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सरयू विरोध या कंपनी प्रेम, आखिर जन भावना के खिलाफ क्यों खड़ी है जमशेदपुर भाजपा

Anand Kumar

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जमशेदपुर में जुबली पार्क रोड को खोलने के मुद्दे पर राजनीतिक घमासान मचा है. 1958 के बाद पहली बार जब  पिछले साल कोरोना काल में पार्क को बंद किया गया था, तो सोनारी-कदमा और सीएच एरिया को साकची से जोड़नेवाली यह सड़क भी बंद हो गयी. इस सड़क से रोजोना लाखों लोग आना-जाना करते थे. सड़क जब डेढ़ साल तक बंद रह गयी, तो शहर का रखरखाव देखनेवाली कंपनी जुस्को ने इस सड़क को खोद कर घास बिछानी शुरू की. यानी इसे आम आवाजाही के लिए पूरी तरह बंद करने की तैयारी थी. जाहिराना तौर पर इसके खिलाफ जनाक्रोश भड़क गया. इस आक्रोश की आवाज बने जमशेदपुर पूर्वी के विधायक सरयू राय. जब सरयू राय की मुहिम को लोगों का समर्थन मिलने लगा तो, दूसरी राजनीतिक पार्टियों ने भी इस मुद्दे को लपकने में देरी नहीं की. सड़क को पहले की तरह खोलने की मांग ने तेजी पकड़ी, तो राज्य में सत्तारूढ़ झामुमो और कांग्रेस ने भी पार्क और सड़क को खोलने के लिए प्रशासन पर दबाव बनाना शुरू किया.

जुबली पार्क रोड को खुलवाने के लिए विधायक सरयू राय प्रयासरत हैं.

कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अजय कुमार ने भी जुबली पार्क की बंद सड़क को खोलने की हिमायत की, लेकिन राज्य में प्रमुख विपक्षी दल भाजपा के जमशेदपुर महानगर अध्यक्ष गुंजन यादव ने जनभावना के प्रतिकूल जाकर बिल्कुल उलटी राह पकड़ ली. उन्होंने बयान देकर जुबली पार्क रोड को बंद करने की वकालत की. जमशेदपुर शहर की लीजधारक कंपनी टाटा या जुस्को ने तो इस मसले पर कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं की, लेकिन गुंजन यादव ने कंपनी के स्वघोषित माउथपीस की भूमिका ओढ़ ली. यादव ने पर्यावरण और नागरिक स्वास्थ्य का हवाला देते हुए इस सड़क को बंद कर दूसरे कई वैकल्पिक समाधान भी सुझा डाले. अब यादव के इस सुझाव के खिलाफ जाकर उनकी ही पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं ने अपनी चुप्पी तोड़ते हुए सड़क और पार्क को खोलने की मांग उठा दी है. इनमें भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष और वर्तमान में वरिष्ठ नेता अभय सिंह सबसे मुखर हैं. अजय श्रीवास्तव जैसे कुछ और भाजपा नेता भी गुंजन यादव के बयान के विपरीत राय रख रहे हैं. पूर्वी सिंहभूम के उपायुक्त सूरज कुमार ने भी कहा है कि वे बहुत जल्द सभी राजनीतिक दलों की बैठक बुलायेंगे, ताकि एक सर्वसम्मत राय बन सके.

इधर जमशेदपुर के राजनीतिक गलियारे और प्रबुद्ध वर्ग में इस बात को लेकर काफी चर्चा है आखिर पार्टी के रूप में भाजपा जन भवनाओं के उलट क्यों जा रही है. इस मुद्दे पर नजदीकी से नजर रख रहे लोगों का कहना है कि विपक्ष में होने के कारण भाजपा को तो इस मुद्दे को सबसे पहले लपक लेना चाहिए था, लेकिन जब पार्क रोड को लेकर आम लोग आवाज उठा रहे थे, तब तो भाजपा के नेताओं ने खामोशी की चादर ओढ़ रखी थी. लेकिन जैसे ही विधायक सरयू राय ने इस मुद्दे को आगे बढ़ाया और उपायुक्त से बात की, तो बाकी दल इस मुद्दे पर जनता के साथ हो गये. लेकिन शायद इस डर से कि कहीं इसका क्रेडिट सरयू राय को न मिल जाये, भाजपा विपरीत ध्रुव पर जाकर खड़ी हो गयी. अब वह अकेली और अलग-थलग पड़ गयी है. जनता में गुंजन यादव के बयान की तीखी प्रतिक्रिया है. यही कारण है कि चुनाव लड़ने के इच्छुक भाजपा के कई सीनियर नेता अब चाहे-अनचाहे जनता के साथ खड़े होते दिख रहे हैं. वे जानते हैं कि अपने आका के इशारे पर सरयू राय के विरोध के चक्कर में गुंजन यादव ने जन भावना के खिलाफ जाकर जो उड़ता तीर ले लिया है, वह चुनावी अखाड़े में उन्हें चित कर सकता है. यही कारण है कि ऐसे नेता और महानगर भाजपा दोनों अलग-अलग ध्रुव पर खड़े हैं.

1958 में लोगों के आवागमन के लिए खोली गयी थी सड़क.

जमशेदपुर में चर्चा है कि भाजपा की सरकार रहते यहां के कुछ भाजपाइयों ने स्थानीय कंपनी से खूब लाभ लिया था. रिश्तेदारों को नौकरी, स्थायीकरण, क्वार्टर, ठेका जैसे लाभ का मजा लूट रहे ऐसे नेता अब कंपनी के खिलाफ जाने की हिमाकत कैसे कर सकते हैं. इसलिए कंपनी की स्वामीभक्ति कर रहे हैं. भले ही इस चक्कर में जनता भाजपा के खिलाफ हो जाये. जमशेदपुर के एक राजनीतिक प्रेक्षक का कहना है कि नेताओं के इसी आपसी अहं की लड़ाई में मुख्यमंत्री रहते रघुवर दास को अपनी सीट सरयू राय के हाथों गंवानी पड़ी और जमशेदपुर पश्चिम पर कांग्रेस का कब्जा हो गया. महानगर भाजपा ने अभी भी इससे सबक नहीं सीखा है. अगर पार्क के मुद्दे पर भी वह सरयू राय विरोध के चक्कर में कारपोरेट कंपनी का मोहरा बनेगी, तो आनेवाले समय में इस अदूरदर्शी कदम का खामियाजा पार्टी को उठाना पड़ेगा.

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