JharkhandLead NewsRanchi

सरयू राय ने मंत्री बन्ना पर विधानसभा की अवमानना की कार्रवाई संचालित करने का स्पीकर से किया आग्रह

Ranchi : विधायक सरयू राय ने स्वास्थ्य मंत्री बन्ना गुप्ता पर विधानसभा की अवमानना की कार्रवाई संचालित किये जाने का आग्रह विधानसभा स्पीकर से किया है. सोमवार को इस संबंध में उनकी ओर से विधानसभा अध्यक्ष को एक ज्ञापन दिया गया है. इसमें श्री राय ने कहा है कि सभा के गत मानसून सत्र में उनके प्रश्न के लिखित उत्तर में मंत्री ने सदन को जानकारी दी थी कि पूर्वी सिंहभूम के प्रभारी सिविल सर्जन विभागीय जांच में दोषी पाये गये हैं. उनकी सेवा से बर्खास्तगी प्रक्रियाधीन है.

परंतु मंत्री के स्तर से उन्हें संरक्षण दिया जा रहा है. उन्हें बर्खास्त करने की राह में रोड़ा अटकाया जा रहा है. विधानसभा में स्पष्ट आश्वासन के बावजूद मंत्री ने उनकी बर्ख़ास्तगी का प्रस्ताव मंत्रिपरिषद के पास संकल्प के रूप में नहीं भेजा.

इसके विपरीत सामान्य रूप से संचिका सीएम को भेज दी. राजपत्रित अधिकारी को बर्खास्त करने की शक्ति सीएम को नहीं है. यह शक्ति मंत्रिपरिषद को है. स्पीकर इस पर वैधानिक एक्शन लें.

SIP abacus

इसे भी पढ़ें:अनुबंध कर्मचारियों ने सरकार को समर्थन तो दिया है लेकिन सत्ता के सामने समर्पण नहीं कर किया है : महासंघ

Sanjeevani
MDLM

विधानसभा को भी झांसा

सरयू राय के मुताबिक बर्खास्तगी संबंधी फाइल जब मुख्य सचिव के पास गयी तो उन्होंने कार्मिक विभाग से मंतव्य मांगा. संचिका एक माह तक कार्मिक विभाग में दबी रही. बाद में विभाग ने मंतव्य दिया कि दोष सिद्ध अधिकारी की बर्ख़ास्तगी की शक्ति मंत्रिपरिषद के है.

इस मंतव्य के अनुरूप बर्खास्तगी का संकल्प भेजने के लिए संचिका स्वास्थ्य विभाग में भेज दी गयी. स्वास्थ्य विभाग ने बर्खास्तगी के प्रस्ताव के साथ संचिका मंत्रिपरिषद में भेजने के बदले दोष सिद्ध अधिकारी से पुनः स्पष्टीकरण मांगा.

इसे भी पढ़ें:अविश्वसनीयः बंद खदान में चार दिनों से फंसे 4 लोग मौत को मात देकर आये बाहर

कहा कि वे 30 अक्टूबर तक इस बारे में जवाब दें. विधानसभा सचिवालय ने स्वास्थ्य विभाग से इस बारे में जवाब मांगा तो स्वास्थ्य विभाग ने गत 2 नवम्बर 2021 को सभा सचिवालय को लिखित उत्तर भेजा.

कहा कि दोष सिद्ध अधिकारी ने जवाब नहीं भेजा है. परंतु इसपर चुप्पी साध ली कि बर्ख़ास्तगी का प्रस्ताव मंत्रिपरिषद के समक्ष भेजा है या नहीं?

विधानसभा अध्यक्ष से राय ने कहा है कि स्वास्थ्य विभाग विधानसभा से तथ्य छुपा रहा है. संबंधित संचिका पर मंत्री स्तर से दंड देने की विधि सम्मत कारवाई रोकी जा रही है. संचिका अब भी स्वास्थ्य विभाग में है. यह विधानसभा की अवमानना है.

इसे भी पढ़ें:राज्यसभा ने 12 सांसदों को पूरे सत्र के लिए सस्पेंड किया, नहीं आ सकेंगे सदन में

अधिकारी पर गंभीर आरोप

ज्ञापन के मुताबिक सरकारी सेवा में रहते संबंधित अधिकारी ने 2005 में बिहार के झंझारपुर से विधानसभा का चुनाव समाजवादी पार्टी से लड़ा था. उसी वर्ष (2005) स्वास्थ्य विभाग के वर्तमान मंत्री भी जमशेदपुर से समाजवादी पार्टी से चुनाव लड़े थे. दोनों चुनाव नहीं जीत पाये.

यह मंत्री द्वारा दोषी अधिकारी को संरक्षण देने का एक कारण हो सकता है. चुनाव के लिए नामांकन भरते समय इस अधिकारी ने यह तथ्य छुपा लिया था कि वे सरकारी सेवा में हैं.

यह अपने आप में एक अपराध है. बाद में इन्होंने अपनी सेवा बिहार से झारखंड स्थानांतरित करा ली. शिकायत मिलने पर 2014 में झारखंड सरकार ने बिहार के मधुबनी ज़िला के ज़िलाधिकारी को पत्र लिख कर आरोप संपुष्ट कराया. फिर त्वरित निर्णय लेने की जगह विभागीय कारवाई आरंभ हुई.

जांच अधिकारी ने जांचोपरांत 2019 में दोष सिद्ध किया और मंतव्य दिया कि इन्हें सेवा से बर्ख़ास्तगी का दंड दिया जाये.

इसे भी पढ़ें:रांची-पटना के बीच चलनेवाली ट्रेन अलग-अलग तारीखों में रहेगी कैंसल, जानें टाइम टेबल

Related Articles

Back to top button