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सरयू राय की अपील, नदी तालाबों का अतिक्रमण करने वालों का करें सामाजिक बहिष्कार, दिखाएं एकजुटता

Ranchi:  दामोदर और स्वर्णरेखा नदियों को प्रदूषण मुक्त करने के अभियान के तहत दूसरे पड़ाव में सोमवार को विधायक सरयू राय केतारी बगान चुटिया अवस्थित इक्कीसों महादेव मंदिर पहुंचे. इस दौरान उनके संग स्वर्णरेखा नदी प्रदूषण समीक्षा अभियान की टीम भी थी. यह मंदिर हरमू और स्वर्णरेखा के संगम स्थल के किनारे अवस्थित है. स्थानीय लोगों ने अभियान दल को बताया कि राँची शहर का सारा जल-मल हरमू नदी के द्वारा सीधे स्वर्णरेखा में बिना उपचार किये हुए मिलता है.  इससे यहाँ नदी अत्यधिक प्रदूषित हो गई है. इसका खामियाजा स्थानीय लोगों को भोगना पड़ रहा है. इस पर सरयू ने कहा कि शहर के बीचों-बीच बहने वाली हरमू नदी पर से अतिक्रमण जब तक नहीं हटेगा, तबतक स्थायी समाधान संभव नहीं है. अतिक्रमण करनेवालें चाहे जितने दबंग हों, शक्तिशाली वर्ग के हों, उनका सामाजिक बहिष्कार करना चाहिए. उन्हें जनशक्ति के दबाव से अतिक्रमण हटाने पर विवश करना होगा. इसके लिए सभी नागरिकों को एकजुट एवं जागरूक होना होगा. शहरी क्षेत्र में नदियों के प्रदूषण होने का मुख्य कारण नगरीय प्रदूषण है जो अधिक चिंताजनक है. प्रदूषण हटाने को जनता का सहयोग जरूरी है.

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सिवरेज ट्रीटमेंट प्लांट है बेकार

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पूर्व पार्षद सुरेश साहु ने मौके पर बताया कि पूर्व में नगर विकास विभाग ने एक सिवरेज ट्रीटमेंट प्लांट की स्थापना की थी, जो कभी भी कार्यशील नहीं रहा. नदी के प्रदूषण के कारण लोगों का जीवन नारकीय होता जा रहा है. वे अनेक बीमारियों की चपेट में आ रहे हैं. मंदिर के पुजारी ने बताया कि आज से 30-40 वर्ष पूर्व नदी का जल साफ था. लोग इसका पानी भी पीते थे. सारा अनुष्ठान इसी पानी से होता था. सरकार को यथाशीघ्र सिवरेज ट्रीटमेंट प्लांट चालू करना चाहिए  ताकि नदी स्वच्छ रह सके.

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नामकुम से मूरी तक हालात चिंताजनक

इक्कीसों महादेव मंदिर के बाद अभियान दल जोरार बस्ती के तेतरी टोली अवस्थित छठघाट गया. यहां दिखा कि काँटाटोली अंतर्गत विभिन्न बस्तियों से आनेवाला जल-मल, नाली का पानी नाला के माध्यम से स्वर्णरेखा में मिलता है. इसके बाद टीम टाटीसिल्वे स्थित उषा मार्टिन कारखाना के समीप स्थित एरिया में गयी. इस कारखाने का अपशिष्ट जल भी नदी में गिरता हुआ देखा गया. उसके बाद यात्रा दल गेतलसूद डैम पहुँचा. डैम की पानी की स्थिति भी कमोबेश भी बेहद खराब थी. यात्रा के अंतिम पड़ाव में मूरी जाकर स्थल का निरीक्षण, भ्रमण किया गया. प्रत्येक स्थानों से यात्रा दल में शामिल वैज्ञानिकों द्वारा जल, गाद एवं जलीय जीव-जन्तु के नमूने लिये गये.

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