभूम जिले में 18 कंपनियों ने 2700 करोड़ की नहीं, 6300 करोड़ की हेराफेरी की है.

29 नवंबर 2017 : झारखंड पीआरडी कुछ खास विभागों व लोगों के लिए है या सभी के लिए, खाद्य आपूर्ति विभाग का कवरेज क्यों नहीं ?

17 अक्टूबर 2017 : सरयू राय ने संवाददाता सम्मेलन कर मुख्यमंत्री रघुवर दास औऱ तत्कालीन मुख्य सचिव राजबाला वर्मा  काम करने के तरीके पर सवाल उठाए.

 – 09 अक्टूबर 2017 : सरयू राय ने ट्वीट किया. कहाः विकास की विडंबना, फेसबुक फ्रेंड करोड़ों में, ट्वीटर फॉलोअर लाख में, पड़ोसियों से सीधे मुंह बात नहीं.

 

हमें सपोर्ट करें, ताकि हम करते रहें स्वतंत्र और जनपक्षधर पत्रकारिता...

Get real time updates directly on you device, subscribe now.

Comments are closed.

%d bloggers like this: