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सरयू राय ने इस्तीफा टाला, राज्यपाल से मिलने के बाद कहा “जो एजेंडा पहले मिलने का था उसमें परिवर्तन किया”

Ranchi:  अपने तय समय पर सूबे के खाद्य आपूर्ति मंत्री सरयू राय राज्यपाल से मिलने राजभवन पहुंचे. राजभवन के बाहर मीडिया उनका इंतजार कर रही थी. जैसी खबरें मीडिया में चली थीं, उससे कयास यह लगाए जा रहे थे कि शायद नाराज मंत्री सरयू राय राज्यपाल से इस्तीफे को लेकर कुछ बात करें. लेकिन ऐसा नहीं हुआ. बाहर निकले के बाद उन्होंने जो बात मीडिया के सामने रखी उससे यह साफ नहीं हो पाया कि वो राज्यपाल के पास पार्टी में चल रही गतिविधि के बारे बात करने गए थे या सरकारी कामकाज में वरीय अधिकारियों की शिकायत लेकर. उन्होंने सबसे पहले यह कहा कि मैंने जो सोच कर राज्यपाल से मिलने का समय लिया था, उसका एजेंडा बदला है. उन्होंने यह साफ नहीं किया कि उनका पहले का एजेंडा क्या था. कुल मिला कर गुरुवार को न्यूज विंग के खबर लिखने से लेकर शुक्रवार को राज्यपाल से सरयू राय के मिलने तक काफी तेजी से घटनाक्रम में बदलाव हुआ है. निश्चित तौर से पार्टी की तरफ से सरयू राय पर संयम बरते का दबाव बनाया गया. बहरहाल जानते हैं सरयू राय ने राज्यपाल से मिल कर क्या कहा. सरयू राय की जुबानी-

“जो एजेंडा मिलने का था पहले उसमें थोड़ा परिवर्तन हुआ है. राज्यपाल महोदय के सामने सरकार के विभिन्न विभाग के अधिकारियों की बात मैंने रखी. मैंने यह बताने की कोशिश की कि अधिकारी किस तरह से काम करते हैं. कई फाइलों की कॉपी मेरे पास थी, जिसमें साफ तौर से देखा जा सकता है कि गड़बड़ी हो रही है. उन फाइलों को मैंने राज्यपाल को सौंपा. राज्य सरकार की मुखिया राज्यपाल होती हैं, तो मैंने सोचा कि सरकार में जो भी गड़बड़ियां हो रही हैं, उन गड़बड़ियों को राज्यपाल तक पहुंचाया जाए. मैंने करीब 7-8 फाइलों को राज्यपाल के सामने रखा और उनको बताया कि देखिए इन फाइलों में कैसे अधिकारी काम कर रहे हैं. वैसे मेरे पास ऐसे करीब 100 फाइलें हैं, जिसमें साफ तौर से देखा जा सकता है कि गड़बड़ियां हो रही हैं. भारतीय प्रशासनिक अधिकारी जब नौकरी ज्वाइन करते हैं तो वह शपथ लेते हैं कि वह संविधान के मुताबिक काम करेंगे और जो रूल ऑफ लॉ है उसी व्यवस्था के तहत काम करेंगे. अधिकारी किसी पार्टी, किसी मंत्री, किसी नेता के अधिकार की रक्षा करने के लिए नहीं होते हैं, बल्कि वह संविधान की रक्षा करने के लिए होते हैं…

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याद दिलायी नाराजगी

अधिकारियों की बात खत्म करते हुए सरयू राय ने अपने मामले में कहा कि पहले की जो बातें थी. मैंने अपने राष्ट्रीय अध्यक्ष को उस बारे लिखा था आठ फरवरी को. उसमें कुछ अपमानजनक विषय हैं. उनका निदान होना चाहिए. 28 तारीख तक निदान करने को मैंने कहा था. इस बारे रामलाल जी बीच में आए थे, उन्होंने कहा है कि बिहार के स्वास्थ्य मंत्री और झारखंड के लोकसभा चुनाव के प्रभारी मंगल पांडे को मामले से जुड़े सारा काम सौंपा है. जो समस्या है उसे सही संदर्भ में निदान होगा. लेकिन अब तो चुनाव आ रहा है, चुनाव के समय में कोई ऐसी बात नहीं होनी चाहिए कि किसी प्रकार से नुकसान हो या सरकार के बारे में कोई गलत छवि बने. इसलिए एक व्यवस्था बनी है. उसे मानना मेरा कर्तव्य है. मंगल पांडे की थोड़ी व्यवस्तता है. प्रधानमंत्री जी भी बिहार आने वाले हैं. राष्ट्रीय अध्यक्ष का बिहार दौरा है. इन सबसे निबटने के बाद उम्मीद है कि वो समय निकालेंगे और समस्याओं का समाधान होगा.

इस्तीफे पर सरयू राय बोले

सवालः आपने कहा कि एजेंडा में बदलाव आया था, परिवर्तन हुआ है क्या विषय था और क्या बदलाव आया है.

जवाबः पहले मेरे मन में था. मैंने फरवरी तक का समय दिया था और मैंने इसे सार्वजनिक भी किया था. जिस तरह से राज्य के महाधिवक्ता अजित कुमार ने काम किया है, जिनकी नियुक्ति सरकार की ही तरफ से हुई थी. कैबिनेट ने उनकी नियुक्ति की थी और कैबिनेट के एक मंत्री के खिलाफ ही बार काउंसिल में निंदा का प्रस्ताव पारित कराते हैं. मंत्री होने के नाते कैबिनेट को सरकार को इसके बारे लिखा जाता है और कोई कार्रवाई नहीं होती है. यहां तक कि एक स्पष्टीकरण भी नहीं मांगा जाता है, इस तरह मंत्री परिषद में रहना बड़ी लज्जाजनक बात है. इसी संदर्भ में मैं राष्ट्रीय अध्यक्ष के समक्ष भी गया था. पहले मेरे मन में था कि मैं काफी दिनों तक इस मंत्री परिषद में नहीं रह सकूंगा. लेकिन राष्ट्रीय स्तर से जब कुछ कदम उठाए गए तो मुझे लगा कि हमलोग जिस दल में हैं, उस दल का एक अनुशासन ही नहीं बल्कि परंपरा और संस्कृति भी है कि राष्ट्रीय नेतृत्व जो कहता है उसपर भरोसा कर के उसे मानने चाहिए.

जूनियर हैं मंगल पांडे, लेकिन पद है तो निर्णय वही लेंगे

मंगल पांडे को पार्टी की तरफ से मेरे मामले को देखने के लिए कहा गया है. वैसे तो पार्टी में और भी कई सीनियर नेता हैं. जूनियर भी हैं. लेकिन पार्टी में जो पद पर रहता है वह कनीय है कि वरीय है इसको अलग रख कर सबका महत्व होता है. मेरे मामले में राष्ट्रीय अध्यक्ष, राष्ट्रीय महामंत्री से बात होते हुए मंगल पांडे के पास पहुंची है, तो इन दोनों की भी शक्तियां लेकर इस मामले में वो बात करेंगे. हमारे राष्ट्रीय अधिकारियों ने कहा है कि चुनाव आ गया है इस वजह से परेशानियां हैं. कार्यक्रम हो रहे हैं. इसलिए छह मार्च तक तो मंगल जी व्यस्त हैं. उसके बाद वो समय निकालेंगे या नहीं उनके ऊपर निर्भर है. अब वो पांच दिन लेते हैं, दस दिन लेते हैं कि पंद्रह दिन लेते हैं, यह उनके ऊपर भी निर्भर करता है. यह काम उन्हें हमारे राष्ट्रीय अधिकारी ने दिया है, इसलिए मुझे उनपर भरोसा करना चाहिए.

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मंगल पांडे जी से कल बात हुई हमारी. उसके बाद उन्होंने भी मुझे फोन किया. रामलाल जब पिछली बार आए थे तो तभी उन्होंने मंगल पांडे को मामले को देखने को कह दिया था. मंगल पांडे हिमाचल प्रदेश के भी प्रभार में रहे हैं. वहां कार्यक्रम थे इसलिए हो सकता है कि समय नहीं निकाल पाए. इस नाते ही इन सारी बातों को मैंने राज्यपाल महोदया के सामने रखा है. पार्टी की परंपरा को मैं मानते आया हूं. पार्टी में अगर कोई व्यक्ति मुझसे कनिष्ट रहा हो, बहुत जूनियर रहा हो और आज हमसे ऊपर के पद पर है, तो महत्व उसकी बात की होती है. निर्णय भी वही लेगा.

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