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मेनहर्ट घोटाले को लेकर सरयू राय का सीएम को पत्र- 21 माह पहले हाइकोर्ट ने दिया था कार्रवाई का आदेश, जल्द करें कार्रवाई

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Ranchi : 28 सितंबर 2018 को हाइकोर्ट ने मेनहर्ट घोटाले मामले पर सरकार को कार्रवाई करने का आदेश दिया था. पर इस आदेश का अनुपालन अभी तक नहीं हो सका है. निर्दलीय विधायक सरयू राय ने इस मामले पर सीएम हेमंत सोरेन को पत्र लिखा है. डबल इंजन की रघुवर सरकार में निगरानी ब्यूरो को कार्रवाई करने की अनुमति नहीं मिली थी. अब फिर से इस मामले पर निगरानी ब्यूरो कार्रवाई करे.

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एमवी राव को नहीं मिली थी अनुमति

रघुवर दास जिस वक्त नगर विकास मंत्री थे उस वक्त मेनहर्ट परामर्शी की नियुक्ति में अनियमितता का मामला सामने आया था. इसके बाद इसकी आरंभिक जांच निगरानी ब्यूरो के तत्कालीन आइजी एमवी राव ने की थी. उन्होंने 22 सितंबर 2010 से लेकर 28 मार्च 2011 के बीच निगरानी आयुक्त से कार्रवाई करने की अनुमति मांगी थी. पर उस समय की निगरानी आयुक्त राजबाला वर्मा ने इसके लिए परमिशन ही नहीं दी थी.

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क्या कहा था हाइकोर्ट का आदेश

मुकदमा संख्या WP(PIL)No 2241/2016 (मेनहर्ट घोटाला) में झारखंड हाइकोर्ट ने 28 सितंबर, 2018 को एक आदेश पारित किया था. अंग्रेजी में यह आदेश था-

We are taking up this writ petition in spite of defects as this matter is pending for quite sometime. The writ petitioner has approached this court with various complaints but the grievances, which survives now, is that in spite of preliminary enquiry by the Vigilance Bureau, the State is not granting sanction.

Let the concerned authority of the State take a decision on this matter as expeditiously as possible keeping in mind the totality of the circumstances of the case and the investigation so far carried out. The writ petition stands disposed of in the above terms.

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इसमें साफ तौर पर उच्च न्यायालय ने राज्य सरकार को निगरानी ब्यूरो की जांच पर कार्रवाई करने की अनुमति शीघ्रातिशीघ्र देने को कहा था. पर इस आदेश पर अमल नहीं हुआ.

मुख्य साजिशकर्ता रघुवर दास

एमवी राव ने मेनहर्ट परामर्शी की नियुक्ति में गड़बड़ी का मामला पकड़ा था. निगरानी आयुक्त को उनकी लिखी चिट्ठी के आधार पर हाईकोर्ट ने 28.09.2018 को निर्णय सुनाया था. इसमें सरकार को आगे की कार्रवाई करने की शीघ्रातिशीघ्र अनुमति देने को कहा गया. मेनहर्ट नियुक्ति घोटाला के मुख्य किरदार और साजिशकर्ता रघुवर दास थे. वे उस समय राज्य के सीएम भी थे. उनकी सरकार ने न्यायालय के आदेश का पालन ही नहीं किया. अनुमति भी नहीं दी. इसी आधार पर उन्होंने मेनहर्ट घोटाले में खुद को क्लीन चिट दे दी थी.

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