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सरयू राय ने सचिव को पत्र लिख कहा- धान बेचनेवाले 3434 किसानों को उनके खून पसीने की कमाई का भुगतान करें

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Ranchi: खाद्य सार्वजनिक वितरण और उपभोक्ता मामलों के मंत्री सरयू राय ने एक बार फिर राज्य सरकार को आड़े हाथों लिया है. उन्होंने सरकार को धान बेचनेवाले 3434 किसानों को अब तक भुगतान नहीं किये जाने के मामले को गंभीरता से लेते हुए विभागीय सचिव को पत्र लिखा है. उन्होंने कहा है कि राज्य सरकार द्वारा आज समारोह आयोजित कर किया जा रहा है. दूसरी ओर जिन किसानों से उचित मूल्य एवं बोनस के आधार पर धान की खरीद विगत 31 मार्च 2019 के पहले की गयी है उन्हें धान की कीमत और बोनस की राशि का भुगतान नहीं किया गया है. उन्होंने कहा है कि सरकारी खजाने से किसानों को सहायता राशि का भुगतान कर देने में जितनी तत्परता दिख रही है, उतनी ही तत्परता वैसे किसानों को उनकी हकदारी का भुगतान करने में होनी चाहिए जिन्होंने पसीना बहा कर और निजी निवेश कर धान उपजाया है.

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श्री राय ने कहा है कि अब खरीफ की बुआई का समय आ गया है. किसान धान का बिचड़ा डाल रहे हैं. उन्हें खेती के लिए पूंजी की जरूरत है. उनकी अपनी पूंजी उनके किसी कसूर के सरकार के पास फंसी हुई है. 30.05.2019  को हुई विभाग की मासिक बैठक में सख्त हिदायत दी गयी थी कि जिन जिलों में भुगतान नहीं हुआ है, वहां के पदाधिकारी किसानों को धान खरीद के बकाया का भुगतान 10 जून 2019 तक कर दें, अन्यथा उनके विरुद्ध कारवाई होगी. उस दिन की बैठक में दिये गये जिलावार आंकड़ों के अनुसार 7,185 किसानों का लगभग 83 करोड़ रुपये का भुगतान उस दिन तक लंबित था. दिनांक 17.06.2019 की मासिक बैठक में बताया गया था कि 3,434 किसानों के लगभग 45 करोड़ रुपये का भुगतान नहीं हो पाया है.

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सात दिनों में भुगतान सुनिश्चित करना जरूरी

नियमानुसार जो किसान किसी पैक्स में अपना धान बेचेगा उसका भुगतान सात दिनों में हो जाना चाहिए. प्रक्रिया है कि पैक्स द्वारा किसानों से खरीदा गया धान अविलम्ब पैक्स से उठा कर संबंधित चावल मिल में भेज दिया जाये. धान जैसे ही चावल मिल में प्राप्त कर लिया जायेगा वैसे ही धान की कीमत किसान के खातों में भेज दी जायेगी.

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32247 किसानों ने 2.27 लाख टन से अधिक धान बेची थी

राज्य भर में कुल 34,247 किसानों से इस वर्ष 2,27,858 लाख टन धान की खरीद हुई है जिसमें से 31,409 किसानों को लगभग 396 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया. अब भी 2,838 किसानों का लगभग 36 करोड़ का भुगतान लंबित है. कई जिलों में किसानों से खरीदा गया धान अब भी पैक्स में पड़ा है. इसे मिल में नहीं भेजा गया है.

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किसान दर-दर की ठोकरें खा रहे

अनेक मामलों में ऐसा नहीं हो पाया है और किसान भुगतान के लिए दर-दर की ठोकरें खा रहे हैं. इसके लिए जिम्मेदारी सुनिश्चित कर दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई शुरू करें. जिन किसानों का धान संबंधित पैक्स ने खरीद लिया है और धान की खरीदगी की रसीद किसान को दे दिया है उस किसान को पैक्स द्वारा दी गई रसीद के आधार पर भुगतान कर दिया जाये. सरकार के गोदाम में अथवा चावल मिल में धान नहीं पहुंचा है तो इसके लिए किसान जिम्मेवार नहीं हैं बल्कि खरीददार दोषी हैं. इसलिए किसान को खरीदे गये धान की कीमत का और इस पर दिये जा रहे बोनस अनुदान का भुगतान त्वरित गति से किया जाये.

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